पंजाब में राहुल गांधी फूंकेंगे चुनावी बिगुल, उधर BJP करेगी 'जख्म 84 के' सम्मेलन; सिख दंगों पर कांग्रेस को घेरेगी पार्टी

पंजाब में राहुल गांधी फूंकेंगे चुनावी बिगुल, उधर BJP करेगी 'जख्म 84 के' सम्मेलन; सिख दंगों पर कांग्रेस को घेरेगी पार्टी

पंजाब की सियासत में एक बार फिर गर्माहट आ गई है, जहाँ विधानसभा चुनावों और लोकसभा की तैयारियों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियाँ अपने चरम पर पहुँच चुकी हैं। राज्य में अपनी खोई हुई ज़मीन तलाश रही कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी पंजाब का दौरा कर चुनावी बिगुल फूंकने जा रहे हैं। राहुल गांधी की इस विशाल रैली और जनसभा के जरिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की तैयारी की जा रही है। लेकिन, दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राहुल गांधी के इस दौरे का मुकाबला करने के लिए एक बेहद आक्रामक और तीखी रणनीति तैयार कर ली है। बीजेपी ने उसी दिन 'जख्म 84 के' नाम से एक बड़े सम्मेलन का आयोजन करने का ऐलान कर दिया है। इस सम्मेलन के माध्यम से बीजेपी 1984 के सिख विरोधी दंगों के दर्दनाक जख्मों को कुरेदते हुए सीधे तौर पर कांग्रेस और राहुल गांधी को कटघरे में खड़ा करने जा रही है।

राहुल गांधी के दौरे से पंजाब कांग्रेस में फूंकने की कोशिश नवजीवन

पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार बनने के बाद से ही कांग्रेस राज्य में विपक्ष की भूमिका में अपने आधार को मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रही है। राहुल गांधी का यह आगामी दौरा राज्य के राजनीतिक समीकरणों को बदलने और सिख बहुल इलाके में पार्टी की पकड़ को दोबारा मजबूत करने के उद्देश्य से तय किया गया है। राहुल गांधी अपनी रैली के दौरान किसानों के मुद्दों, बेरोजगारी, राज्य की कानून व्यवस्था और केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व का मानना है कि राहुल गांधी के इस दौरे से पार्टी कैडर में नई ऊर्जा का संचार होगा और आगामी स्थानीय व आम चुनावों में पार्टी को मजबूत बढ़त मिलेगी। लेकिन इस रैली के समानांतर बीजेपी की काउंटर-रणनीति ने कांग्रेस की चिंताओं को बढ़ा दिया है।

'जख्म 84 के' सम्मेलन के जरिए बीजेपी का कांग्रेस पर करारा हमला

कांग्रेस के चुनावी बिगुल का जवाब देने के लिए बीजेपी पंजाब इकाई ने एक विस्तृत प्लान तैयार किया है। पार्टी द्वारा आयोजित किए जा रहे 'जख्म 84 के' सम्मेलन में 1984 के सिख दंगों के पीड़ितों, उनके परिवारों और सिख समुदाय के प्रबुद्ध जनों को एकजुट किया जाएगा। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा 84 के दंगों के दोषियों को बचाने और पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। सम्मेलन के मंच से बीजेपी 1984 के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा गठित एसआईटी (SIT) की उपलब्धियों, दोषियों को सजा दिलाने के प्रयासों और करतारपुर साहिब कॉरिडोर जैसे कदमों का ब्योरा जनता के सामने रखेगी।

सिख बहुल राजनीति और 1984 के जख्मों की राजनीतिक बिसात

पंजाब की राजनीति में 1984 के सिख विरोधी दंगे हमेशा से एक बेहद संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दा रहे हैं। जब भी कांग्रेस पार्टी पंजाब में अपनी पकड़ बनाने का प्रयास करती है, विपक्षी दल 1984 के घटनाक्रम को लेकर उस पर हमलावर हो जाते हैं। बीजेपी इस बार इस मुद्दे को और अधिक प्रखरता से उठाकर कांग्रेस के सिख मतदाता वर्ग में सेंध लगाने की पूरी कोशिश कर रही है। 'जख्म 84 के' सम्मेलन के जरिए बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि कांग्रेस के शासनकाल में सिखों के साथ हुए अन्याय का हिसाब अभी पूरा नहीं हुआ है। बीजेपी के इस मास्टरस्ट्रोक से राहुल गांधी के दौरे का मुख्य राजनीतिक एजेंडा काफी हद तक प्रभावित हो सकता है।

पंजाब में बहुकोणीय मुकाबला और बदलती राजनीतिक फिजा

शिरोमणि अकाली दल (SAD) से नाता टूटने के बाद बीजेपी पंजाब में अकेले अपने दम पर पैर पसारने की पुरजोर कोशिश कर रही है। राज्य में आम आदमी पार्टी की मौजूदा सरकार, कांग्रेस की वापसी की छटपटाहट, अकाली दल का पारंपरिक जनाधार और बीजेपी का बढ़ता आक्रामक रुख—इन सबने पंजाब के राजनीतिक परिदृश्य को बहुकोणीय और बेहद दिलचस्प बना दिया है। राहुल गांधी के दौरे और बीजेपी के 'जख्म 84 के' सम्मेलन के आमने-सामने आने से राज्य में राजनीतिक बयानबाजी और नूराकुश्ती का दौर और तेज़ होना तय है। दोनों ही प्रमुख दल सिख समुदाय और पंजाब की जनता का विश्वास जीतने के लिए अपने-अपने राजनीतिक हथियारों का पूरा इस्तेमाल कर रहे हैं।

जनता की नजरें राहुल के जवाब और बीजेपी के घेराव पर

पंजाब की जनता और राजनीतिक विश्लेषक अब इस बात पर नजरें गड़ाए बैठे हैं कि राहुल गांधी अपनी रैली में बीजेपी के इस तीखे हमले का जवाब किस तरह देते हैं। क्या कांग्रेस 1984 के मुद्दे पर अपनी सफाई पेश करेगी या फिर राज्य के मौजूदा जल-जंगल-जमीन और किसानों के ज्वलंत मुद्दों पर ही केंद्रित रहेगी? दूसरी ओर, देखना यह भी होगा कि बीजेपी का 'जख्म 84 के' सम्मेलन पंजाब के आम मतदाताओं के दिलों को छूने में कितना कामयाब होता है। दोनों पार्टियों की यह राजनीतिक बिसात यह तय करेगी कि आने वाले दिनों में पंजाब की चुनावी हवा का रुख किस तरफ मुड़ता है।