खुद को टाइगर कहने वाली ममता अब CJP से समझौता कर रही हैं, ये उनका पतन है- लॉकेट चटर्जी
पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी, तीखी और गरमागरम खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की फायरब्रांड नेत्री और पूर्व सांसद लॉकेट चटर्जी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अब तक का सबसे बड़ा और हमलावर राजनीतिक प्रहार किया है। ममता बनर्जी के हालिया राजनीतिक रुख और प्रशासनिक फैसलों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लॉकेट चटर्जी ने कहा कि जो नेता कभी खुद को बंगाल की 'टाइगर' (बाघिन) कहकर सीना चौड़ा करती थीं, आज वही ममता बनर्जी विभिन्न मामलों में समझौते की राह पर चल पड़ी हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह मुख्यमंत्री का और उनकी पार्टी का स्पष्ट राजनीतिक पतन है। लॉकेट चटर्जी के इस आक्रामक बयान के बाद से बंगाल की सियासत में भूचाल आ गया है और तृणमूल कांग्रेस (TMC) तथा भाजपा के बीच जुबानी जंग अपने चरम पर पहुंच गई है। आइए जानते हैं कि लॉकेट चटर्जी के इस विस्फोटक बयान के पीछे की असली वजह क्या है और बंगाल में सियासी पारा क्यों सातवें आसमान पर है।
ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर और 'टाइगर' छवि पर लॉकेट चटर्जी का तंज
लॉकेट चटर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और राजनीतिक सभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी के पुराने तेवरों और मौजूदा कार्यशैली की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत हमेशा आक्रामक तेवरों और विपक्ष के खिलाफ सड़क पर संघर्ष करने के नाम पर की थी। वे अक्सर खुद को बंगाल की एक ऐसी 'टाइगर' के रूप में पेश करती थीं जो किसी के आगे झुकती नहीं है। लेकिन वक्त बीतने के साथ और राज्य में लगातार बढ़ते भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलताओं तथा कानूनी शिकंजों के बीच अब वही ममता बनर्जी विभिन्न स्तरों पर समझौते करती हुई नजर आ रही हैं। लॉकेट चटर्जी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जबान की अकड़ और जमीन की हकीकत में जब फर्क आ जाता है, तो ऐसा ही वैचारिक पतन देखने को मिलता है।
CJP और अन्य संवेदनशील मामलों पर समझौते के आरोपों से गरमाई बंगाल की सियासत
भाजपा नेत्री लॉकेट चटर्जी के इस आक्रामक हमले के केंद्र में वे तमाम प्रशासनिक और कानूनी मुद्दे रहे हैं जिन पर हाल के दिनों में राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि ममता सरकार अपनी असफलताओं को छिपाने और केंद्रीय जांच एजेंसियों के शिकंजे से बचने के लिए कई मोर्चों पर आंतरिक समझौते करने में जुटी हुई है। लॉकेट चटर्जी ने आरोप लगाया कि बंगाल की जनता जिन उम्मीदों के साथ ममता बनर्जी के साथ खड़ी हुई थी, आज उन उम्मीदों का गला घोंटा जा रहा है। महिलाओं की सुरक्षा, कानून व्यवस्था की बदतर हालत और सरकारी महकमों में फैली अराजकता के बीच सरकार का यह समझौतावादी रवैया राज्य की जनता के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात है।
टीएमसी (TMC) का पलटवार: लॉकेट चटर्जी के बयानों को बताया राजनीतिक हताशा
लॉकेट चटर्जी के इस तीखे बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं ने भी तुरंत मोर्चा संभाल लिया और भाजपा पर जोरदार पलटवार किया है। टीएमसी प्रवक्ताओं ने लॉकेट चटर्जी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी राजनीतिक हताशा और पब्लिसिटी स्टंट करार दिया है। टीएमसी का कहना है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हमेशा से जनहित के मुद्दों पर बिना डरे लड़ती आई हैं और उन्हें किसी के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है। टीएमसी नेताओं ने कहा कि आगामी चुनावों में अपनी जमीन खिसकती देख भाजपा के नेता अब अनर्गल बयानबाजी पर उतर आए हैं, जिसे बंगाल की समझदार जनता भली-भांति जानती है और चुनावों में इसका मुंहतोड़ जवाब देगी।
आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल में बढ़ता राजनीतिक तापमान
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस तरह के तीखे जुबानी हमले इस बात का स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में राज्य का चुनावी माहौल बेहद खतरनाक और रोमांचक होने वाला है। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी ममता सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा और प्रशासनिक अराजकता के मुद्दों को लेकर आक्रामक तेवर अपनाए हुए है, वहीं दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस अपनी लोक कल्याणकारी योजनाओं और बंगाली अस्मिता के कार्ड के सहारे अपनी राजनीतिक जमीन को बचाने में जुटी हुई है। लॉकेट चटर्जी के इस 'राजनीतिक पतन' वाले बयान ने विपक्षी खेमे में नया जोश भर दिया है, जबकि सत्ताधारी दल इस पर आक्रामक मुद्रा में खड़ा है।
बंगाल की जनता और भविष्य की राजनीतिक दिशा
आज पश्चिम बंगाल का आम नागरिक महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक उदासीनता के दो पाटों के बीच पिस रहा है। ऐसे में राजनेताओं के बीच जुबानी जंग भले ही मीडिया की सुर्खियां बटोर रही हो, लेकिन राज्य का असल मुद्दा विकास, सुशासन और सुरक्षित भविष्य का है। चाहे ममता बनर्जी खुद को 'टाइगर' कहें या भाजपा नेता उनके पतन की घोषणा करें, अंतिम फैसला बंगाल की उस महान जनता के हाथ में है जो मतपेटी के जरिए अपनी ताकत का अहसास कराती है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि दोनों प्रमुख दलों की यह तकरार बंगाल की सियासत को किस नए मुकाम पर ले जाती है।