रिहाई के साथ मिला कड़ा अल्टीमेटम: क्या दोबारा दिल्ली का रुख करते ही नपेगा यूट्यूबर?
यूट्यूबर ध्रुव राठी को शनिवार देर रात पुलिस हिरासत से रिहा कर दिया गया, हालांकि अधिकारियों ने उन्हें सख्त हिदायत दी है कि वे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा न लें और दिल्ली के जंतर-मंतर का रुख न करें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि वे दोबारा इस आंदोलन की ओर बढ़ते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जर्मनी में रहने वाले राठी मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। यह विरोध प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर बुलाया गया था।
पुलिस ने राठी को हरियाणा के गुरुग्राम स्थित सेक्टर 56 आवास से हिरासत में लिया था। जहां अन्य प्रदर्शनकारियों को शनिवार रात ही छोड़ दिया गया था, वहीं राठी को देर रात तक हिरासत में रखा गया। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका को भी राजधानी पहुंचते ही रोक लिया था। इन तीनों नेताओं पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) की धारा 126 और धारा 170 के तहत एहतियातन कार्रवाई करते हुए उन्हें कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
इस बीच, बेंगलुरु के पूर्व पुलिस आयुक्त भास्कर राव ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को पत्र लिखकर ध्रुव राठी की नागरिकता, आव्रजन स्थिति और वीजा नियमों के पालन की गहन जांच की मांग की है। पूर्व पुलिस प्रमुख ने पत्र में सवाल उठाया कि क्या कोई विदेशी या विशेष वीजा स्थिति वाला व्यक्ति भारत के संवैधानिक संस्थानों के खिलाफ संगठित राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने का कानूनी अधिकार रखता है। उन्होंने मांग की है कि यदि विदेशी अधिनियम, 1946, ओसीआई नियमों या वीजा शर्तों का कोई भी उल्लंघन पाया जाता है, तो कानून के तहत उचित कदम उठाए जाएं।