नजरबंदी की आशंका के बीच सड़क पर उतरीं महबूबा मुफ्ती! 370 की बरसी पर कश्मीर में विपक्ष का बड़ा प्रदर्शन
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने की बरसी पर एक बार फिर घाटी की सियासत गरमा गई है। किसी भी अप्रिय स्थिति या संभावित नजरबंदी की आशंकाओं को दरकिनार करते हुए पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती सीधे सड़कों पर उतर आई हैं। उनके साथ भारी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और विपक्षी नेता भी इस बड़े विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इस प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन राजनीतिक सरगर्मी ने एक बार फिर केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।
नजरबंदी की चर्चाओं के बीच अचानक सड़कों पर उतरीं महबूबा मुफ्ती
अनुच्छेद 370 की बरसी के मद्देनजर पिछले कुछ दिनों से कयास लगाए जा रहे थे कि घाटी के प्रमुख नेताओं को एहतियातन नजरबंद (House Arrest) किया जा सकता है। पुलिस और प्रशासन की ओर से सुगबुगाहट तेज थी, लेकिन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए महबूबा मुफ्ती अचानक अपने समर्थकों के साथ सार्वजनिक रूप से सड़क पर उतर आईं। उनके इस अप्रत्याशित कदम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, जिसके चलते मौके पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल भी देखने को मिला।
विपक्षी दलों का तीखा हमला, लोकतंत्र की बहाली की मांग
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान महबूबा मुफ्ती और अन्य विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर अपनी आवाज बुलंद की। नेताओं का कहना है कि 5 अगस्त 2019 को राज्य के विशेष दर्जे को समाप्त करना कश्मीर के लोगों के अधिकारों पर सीधा हमला था। विपक्षी दलों का आरोप है कि घाटी में लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंटा जा रहा है और विरोध करने की आवाज को दबाने के लिए प्रशासन दमनकारी रुख अपना रहा है। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व की स्थिति बहाल करने और राजनीतिक बंदियों की रिहाई की पुरजोर मांग की है।
घाटी में हाई अलर्ट, चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात
इस बड़े राजनीतिक प्रदर्शन के बाद से पूरे श्रीनगर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुख्य चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) को तैनात किया गया है। खुफिया एजेंसियां भी पूरी तरह मुस्तैद हैं ताकि किसी भी तरह की उपद्रवी गतिविधियों या असामाजिक तत्वों को तुरंत नियंत्रित किया जा सके। प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि शहर की शांति भंग न हो।