तुषार मेहता की बात तुरंत मान गए सिब्बल, फिर धीरे से रख दी ऐसी डिमांड, SC में मचा घमासान
देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के कॉरीडोर से इस वक्त कानूनी जगत की सबसे बड़ी और दिलचस्प खबर सामने आ रही है। सुप्रीम कोर्ट में एक हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई के दौरान देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और देश के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के बीच अदालती कार्यवाही के बीच एक ऐसा रोचक संवाद देखने को मिला जिसने वहां मौजूद सभी वकीलों और जजों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कोर्ट रूम में तीखी जिरह और बहसों के बीच जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एक प्रस्ताव रखा, तो वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बिना एक पल गंवाए उनकी बात तुरंत मान ली। लेकिन इसके तुरंत बाद सिब्बल ने अपनी तरफ से एक ऐसी अनोखी और तीखी डिमांड रख दी, जिसे सुनते ही सुप्रीम कोर्ट के courtroom में ठहाके भी गूंज उठे और साथ ही वकीलों के बीच कानूनी घमासान भी मच गया। अदालत की गरिमा और तीखी बहसों के बीच घटी इस नाटकीय घटना की चर्चा अब पूरे देश के कानूनी गलियारों में गर्माई हुई है।
सुप्रीम कोर्ट की खटपट और सॉलिसिटर जनरल का वह प्रस्ताव
यह पूरा वाकया उस समय घटा जब सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ या महत्वपूर्ण बेंच के समक्ष देश के दो सबसे दिग्गज कानूनी चेहरे आमने-सामने खड़े होकर बहस कर रहे थे। एक तरफ सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता थे और दूसरी तरफ विपक्ष या याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल थे। मामले की जटिलता और दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों के कारण अदालत का माहौल काफी तनावपूर्ण और गंभीर बना हुआ था। सुनवाई के दौरान जब बात दस्तावेजों के ढेर, लंबी तारीखों और गवाहों के बयानों पर उलझने लगी, तो तुषार मेहता ने मामले को जल्द निपटाने और कोर्ट का समय बचाने के लिए बड़े ही सहज अंदाज में एक व्यावहारिक प्रस्ताव रख दिया। उन्होंने कहा कि इस तकनीकी विवाद को लंबा खींचने के बजाय दोनों पक्षों को आपसी सहमति से कुछ चुनिंदा दस्तावेजों पर ही ध्यान देना चाहिए।
कपिल सिब्बल का तत्काल हामी भरना और चौंकाने वाला टर्न
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा रखी गई इस बात पर अमूमन यह उम्मीद की जा रही थी कि तीखी बहस के माहौल में इस पर लंबी कानूनी आपत्तियां दर्ज कराई जाएंगी। लेकिन इसके विपरीत, कपिल सिब्बल ने कूटनीतिक और अदालती अनुभव का परिचय देते हुए बिना किसी हिचकिचाहट के तुषार मेहता के प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार कर लिया। सिब्बल ने कहा कि यदि सरकार इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सहयोग करने को तैयार है, तो उन्हें इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं है। सिब्बल के इस तरह झटपट हामी भरने से खुद सॉलिसिटर जनरल और बेंच के जज भी एक पल के लिए हैरान रह गए कि आखिर इतनी आसानी से वरिष्ठ वकील कैसे राजी हो गए। लेकिन असली खेल इसके बाद शुरू हुआ जब सिब्बल ने अपनी शर्तें रखनी शुरू कीं।
'फिर धीरे से रख दी ऐसी डिमांड': कोर्ट रूम में मचा असली घमासान
जैसे ही कपिल सिब्बल ने तुषार मेहता की बात मानी, उन्होंने अपनी चतुराई का परिचय देते हुए अदालत के सामने एक बेहद तीखी और चालाक डिमांड रख दी। सिब्बल ने कहा कि अगर सरकार इस बात पर सहमत है, तो अदालत को यह भी निर्देश देना चाहिए कि बाकी के लंबित दस्तावेजों और फाइलियों को तुरंत सार्वजनिक किया जाए और सरकार इस मामले में किसी भी प्रकार का कोई अतिरिक्त स्थगन (Adjournment) नहीं मांगेगी। सिब्बल की इस अप्रत्याशित और चतुराई भरी डिमांड को सुनते ही कोर्ट रूम में बैठे वकीलों के कान खड़े हो गए। तुषार मेहता ने तुरंत इसका विरोध करते हुए कहा कि विपक्षी वकील इस साधारण प्रस्ताव को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं और अनावश्यक शर्तें लाद रहे हैं। बस फिर क्या था, दोनों दिग्गजों के बीच अदालत में ही तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई और एक बार फिर कानूनी घमासान मच गया।
जजों की मध्यस्थता और मामले का दिलचस्प मोड़
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने दोनों सीनियर वकीलों के बीच चल रही इस नोकझोंक और खींचतान को बहुत ही खेलकूद और गंभीर अंदाज में देखा। अदालत जानती थी कि देश के ये दोनों सबसे बड़े वकील अपने-अपने मुवक्किलों के हितों की रक्षा के लिए किस हद तक जा सकते हैं। पीठ ने दोनों पक्षों को शांत कराते हुए स्पष्ट किया कि अदालत किसी भी पक्ष की एकतरफा शर्तों पर फैसला नहीं करेगी, बल्कि कानून और संविधान के दायरे में रहकर ही सुनवाई की अगली रूपरेखा तय की जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति से अपने लिखित दस्तावेज और संक्षिप्त नोट जमा करने के लिए कुछ दिनों का समय दे दिया। हालांकि, सुनवाई खत्म होने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट के गलियारों में इसी बात की चर्चा होती रही कि कैसे एक छोटे से प्रस्ताव ने अदालत में बड़ा सियासी और कानूनी बवंडर खड़ा कर दिया।
देश भर में क्यों बनी हुई है इस अदालती ड्रामे की चर्चा?
सुप्रीम कोर्ट में होने वाली हर बड़ी सुनवाई पर मीडिया, राजनीतिक दलों और देश के आम नागरिकों की पैनी नजर रहती है। तुषार मेहता और कपिल सिब्बल जैसे दिग्गज जब भी किसी मामले में आमने-सामने होते हैं, तो वहां केवल कानून की ही नहीं बल्कि उत्कृष्ट वकालत और कूटनीति की भी क्लास देखने को मिलती है। इस बार की यह घटना साबित करती है कि कैसे देश के शीर्ष वकील अदालत के भारी-भरकम माहौल को भी अपनी हाजिरजवाबी और रणनीतिक चालों से रोचक बना देते हैं। आने वाले दिनों में इस मामले की अगली सुनवाई पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहेंगी, क्योंकि इस कानूनी घमासान के परिणाम देश की न्याय व्यवस्था और भविष्य के कई बड़े फैसलों पर गहरा प्रभाव डालने वाले हैं।