घर-जमीन ही नहीं, गहने और बैंक बैलेंस भी बताना होगा! सरकारी कर्मचारियों पर बड़ा नियम लागू

घर-जमीन ही नहीं, गहने और बैंक बैलेंस भी बताना होगा! सरकारी कर्मचारियों पर बड़ा नियम लागू

तमिलनाडु सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को 31 अक्टूबर तक अपनी चल-अचल संपत्ति और देनदारियों की पूरी जानकारी दर्ज कराने का सख्त निर्देश जारी किया गया है।

जनवरी माह में सेवा नियमों में किए गए संशोधनों के बाद अब सरकार ने इस औपचारिक प्रक्रिया और तय समयसीमा की विस्तृत रूपरेखा जारी कर दी है। इसके तहत कर्मियों को 31 दिसंबर 2025 तक अर्जित अपनी कुल वित्तीय स्थिति का ब्यौरा शासन के समक्ष रखना होगा।

कागजी प्रक्रिया बंद, IFHRMS पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड होगा डेटा

पारंपरिक व्यवस्था को बदलते हुए सरकार ने भौतिक रूप से फॉर्म भरने या कार्यालय में प्रिंटेड दस्तावेज जमा करने की बाध्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब सभी कर्मियों को तमिलनाडु सरकार के 'इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल एंड ह्यूमन रिसोर्सेज मैनेजमेंट सिस्टम' यानी आईएफएचआरएमएस (IFHRMS) पोर्टल पर जाकर डिजिटल माध्यम से ही अपनी घोषणा दर्ज करनी होगी। इस डिजिटल बदलाव का मुख्य उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को तीव्र, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है, जिससे सभी लोक सेवकों का एक केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार रह सके।

मकान, जमीन के साथ परिवार के नाम दर्ज गहने और बैंक बैलेंस भी बताना अनिवार्य

नियमों के अनुसार कर्मचारियों को अपनी सभी अचल संपत्तियों की जानकारी साझा करनी होगी, जिसमें निजी मकान, रिहायशी व व्यावसायिक प्लॉट, खेती की जमीन और अन्य भूखंड शामिल हैं। खास बात यह है कि कर्मचारी को न केवल अपने नाम पर दर्ज परिसंपत्तियों का ब्यौरा देना होगा, बल्कि परिवार के सदस्यों के नाम मौजूद संपत्तियों को भी स्पष्ट करना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त चल संपत्तियों के दायरे में सोने-चांदी के गहने, दोपहिया व चारपहिया वाहन, बैंक खातों में जमा राशि, शेयर और म्यूचुअल फंड जैसे वित्तीय निवेशों का पूरा विवरण शामिल रहेगा।

कर्ज, वित्तीय देनदारियां और आय विसंगतियों पर रहेगी सख्त नजर

घोषणा पत्र में सिर्फ संपत्तियों की जानकारी ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि कर्मचारियों को अपने ऊपर मौजूद सभी प्रकार के बैंक लोन, निजी कर्ज और अन्य वित्तीय देनदारियों का भी खुलासा करना होगा। सरकार का स्पष्ट मानना है कि इस कदम से लोक सेवकों की आय के ज्ञात स्रोतों और उनकी वास्तविक संपत्तियों के बीच संतुलन की आसानी से निगरानी की जा सकेगी। यदि किसी कर्मचारी की घोषित आय और संपत्ति में बड़ा अंतर पाया जाता है, तो उसकी पहचान तुरंत संभव होगी। शासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को तय समयसीमा यानी 31 अक्टूबर तक IFHRMS पोर्टल पर सटीक जानकारी भरने की हिदायत दी है।