रूस-यूक्रेन युद्ध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शांति संदेश के कायल हुए स्विस राष्ट्रपति
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच से भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बढ़ते कद को लेकर एक बार फिर दुनिया भर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से चल रहे भीषण युद्ध को समाप्त करने और कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाधान निकालने के भारतीय रुख की अब स्विट्जरलैंड ने भी खुले दिल से सराहना की है। स्विस राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस ऐतिहासिक और चर्चित संदेश 'यह युद्ध का युग नहीं है, बल्कि शांति का युग है' की जमकर तारीफ की है। भारत के लगातार यह दोहराए जाने पर कि किसी भी समस्या का समाधान रणभूमि में नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति की मेज पर ही निकल सकता है, वैश्विक नेताओं का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठकों और वार्ताओं के दौरान स्विट्जरलैंड के शीर्ष नेतृत्व ने वैश्विक शांति के प्रयासों में भारत की मध्यस्थता और मानवीय दृष्टिकोण को सर्वोपरि बताया है। आइए जानते हैं कि वैश्विक कूटनीति के इस दौर में स्विस राष्ट्रपति द्वारा की गई इस तारीफ के क्या मायने हैं और दुनिया भर में भारत के शांति प्रयासों को किस रूप में देखा जा रहा है।
Global Diplomacy and Swiss Appreciation: स्विट्जरलैंड ने की पीएम मोदी के शांति फार्मूले की सराहना, वैश्विक मंचों पर बढ़ा भारत का प्रभाव
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष को रोकने के लिए दुनिया के तमाम देश अपने-अपने तरीके से कूटनीतिक कोशिशें कर रहे हैं, लेकिन भारत का रुख हमेशा से बेहद स्पष्ट, संतुलित और मानवीय रहा है। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति ने भारत की इसी विदेश नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन की खुले तौर पर सराहना की है, जिसमें युद्ध के बजाय बातचीत के रास्ते पर जोर दिया गया है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच वैश्विक मंचों और दुनिया के तमाम संघर्ष वाले इलाकों (Hotspots of conflict) पर विस्तार से चर्चा हुई। स्विट्जरलैंड, जो अपनी पारंपरिक तटस्थता (Traditional Neutrality) के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है और जो इससे पहले भी शांति वार्ताओं के आयोजन में आगे रहा है, उसने भारत के शांतिपूर्ण समाधान के दृष्टिकोण को पूरी तरह सही ठहराया है। इस सराहना से यह साफ हो गया है कि वैश्विक शांति और सुरक्षा के मुद्दों पर आज भारत की आवाज को दुनिया के विकसित देश भी बेहद गंभीरता से सुन रहे हैं।
India Humanitarian Approach to Conflict: युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में भारत का मानवीय दृष्टिकोण, बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र विकल्प
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष की शुरुआत से ही दुनिया के सामने यह बात बार-बार स्पष्ट की है कि यह समय युद्ध या जंग का नहीं है। भारत ने न केवल कूटनीतिक स्तर पर संयम और तटस्थता का परिचय दिया है, बल्कि संकट में फंसे देशों के नागरिकों और युद्ध पीड़ितों तक लगातार मानवीय सहायता (Humanitarian Aid) भी पहुंचाई है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत का यह रुख किसी एक पक्ष के पक्ष में झुकने के बजाय वैश्विक शांति, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय नियमों के सम्मान पर आधारित है। यही वजह है कि यूरोप और पश्चिमी देशों के बीच अहम भूमिका निभाने वाले स्विट्जरलैंड जैसे देश भी अब प्रधानमंत्री मोदी के इस विजन को ग्लोबल गवर्नेंस और शांति स्थापना के लिए एक मजबूत आधार मान रहे हैं। दुनिया के दो बड़े ध्रुवों के बीच संतुलन बनाते हुए भारत ने जिस प्रकार स्वतंत्र और निष्पक्ष कूटनीति का परिचय दिया है, उसने अंतरराष्ट्रीय पटल पर देश की साख को और अधिक बुलंद कर दिया है।
Future Geopolitical Implications: स्विस समर्थन से मजबूत हुई भारत की वैश्विक स्थिति, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांतिदूत के रूप में उभरा देश
स्विस राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शांति संदेश की इस खुली तारीफ के बाद आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीतिक समीकरणों पर इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। जी-20 सम्मेलनों से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक भारत ने हमेशा ग्लोबल साउथ (Global South) की आवाज को बुलंद करने के साथ-साथ दुनिया भर में शांति स्थापना की वकालत की है। रूस-यूक्रेन युद्ध के इतने लंबे खिंचने के बाद अब दुनिया के कई देश इस बात को स्वीकार करने लगे हैं कि बिना भारत जैसे बड़े और तटस्थ देशों की मध्यस्थता और सहयोग के इस संकट का स्थाई समाधान निकाला बेहद कठिन है। आने वाले समय में भारत की यह कूटनीतिक परिपक्वता न केवल देश को वैश्विक महाशक्तियों के समकक्ष खड़ा करेगी, बल्कि दुनिया भर में शांति और मानवता के पक्षधर के रूप में भारत की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाएगी।