महाराष्ट्र की सियासत में नया ट्विस्ट: एनडीए से दूरी, फिर भी संसद में मोदी सरकार के इन दो बड़े बिलों को समर्थन देंगे शरद पवार
देश की राजधानी से लेकर मुंबई के राजनीतिक गलियारों तक इस समय एक ही चर्चा सबसे तेज है कि आगामी मानसून सत्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) क्या रुख अपनाने वाली है। अंदरूनी सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, शरद पवार ने संसद के आगामी सत्र के लिए एक बेहद चौंकाने वाली और चतुर रणनीतिक चाल चली है। चर्चा है कि पवार का गुट राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए में शामिल हुए बिना ही केंद्र सरकार के दो सबसे महत्वपूर्ण कानूनों, महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक के पक्ष में मतदान कर सकता है। इसे भारतीय राजनीति में एक बड़े गेम चेंजर के रूप में देखा जा रहा है।
गठबंधन से परहेज पर मुद्दों के आधार पर साथ देने का प्लान
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि शरद पवार विपक्षी खेमे में अपनी मजबूत स्थिति को बनाए रखते हुए सरकार के कामकाज में रोड़ा नहीं अटकाना चाहते। यही वजह है कि वर्तमान में संसद में आठ सांसदों वाला यह गुट एनडीए का हिस्सा बने बिना केवल जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार को समर्थन देगा।
दरअसल, एनसीपी के अंदर एक धड़ा ऐसा भी है जो लंबे समय से सत्ताधारी गठबंधन के साथ मिलकर काम करने की वकालत कर रहा है। ऐसे में शरद पवार ने संगठन के भीतर किसी भी संभावित बगावत या टूट को रोकने के लिए बीच का रास्ता निकाला है और खुद को सिर्फ इन दो खास विधेयकों तक सीमित रखने का फैसला किया है।
मध्यरात्रि की सीक्रेट मुलाकातों से बढ़ा राजनीतिक पारा
इस बीच, मुंबई में मंगलवार की देर रात हुई कुछ उच्च स्तरीय बैठकों ने इस कूटनीतिक हलचल को और हवा दे दी है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास पर अचानक दोनों खेमों के नेताओं का जमावड़ा देखा गया। अजीत पवार गुट के प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे के बाद शरद पवार के बेहद भरोसेमंद साथी जयंत पाटिल भी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे।
देर रात हुई इन मुलाकातों के एजेंडे को लेकर हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक पंडित इसे पार्टी के दोनों धड़ों को फिर से करीब लाने या राज्य में किसी नए सियासी समीकरण के ताने-बाने के तौर पर देख रहे हैं। साल 2023 में हुई बड़ी टूट के बाद दोनों गुटों के नेताओं की ऐसी मुलाकातें महाराष्ट्र की राजनीति में किसी बड़े तूफान का संकेत दे रही हैं।
20 जुलाई से शुरू हो रहे सत्र में क्या है सरकार का एजेंडा
संसद का आगामी मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जिसमें मोदी सरकार का सबसे बड़ा फोकस परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। सरकार इस सत्र में संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जिसके कानून बनने के बाद देश में लोकसभा सीटों की कुल संख्या बढ़कर 850 तक हो सकती है। ऐसे में अगर शरद पवार गुट एनडीए से बाहर रहकर भी इस ऐतिहासिक विधेयक को अपना समर्थन देता है, तो सरकार के लिए इसे पास कराना न सिर्फ आसान हो जाएगा बल्कि विपक्ष की एकजुटता पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा।