पीएम मोदी चुप्पी तोड़ें वरना माना जाएगा चोरों को संरक्षण, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा हमला

पीएम मोदी चुप्पी तोड़ें वरना माना जाएगा चोरों को संरक्षण, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा हमला

अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के दान और चढ़ावे में सामने आए कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले को लेकर देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस बेहद संवेदनशील और आस्था से जुड़े मुद्दे पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लंबी चुप्पी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इस गंभीर मामले पर प्रधानमंत्री देश के सामने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ते हैं, तो यह मान लिया जाएगा कि सरकार इस बड़ी चोरी के असली गुनहगारों और चोरों को खुला संरक्षण दे रही है। इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम ने धार्मिक ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, वित्तीय पारदर्शिता और देश भर के करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को झकझोर कर रख दिया है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चार्जशीट में देरी और 'बड़ी मछलियों' को बचाने का गंभीर आरोप

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विशेष जांच दल यानी एसआईटी की जांच और मामले में चार्जशीट दाखिल होने में हो रही कथित देरी पर गहरी आपत्ति जताई है। पार्टी का आरोप है कि सुनियोजित तरीके से मंदिर के दान में की गई हेराफेरी के इस मामले में केवल छोटे स्तर के कर्मचारियों या किरदारों को मोहरा बनाया जा रहा है, जबकि इसके असली मास्टरमाइंड और 'बड़ी मछलियों' को बचाने की पूरी कोशिश चल रही है। कांग्रेस ने एक लोकप्रिय पुरानी फिल्म के गाने के बोल का तंज कसते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के नाम का राजनीतिक लाभ लेने वालों को अब जवाब देना चाहिए। पार्टी ने यह भी तर्क दिया कि शुरुआती रिपोर्टों और सीसीटीवी फुटेज में सबूत सामने आने के बावजूद जिम्मेदार शीर्ष अधिकारियों पर शिकंजा कसने से क्यों बचा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी और नैतिक जवाबदेही पर कांग्रेस का सीधा और तीखा प्रहार

कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा है कि करोड़ों देशवासियों की आस्था के केंद्र अयोध्या मंदिर में इस तरह की वित्तीय अनियमितता होना अत्यंत शर्मनाक है, लेकिन इस पर देश के मुखिया का एक भी शब्द न बोलना कई गंभीर शंकाओं को जन्म देता है। पार्टी ने मांग की है कि इस पूरे सिस्टम का उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और पारदर्शी फॉरेसिंक ऑडिट कराया जाना चाहिए ताकि सच्चाई देश की जनता के सामने आ सके। कांग्रेस का साफ तौर पर यह कहना है कि जो लोग खुद को भगवान राम के सबसे बड़े प्रबंधकों और संरक्षकों के रूप में पेश करते आए हैं, उन्हें इस वित्तीय घोटाले की पूरी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी लेनी ही होगी।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच और मौजूदा राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग

इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस ने यह पुरजोर मांग उठाई है कि स्थानीय या राज्य स्तर की जांच के बजाय इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट की सीधी देखरेख में होनी चाहिए ताकि न्याय मिल सके। इसके साथ ही पार्टी ने मौजूदा राम मंदिर ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से भंग करके उसमें प्रतिष्ठित धर्माचार्यों, प्रशासकों और निष्पक्ष बुद्धिजीवियों को शामिल करने की मांग की है। विपक्ष का मानना है कि जब तक इस संवेदनशील मामले में पूरी पारदर्शिता नहीं बरती जाती और दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिलती, तब तक देश के करोड़ों श्रद्धालुओं के मन में बैठा यह असमंजस और रोष शांत नहीं हो सकता।