उत्तर प्रदेश में मौसम ने फिर बदली करवट, इन जिलों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट
उत्तर प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर विकराल रूप अख्तियार कर लिया है, जिसके चलते समूचे सूबे में बीते 24 घंटों के दौरान मूसलाधार बारिश का दौर देखने को मिला। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्से में बने एक गहरे निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area) के सक्रिय होने से प्रदेश के ज्यादातर जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई है।
अचानक बदले इस मौसमी मिजाज ने जहां तापमान में गिरावट लाकर लोगों को उमस से राहत दी है, वहीं निचले इलाकों में जलभराव और कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी मुसीबत भी खड़ी कर दी है।
पूर्वी यूपी में आफत की बारिश: फर्रुखाबाद में 32 सेमी तो गोरखपुर में 23 सेमी दर्ज
पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में बादलों ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई। आंकड़ों के मुताबिक, फर्रुखाबाद में रिकॉर्ड करीब 32 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
वहीं गोरखपुर में 23 सेंटीमीटर, जबकि लखीमपुर खीरी और महराजगंज जिलों में करीब 19-19 सेंटीमीटर झमाझम बारिश रिकॉर्ड हुई। इसके अलावा राजधानी लखनऊ, अयोध्या, कानपुर के नजदीकी कन्नौज, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बहराइच और आजमगढ़ में भी लगातार हुई तेज बारिश के चलते सड़कों से लेकर गलियों तक पानी भर गया।
पश्चिमी यूपी भी तरबतर: मुरादाबाद और बरेली में भारी जलभराव
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अंचल में भी तेज मानसूनी फुहारों और गरज-चमक के साथ बारिश का जोरदार सिलसिला बना रहा। मुरादाबाद में करीब 18 सेंटीमीटर और बरेली में 17 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई। वहीं कासगंज और रामपुर में 15-15 सेंटीमीटर, जबकि संभल व बिजनौर में लगभग 14-14 सेंटीमीटर बारिश हुई। इसके साथ ही मैनपुरी, शाहजहांपुर और आसपास के देहाती इलाकों में भी लगातार पानी बरसने से खेतों और बस्तियों में जलभराव की गंभीर स्थिति पैदा हो गई।
इन जिलों में फिर तेज बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने अपने ताजा बुलेटिन में चेतावनी दी है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में फिलहाल बादलों का डेरा रहेगा और भारी बारिश का खतरा टला नहीं है। वाराणसी, बलिया, गोरखपुर, मीरजापुर और सोनभद्र सहित आसपास के तराई व विंध्य क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश जारी रहने की संभावना जताई गई है। पश्चिमी यूपी के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में भी हल्की से मध्यम बौछारें पड़ सकती हैं। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे-जैसे निम्न दबाव की यह प्रणाली कमजोर होगी, वैसे-वैसे बारिश की तीव्रता और फैलाव में धीरे-धीरे कमी दर्ज की जाएगी।