जमीन पर कब्जे का डर या रेलवे का मेगा प्रोजेक्ट, पंजाब के किसानों ने गुरुद्वारे में घेरी सर्वे टीम

जमीन पर कब्जे का डर या रेलवे का मेगा प्रोजेक्ट, पंजाब के किसानों ने गुरुद्वारे में घेरी सर्वे टीम

पंजाब के मालवा अंचल के कई ग्रामीण इलाकों में इन दिनों आसमान में उड़ते ड्रोन किसानों और स्थानीय निवासियों के लिए गहरी चिंता और तनाव की वजह बन गए हैं। पिछले करीब एक महीने से अलग-अलग निजी कंपनियों की टीमें मालवा के गांवों में लगातार जमीन का सर्वे कर रही हैं।

ग्रामीणों के मन में यह आशंका गहराती जा रही है कि इस गुप्त मैपिंग के जरिए उनकी कृषि भूमि की निशानदेही की जा रही है, ताकि आगे चलकर लैंड पूलिंग या सरकारी अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जा सके। इसी अविश्वास और डर के माहौल के बीच कई गांवों में सर्वे दलों का कड़ा विरोध देखने को मिल रहा है।

गोनियाना खुर्द में 13 सदस्यीय दल से गुरुद्वारे में पूछताछ

ताजा घटनाक्रम बठिंडा जिले के गोनियाना खुर्द गांव का है, जहां दो दिन पहले ग्रामीणों ने ड्रोन से जमीन की मैपिंग कर रहे 13 कर्मचारियों के एक दल को मौके पर ही रोक लिया। जांच में सामने आया कि ये सभी कर्मचारी महाराष्ट्र की एक निजी कंपनी से संबंधित हैं। ग्रामीणों द्वारा रोके जाने पर टीम के सदस्यों ने कहा कि वे जमीन का डिजिटल नक्शा तैयार करने के उद्देश्य से सर्वे कर रहे हैं।

हालांकि, असंतुष्ट ग्रामीणों ने पूरी टीम को गांव के गुरुद्वारे में ले जाकर विस्तार से पूछताछ की। मामले की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी फौरन मौके पर पहुंचे। रेलवे अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि बठिंडा से भूचो के बीच नई रेल लाइन बिछाने के लिए जमीन का तकनीकी सर्वे कराने का जिम्मा निजी कंपनी को सौंपा गया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा निष्पक्षता का भरोसा दिलाए जाने के बाद ही ग्रामीणों ने सर्वे दल को वहां से जाने दिया, लेकिन इलाके में तनाव और आशंका का माहौल अब भी बरकरार है।

प्रशासन का बयान: रेलवे के पास अनुमति, GIS मास्टर प्लान और डिजिटल फसल सर्वे जारी

मामले पर बठिंडा के डिप्टी कमिश्नर राजेश धीमान ने स्थिति स्पष्ट करते हुए ग्रामीणों के सभी संशयों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि प्रशासन के पास फिलहाल जमीन के किसी भी प्रकार के नए जोनिंग की कोई ठोस योजना नहीं है और रेलवे विभाग के पास यह प्रारंभिक सर्वे कराने की विधिवत मंजूरी मौजूद है।

वहीं, राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मालवा क्षेत्र के कई गांवों में आबादी देह जमीन के सटीक सीमांकन के लिए ड्रोन मैपिंग कराई जा रही है, जबकि कुछ क्षेत्रों में डिजिटल फसल सर्वे का काम चल रहा है। इससे पहले मौर तहसील के घासो खाना गांव में भी ग्रामीणों ने खेतों में रंग के निशान देखकर सर्वे कर्मचारियों को घेर लिया था, क्योंकि उन्हें डर था कि यह जमीन अधिग्रहण की पूर्व तैयारी है। उस समय भी स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि यह कवायद जीआईएस (GIS) आधारित मास्टर प्लान तैयार करने का हिस्सा है।