PM Modi Breakfast Politics: पीएम मोदी की 'ब्रेकफास्ट पॉलिटिक्स' से विपक्षी खेमे में खलबली, पवार गुट के 8 सांसदों की होगी मुलाकात
भारतीय राजनीति के गलियारों में इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रणनीतिक मुलाकातों और आत्मीय संवाद ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। संसद के मौजूदा सत्र के दौरान पीएम मोदी की 'ब्रेकफास्ट पॉलिटिक्स' और विभिन्न दलों के साथ बैठकों के सिलसिले ने विपक्षी दलों की नींद उड़ा दी है। इसी कड़ी में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी के शरद पवार गुट के सभी 8 लोकसभा सांसदों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की खबर सामने आते ही राजनीतिक हलकों में भूचाल आ गया है। आइए जानते हैं कि इस सियासी मुलाकात के मायने क्या हैं और क्यों विपक्षी पार्टियां इसे लेकर इतनी बेचैन नजर आ रही हैं।
शरद पवार गुट के 8 सांसदों की पीएम मोदी से खास मुलाकात
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) की प्रमुख नेता और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी के सभी 8 सांसद संसद परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर रहे हैं। सुप्रिया सुले के मुताबिक, संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित होने और सुचारू रूप से न चल पाने के कारण सांसद अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्यों और जनहित के मुद्दों को सदन में प्रभावी ढंग से नहीं उठा पा रहे हैं। इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री से मुलाकात का समय मांगा गया था। हालांकि इसे एक औपचारिक और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी बैठक बताया जा रहा है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में इसके सियासी मायने बहुत गहरे निकाले जा रहे हैं।
एनडीए की 'ब्रेकफास्ट पॉलिटिक्स' और बढ़ता राजनीतिक दायरा
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद सत्र के दौरान एनडीए और अन्य सहयोगी दलों के सांसदों के साथ अपने आवास पर महत्वपूर्ण बैठक और ब्रेकफास्ट का आयोजन किया था। इस आत्मीय संवाद के दौरान पीएम मोदी ने संसद के सुचारू संचालन पर जोर दिया और सभी सांसदों को एकजुट होकर देश तथा राज्यों के विकास के लिए काम करने का संदेश दिया। इस तरह की रणनीतिक मुलाकातों के जरिए सत्ता पक्ष लगातार अपनी सियासी पकड़ को और अधिक मजबूत करने में जुटा हुआ है, जिससे संसद के भीतर सरकार का पक्ष और अधिक मजबूत नजर आ रहा है।
विपक्षी दलों और INDIA गठबंधन में क्यों मची है बेचैनी?
विपक्षी दलों और विशेषकर INDIA गठबंधन के भीतर इस तरह की मुलाकातों को लेकर बड़ी सुगबुगाहट और बेचैनी देखने को मिल रही है, जिसके पीछे कई बड़े सियासी कारण हैं। संसद में आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील विधेयकों पर चर्चा होनी है, ऐसे में विपक्षी खेमे से जुड़े दलों का प्रधानमंत्री से सीधा संवाद करना विपक्ष की एकजुटता में सेंध लगने का बड़ा संकेत माना जा रहा है। विपक्षी दलों को इस बात का डर सता रहा है कि सत्ता पक्ष के इस संवाद कौशल से सदन के भीतर उनका संयुक्त विरोध कमजोर पड़ सकता है और राजनीतिक संदेश यह जाता है कि सरकार विपक्ष के प्रभाव वाले क्षेत्रों के विकास के लिए भी पूरी तरह गंभीर है।