मिडिल ईस्ट के आसमान में बदलते युद्ध के समीकरण और ड्रोन तकनीक
वर्तमान समय में दुनिया के जिस कोने में भी सैन्य संघर्ष चल रहा है, वहाँ युद्ध लड़ने के तौर-तरीकों में एक क्रांतिकारी और हैरान करने वाला बदलाव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक टैंकों, फाइटर जेट्स और तोपखाने की जगह अब आधुनिक युद्ध के मैदान पर 'ड्रोन' (Drones) ने कब्जा कर लिया है। विशेष रूप से मध्य पूर्व (Middle East) के सुलगते हुए रणक्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जिस तरह से लंबी दूरी के सुसाइड ड्रोन और कामिकेज़ ड्रोन्स का इस्तेमाल बढ़ा है, उसने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों और सैन्य रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है। इन सभी ड्रोनों में सबसे ज्यादा चर्चा जिस एक नाम की होती है, वह है ईरान द्वारा विकसित 'शाहेद' (Shahed) ड्रोन। कम लागत में तैयार होने वाले ये ड्रोन दुश्मन के ठिकानों पर भारी तबाही मचाने और महंगे रडार तथा मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में माहिर माने जाते हैं। यही वजह है कि मिडिल ईस्ट के युद्ध में इन शाहेद ड्रोनों का लगातार इस्तेमाल होने के कारण सुरक्षा बलों के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी कि इनसे कैसे निपटा जाए।
शाहेद ड्रोन का आतंक और पारंपरिक रक्षा प्रणालियों की सीमाएं
शाहेद जैसे लोइटरिंग म्यूनिशन (Loiter Munition) या कामिकेज़ ड्रोनों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि वे बहुत कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं और पारंपरिक एयर डिफेंस रडार की नजरों से आसानी से बच निकलते हैं। इसके अलावा, इन्हें मार गिराने के लिए जिस पैट्रियट या अन्य आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, उनकी एक मिसाइल की कीमत कई मिलियन डॉलर होती है, जबकि एक शाहेद ड्रोन की लागत बेहद कम होती है। इस तरह, यदि लाखों रुपए के ड्रोन को गिराने के लिए करोड़ों रुपए की मिसाइल खर्च की जाए, तो यह रक्षा बजट के लिहाज से भी एक बहुत बड़ा आर्थिक घाटा साबित होता है। इसी बड़ी समस्या ने दुनिया भर की सेनाओं को इस बात के लिए मजबूर कर दिया था कि वे कोई ऐसा किफायती, तेज और अचूक तरीका ढूंढें जो इन कम लागत वाले ड्रोनों को आसमान में ही धूल चटा सके। आखिरकार, रक्षा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इस चुनौती से निपटने के लिए एक नया और क्रांतिकारी रास्ता खोज निकाला है।
आसमान में दुश्मनों से निपटने के लिए निकाला गया यह नया और आधुनिक तरीका
हाल ही में मिडिल ईस्ट के संघर्ष क्षेत्रों से जो रिपोर्ट्स सामने आई हैं, वे यह बताती हैं कि अब शाहेद ड्रोनों से निपटने के लिए अत्याधुनिक लेजर हथियारों, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम्स, और कम लागत वाले इंटरसेप्टर ड्रोनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू हो चुका है। इस नए तरीके के तहत, आसमान में उड़ रहे शाहेद ड्रोन को किसी महंगी मिसाइल से निशाना बनाने के बजाय, या तो इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल्स के जरिए उसके नेविगेशन सिस्टम को जाम कर दिया जाता है ताकि वह अपने रास्ते से भटककर बेकार हो जाए, या फिर छोटे और सस्ते काउंटर-ड्रोन सिस्टम्स का उपयोग करके हवा में ही उसे हवा के हवाले कर दिया जाता है। इसके अलावा, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस ऑटोमैटिक गन सिस्टम्स और डायरेक्टेड-एनर्जी वेपन्स (Directed-Energy Weapons) का परीक्षण भी इस मोर्चे पर बेहद सफल साबित हो रहा है। यह नया तरीका न केवल आर्थिक रूप से बहुत सस्ता पड़ता है, बल्कि इसकी मारक क्षमता इतनी सटीक है कि दुश्मन को संभलने का मौका भी नहीं मिलता।
वैश्विक रक्षा नीति पर इस नए तकनीकी विकास का दूरगामी प्रभाव
मिडिल ईस्ट में शाहेद ड्रोन के खिलाफ अपनाए गए इस नए और प्रभावी तरीके ने दुनिया के अन्य देशों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भविष्य का युद्ध केवल हथियारों की संख्या से नहीं, बल्कि तकनीकी बुद्धिमत्ता और कॉस्ट-इफेक्टिव डिफेंस सिस्टम से जीता जाएगा। भारत सहित दुनिया के तमाम बड़े देश अपनी सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक चाक-चौबंद बनाने के लिए एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी (Anti-Drone Technology) पर भारी निवेश कर रहे हैं। जिस प्रकार से युद्ध के मैदान में ड्रोन तकनीक का दायरा दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, उसी तेजी से उसका तोड़ निकालने की यह तकनीक भी आधुनिक रक्षा विज्ञान का एक अनिवार्य हिस्सा बनती जा रही है। आने वाले समय में यह साफ है कि आसमान की सुरक्षा के लिए पारंपरिक हथियारों के दिन अब लद चुके हैं और भविष्य पूरी तरह से इस तरह के स्मार्ट और किफायती डिफेंस सॉल्यूशंस के हाथ में ही रहने वाला है।