कश्मीर से असम तक मानसून का भयंकर कहर: पहलगाम में उफनी लिद्दर नदी, असम में बाढ़ का बढ़ा खतरा

कश्मीर से असम तक मानसून का भयंकर कहर: पहलगाम में उफनी लिद्दर नदी, असम में बाढ़ का बढ़ा खतरा

श्रीनगर/गुवाहाटी। देश के उत्तरी छोर से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक मानसून अपने सबसे रौद्र रूप में आ गया है। कश्मीर घाटी से लेकर असम तक लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पर्वतीय इलाकों से लेकर मैदानी और तटीय क्षेत्रों तक नदियां उफान पर हैं और कई जगहों पर खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। मौसम की इस मार से देश के अलग-अलग हिस्सों में न केवल यातायात प्रभावित हुआ है, बल्कि स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

कश्मीर घाटी में मौसम का तांडव: पहलगाम में उफनाई लिद्दर नदी और बढ़ी मुश्किलें

शुरुआत करें उत्तर भारत के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की, तो वहां लगातार हो रही भारी बारिश ने वादी की खूबसूरती को फिलहाल आपदा में बदल दिया है। दक्षिण कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल पहलगाम में स्थिति खासी तनावपूर्ण बनी हुई है। यहां लगातार बरस रहे पानी की वजह से लोकप्रिय लिद्दर नदी पूरी तरह उफान पर आ गई है। नदी का बढ़ता जलस्तर और उसकी तेज धाराएं आसपास के इलाकों के लिए खतरा बन गई हैं। अमरनाथ यात्रा के पड़ाव और पर्यटन स्थलों पर घूमने आए सैलानियों को प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उफनती लिद्दर नदी की भयावह तस्वीरों को देखकर स्थानीय लोगों की पुरानी आपदाओं की यादें ताजा हो गईं हैं। जलस्तर में लगातार हो रहे इजाफे के कारण प्रशासन ने नदी के किनारे जाने वाले रास्तों को अस्थाई रूप से बंद कर दिया है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ का विकराल रूप: असम में बेकी नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पार

कश्मीर से हजारों किलोमीटर दूर पूर्वोत्तर राज्य असम में भी मानसून का कहर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। असम के कई जिलों में लगातार हो रही झमाझम बारिश के चलते नदियां उफनाने लगी हैं। विशेष तौर पर बेकी नदी का जलस्तर तेजी से खतरनाक सीमा को पार कर चुका है, जिससे आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, कई गांवों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। किसानों की खड़ी फसलें जलमग्न हो चुकी हैं और लोगों को अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ रही है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों के लिए टीमों को तैनात कर दिया है ताकि समय रहते लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।

पहाड़ों से लेकर मैदानों तक क्यों बिगड़ रहे हैं हालात? पर्यावरण और मौसम का नया पैटर्न

मौसम विज्ञानियों का मानना है कि देश के इन दूर-दराज के हिस्सों में एक साथ इस तरह की मानसूनी उथल-पुथल जलवायु परिवर्तन और वेदर पैटर्न्स में आ रहे बड़े बदलावों का परिणाम है। बादलों का अचानक एक ही क्षेत्र में केंद्रित होकर अत्यधिक बारिश करना यानी क्लाउडबर्स्ट जैसी घटनाएं पर्वतीय राज्यों में आम होती जा रही हैं। कश्मीर में लिद्दर नदी का उफनना और असम में बेकी नदी का जलस्तर बढ़ना इस बात का प्रमाण है कि पर्यावरण संतुलन किस तरह बिगड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकारें स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और अनावश्यक रूप से नदियों या जल स्रोतों के पास न जाएं।