EC मुख्यालय की ओर बढ़े INDIA गठबंधन के सांसदों को पुलिस ने रोका, धरने के बाद कई नेता हिरासत में
भारतीय राजनीति के गलियारों से इस वक्त लोकतंत्र को झकझोर देने वाली एक बेहद सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आ रही है। निर्वाचन आयोग (Election Commission) की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए जब ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के तमाम दिग्गज सांसद और नेता दिल्ली में चुनाव आयोग के मुख्यालय की तरफ मार्च कर रहे थे, तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक लिया। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के दौरान पुलिस और नेताओं के बीच तीखी झड़प देखने को मिली, जिसके बाद भारी विरोध प्रदर्शन और धरने के बीच कई प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया गया है। इस विरोध प्रदर्शन की कमान संभाल रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई सांसद आकाशवाणी परिसर के बाहर सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। इस पूरी घटना के बाद से देश की राजधानी का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। आइए जानते हैं कि इस सनसनीखेज विरोध प्रदर्शन और हिरासत की इस पूरी कार्रवाई के पीछे की अंदरूनी कहानी क्या है।
INDIA Bloc March to EC: निर्वाचन आयोग के मुख्यालय तक क्यों मार्च निकाल रहे थे विपक्षी सांसद, क्या थी उनकी मुख्य मांगें
पूरा मामला देश की चुनावी व्यवस्था, मतदाता सूचियों में पारदर्शिता और हालिया राजनीतिक मुद्दों से जुड़ा हुआ है। विपक्षी दलों के संयुक्त गठबंधन 'इंडिया' के बैनर तले देश भर से चुनकर आए सैकड़ों सांसद और नेता निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से मिलकर अपनी लिखित शिकायतें दर्ज कराना चाहते थे। विपक्ष का आरोप है कि संवैधानिक संस्थाएं अपनी स्वायत्तता खोती जा रही हैं और विपक्षी दलों को अपनी बात रखने का उचित मंच नहीं मिल रहा है। इसी नाराजगी के चलते सभी सांसदों ने संसद भवन से लेकर चुनाव आयोग के दफ्तर तक एक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का फैसला किया था। लेकिन जैसे ही यह मार्च तयशुदा रूट से आगे बढ़ने लगा, दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने भारी बैरिकेडिंग लगाकर रास्तों को पूरी तरह सील कर दिया, जिससे विपक्षी नेताओं का गुस्सा फूट पड़ा और वे सड़क पर ही सरकार व आयोग के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
Heavy Police Barricading and Detentions: भारी पुलिस बल ने रोका सांसदों का काफिला, धरने पर बैठे नेताओं को पुलिस ने लिया हिरासत में
स्थिति की नजाकत को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने निर्वाचन आयोग के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर रखे थे और धारा 144 जैसे प्रतिबंधों का हवाला देते हुए सांसदों को आगे बढ़ने से साफ मना कर दिया। जब विपक्षी नेताओं ने पुलिस के इस अवरोध को पार करने की कोशिश की, तो पुलिसकर्मियों के साथ उनकी तीखी धक्का-मुक्की और बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया। नियमों के उल्लंघन और शांति भंग करने का आरोप लगाते हुए पुलिस ने कई बड़े विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया और उन्हें बसों में भरकर नजदीकी पुलिस थानों में ले जाया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी तनातनी देखने को मिली, जिससे राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हो गई और दूर-दूर तक गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं।
Rahul and Priyanka Gandhi Sit-in Protest: आकाशवाणी भवन के बाहर जमीन पर बैठे राहुल और प्रियंका गांधी, सरकार पर बोला तीखा हमला
इस पूरी अफरा-तफरी के बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने साथी सांसदों के साथ आकाशवाणी भवन के बाहर ही जमीन पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। उनके साथ अन्य दलों के कई प्रमुख नेता भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल रहे। सड़क पर धरने पर बैठे राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत करते हुए सरकार और प्रशासन पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों को उनकी ही राजधानी में शांतिपूर्ण मार्च निकालने से रोका जा रहा है, जो अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने दो टूक कहा कि वे डरने वाले नहीं हैं और लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनकी यह लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक जारी रहेगी। प्रियंका गांधी ने भी इस तानाशाही रवैये की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाने की हर कोशिश का डटकर मुकाबला किया जाएगा।
National Political Repercussions: इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद गरमाई राष्ट्रीय राजनीति, आने वाले दिनों में और तीखा होगा विपक्ष का तेवर
निर्वाचन आयोग के बाहर हुए इस महासंग्राम और विपक्षी सांसदों की गिरफ्तारी के बाद देश की राष्ट्रीय राजनीति का पारा पूरी तरह चढ़ चुका है। क्षेत्रीय दलों से लेकर राष्ट्रीय स्तर के सभी विपक्षी नेताओं ने इस घटना को लोकतंत्र की हत्या करार दिया है और सरकार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ने के संकेत दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह का टकराव सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की दूरियों को और अधिक बढ़ा देगा। आने वाले संसद सत्र और चुनावी मंचों पर यह मुद्दा सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार बनने जा रहा है, जिससे यह साफ हो गया है कि आने वाले दिन देश की सियासत के लिहाज से बेहद उथल-पुथल भरे रहने वाले हैं।