संसद में जनता के पैसों की बर्बादी पर बवाल: प्रश्नकाल ठप होने पर भड़की बीजेपी, राहुल गांधी और विपक्ष पर साधा तीखा निशाना
भारतीय संसद के मानसून सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही लगातार बाधित होने को लेकर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। संसद की कार्यवाही बार-बार ठप होने और विशेष रूप से 'प्रश्नकाल' (Question Hour) न चल पाने के कारण जनता के करोड़ों रुपये पानी में बहने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखा रोष व्यक्त किया है। बीजेपी ने इस व्यवधान के लिए सीधे तौर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और 'इंडिया' (INDIA) अलायंस के अन्य घटक दलों को जिम्मेदार ठहराते हुए कड़ा प्रहार किया है। सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए देश के महत्वपूर्ण समय और संसाधनों की बर्बादी कर रहा है।
प्रश्नकाल ठप होने से जनता के मुद्दों पर लगा विराम
संसदीय लोकतंत्र में प्रश्नकाल को जनता से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के सामने उठाने का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है। लेकिन विपक्षी दलों के लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ रही है, जिससे इस महत्वपूर्ण सत्र का कामकाज पूरी तरह पटरी से उतर गया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि विपक्ष के पास सदन में बहस करने के लिए कोई ठोस तर्क या मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे जानबूझकर व्यवधान पैदा कर रहे हैं। इस वजह से देश के विकास और जनहित से जुड़ी कई अहम नीतियों और सवालों पर चर्चा नहीं हो पा रही है।
राहुल गांधी और विपक्ष पर आक्रामक हुई बीजेपी
संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए सत्ता पक्ष के प्रवक्ताओं और सांसदों ने राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन को आड़े हाथों लिया। बीजेपी ने कहा कि लोकतंत्र के मंदिर को इस तरह अखाड़ा बनाना और हर दिन करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन को हंगामे की भेंट चढ़ाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना है। पार्टी का आरोप है कि विपक्ष संसद को सुचारू रूप से चलाने में कोई रुचि नहीं रखता और केवल व्यवधान की राजनीति कर रहा है, जिससे जनता के विश्वास को ठेस पहुंच रही है।
सुचारू कामकाज की मांग और भविष्य की राजनीतिक सरगर्मी
संसद में गतिरोध बने रहने के कारण नीतिगत फैसले और कई महत्वपूर्ण विधेयक भी अधर में लटके हुए हैं। सत्ता पक्ष ने एक बार फिर विपक्ष से अपील की है कि वे सदन की गरिमा का ख्याल रखें और जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा में हिस्सा लें। हालांकि, जिस प्रकार से दोनों पक्षों के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर सियासी हंगामा और अधिक तेज होने वाला है।