टीम इंडिया की अफगानिस्तान से भिड़ंत आज, जानें अरुण जेटली की पिच का पूरा खेल
भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की बहुप्रतीक्षित T20I फ्रेंडशिप कप सीरीज का आगाज आज नई दिल्ली के ऐतिहासिक अरुण जेटली स्टेडियम में होने जा रहा है। रविवार, 13 सितंबर को शाम 7:00 बजे से शुरू होने वाले इस पहले मुकाबले में भारतीय टीम युवा कप्तान श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में अपनी जीत के सिलसिले को जारी रखने उतरेगी।
वहीं दूसरी तरफ, इब्राहिम जादरान की कप्तानी वाली अफगान टीम किसी भी बड़े उलटफेर को अंजाम देकर सीरीज में बढ़त हासिल करने की पूरी फिराक में होगी। राजधानी के क्रिकेट प्रेमियों के बीच इस भिड़ंत को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
आंकड़ों में टीम इंडिया का दबदबा बरकरार
अगर अंतरराष्ट्रीय टी20 मुकाबलों के इतिहास पर नजर डालें, तो अफगानिस्तान के खिलाफ भारतीय टीम का पलड़ा हमेशा से भारी रहा है। दोनों टीमों के बीच अब तक खेले गए कुल 9 टी20 मैचों में से भारत ने 8 मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज की है, जबकि एक मैच बेनतीजा रहा है। हालांकि अफगान टीम के हालिया जुझारू प्रदर्शन को देखते हुए मुकाबला एकतरफा होने की उम्मीद नहीं है। दिल्ली के मैदान पर दोनों टीमों के खेल से ज्यादा यहां की पिच और बदलता मौसम मुकाबले की दिशा तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे।
अरुण जेटली स्टेडियम की पिच: बल्लेबाजों के लिए स्वर्ग और रनों का अंबार
नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम की पहचान हमेशा से एक बेहतरीन बैटिंग ट्रैक और छोटी बाउंड्रीज वाले मैदान के तौर पर रही है। रविवार के इस मैच में भी दर्शकों को चौकों-छक्कों की जबरदस्त बरसात देखने को मिल सकती है। पिच पर बेहतर उछाल और सटीक रफ्तार होने के कारण गेंद सीधे बल्ले के बीच में आएगी, जिसका फायदा उठाकर बल्लेबाज पावरप्ले के पहले 6 ओवरों में जमकर रन बटोर सकते हैं। छोटी बाउंड्री होने के चलते गेंदबाजों के लिए लाइन-लेंथ पर नियंत्रण रखना टेढ़ी खीर साबित होगा। इस सपाट ट्रैक पर पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम के लिए 200 से अधिक का स्कोर ही सुरक्षित माना जाएगा।
शुरुआत में पेसर्स तो बीच के ओवरों में स्पिनर्स की परीक्षा
भले ही यह पिच पूरी तरह बल्लेबाजों की मददगार नजर आ रही हो, लेकिन चतुर गेंदबाजों के पास भी अपनी छाप छोड़ने के मौके रहेंगे। मैच की शुरुआत में तेज गेंदबाजों को नई गेंद से हल्का स्विंग और मूवमेंट मिल सकता है, जो बल्लेबाजों को चकमा देने के लिए काफी होगा। हालांकि यह मदद बहुत देर तक नहीं टिकेगी। जैसे ही गेंद पुरानी होगी, बीच के ओवरों में स्पिन गेंदबाजों की भूमिका सबसे अहम हो जाएगी। दोनों ही खेमों में आला दर्जे के स्पिनर्स मौजूद हैं, ऐसे में मिडिल ओवर्स में रनों पर लगाम लगाना और जरूरी विकेट झटकना ही मैच का टर्निंग पॉइंट बनेगा।
टॉस का बॉस तय करेगा मैच का रुख, ओस बनेगी बड़ा फैक्टर
दिल्ली में सितंबर की शाम ढलते ही मैदान पर ओस का असर दिखना बेहद स्वाभाविक है। मैच की दूसरी पारी में भारी ओस गिरने की पूरी आशंका जताई गई है, जिससे गीली गेंद पर ग्रिप बनाना गेंदबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाएगा। फ्लडलाइट्स के नीचे गीली आउटफील्ड पर लक्ष्य का पीछा करना कहीं अधिक आसान रहता है। यही कारण है कि टॉस जीतने वाला कप्तान बिना किसी हिचकिचाहट के पहले गेंदबाजी करने का फैसला करेगा, ताकि दूसरी पारी में ओस का फायदा उठाकर आसानी से जीत दर्ज की जा सके।