एक फोन कॉल और उजड़ गई पूरी दुनिया! जिस आंगन में गूंजनी थीं बच्चों की किलकारी, वहां उठेंगी एक साथ 5 अर्थियां
"तृप्ता… हम सुबह करीब आठ बजे तक घर पहुंच जाएंगे। ब्रेकफास्ट तैयार रखना, आज सब साथ बैठकर नाश्ता करेंगे।" - यह बचन सिंह के वे आखिरी शब्द थे, जो उन्होंने हादसे से महज 30 मिनट पहले अपनी पत्नी तृप्ता देवी से फोन पर कहे थे। उस समय किसे अंदाजा था कि फोन पर बोली गई यह आम सी बात हमेशा-हमेशा के लिए उनके जीवन का आखिरी संवाद बन जाएगी।
पति की आवाज सुनकर तृप्ता देवी ने राहत की सांस ली थी, क्योंकि उन्हें लगा कि मासूम बच्चे का इलाज सही से हो गया है और अब पूरा परिवार सुरक्षित घर लौट रहा है। उन्होंने सुबह के नाश्ते की तैयारी भी शुरू कर दी थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अपनों के कदमों की आहट से पहले ही घर के दरवाजे पर ऐसी खबर पहुंची, जिसने पूरे परिवार की दुनिया ही उजाड़ दी।
एक साथ उठेंगी 5 अर्थियां: पुलिस जवान बेटे और मासूम समेत पूरा परिवार खत्म
लाहड़ के पास देर रात हुए एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। इस दर्दनाक दुर्घटना में बचन सिंह, उनके पुलिस जवान पुत्र रिपन कुमार, पुत्रवधू रिम्पी, भतीजी कीर्ति और महज एक वर्ष के मासूम बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई। जिस परिवार के साथ बैठकर सुबह का नाश्ता करने के लिए तृप्ता देवी इंतजार कर रही थीं, अब उसी परिवार के 5 सदस्यों की अर्थियां एक साथ उनके आंगन से उठेंगी।
गेहरा गांव में छाया मातम, हर आंख हुई नम
मंगलवार सुबह तक तृप्ता देवी घर की चौखट पर टकटकी लगाए अपने परिवार का इंतजार करती रहीं, लेकिन अपनों की जगह सिर्फ उनके गुजर जाने की खबर पहुंची। फोन पर किया गया वह एक छोटा और साधारण सा वादा- "ब्रेकफास्ट साथ करेंगे", अब न सिर्फ तृप्ता देवी बल्कि पूरे गेहरा गांव के लिए आंखें नम कर देने वाली एक दर्दभरी याद बन चुका है। हादसे के बाद से गांव में शोक की लहर है और हर कोई यही कह रहा है कि इंसान चाहे कितनी भी योजनाएं बना ले, लेकिन कभी-कभी नियति उससे उसके सबसे खूबसूरत वादे और सपने छीन लेती है।