PM मोदी का इंडोनेशिया दौरा: क्या निकेल का यह 'पावरहाउस' भारत में लाएगा EV क्रांति की बुलेट स्पीड?
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंडस्ट्री का भविष्य बदलने के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया जा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के पहले चरण में इंडोनेशिया पहुंच रहे हैं। जकार्ता में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ होने वाली यह द्विपक्षीय वार्ता न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगी, बल्कि भारत के घरेलू ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाली है।
क्यों खास है इंडोनेशिया और निकेल का यह कनेक्शन
इंडोनेशिया को दुनिया में निकेल का सबसे बड़ा उत्पादक (पावरहाउस) माना जाता है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों की लिथियम-आयन बैटरी बनाने के लिए सबसे जरूरी खनिज है। भारतीय ईवी निर्माता कंपनियां लंबे समय से कच्चे माल और मजबूत सप्लाई चेन के लिए सुरक्षित विदेशी साझेदारी की तलाश में थीं। पीएम मोदी की इस यात्रा का मुख्य एजेंडा क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) और ईवी बैटरी इकोसिस्टम में सहयोग बढ़ाना है, जिससे भारत में बैटरी निर्माण की लागत में भारी कमी आ सकती है।
भारतीय बाजार और आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी नई रफ्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि इस साझेदारी से भारत को चीन पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इंडोनेशिया के पास मौजूद विशाल खनिज भंडार और भारत की बेहतरीन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मिलकर क्लीन एनर्जी और ग्रीन ट्रांजिशन (हरित परिवर्तन) के लक्ष्य को समय से पहले पूरा कर सकते हैं। यह कदम भारत की 'Act East' पॉलिसी को मजबूत करने के साथ-साथ देश के लोकल ईवी स्टार्टअप्स और बड़े ऑटो ब्रांड्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।