तीन घंटे बंद रहा श्मशान घाट का ताला, शादी में भोज खाने निकला था चौकीदार, लौटने पर जो हुआ

तीन घंटे बंद रहा श्मशान घाट का ताला, शादी में भोज खाने निकला था चौकीदार, लौटने पर जो हुआ

उत्तर प्रदेश के एक स्थानीय और व्यस्त शहर से इस वक्त की बेहद अजीबोगरीब, हैरान कर देने वाली और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही खबर सामने आ रही है। जीवन और मृत्यु के अंतिम सत्य को समेटे रहने वाले एक मुख्य श्मशान घाट पर एक ऐसा वाकया घटा जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया। नियम और परंपरा के मुताबिक हर वक्त खुला रहने वाला श्मशान घाट का मुख्य गेट पिछले दिनों लगातार तीन घंटे तक पूरी तरह से ताले में बंद रहा। स्थिति यह बन गई कि अंतिम संस्कार के लिए अपने दिवंगत परिजनों के शव लेकर पहुंचे शोक संतप्त परिवार और रिश्तेदार श्मशान घाट के बाहर सड़क पर घंटों बिलखते और इंतजार करते रहे। जांच-पड़ताल करने पर पता चला कि इस गंभीर लापरवाही के पीछे कोई बड़ी प्रशासनिक भूल नहीं, बल्कि श्मशान घाट पर तैनात चौकीदार की एक लापरवाही थी जो गेट पर ताला लगाकर पास ही में किसी रईस की शादी में छप्परफाड़ भोज (दावत) खाने चुपके से निकल गया था। जब चौकीदार पेट पूजा करके वापस लौटा और उसके बाद जो कुछ भी हुआ, उसने इलाके में सनसनी फैला दी। आइए जानते हैं इस अजीबो-गरीब घटना की पूरी अंदरूनी और दिलचस्प रिपोर्ट।

जब अंतिम यात्रा लेकर पहुंचे लोग तो श्मशान घाट के मुख्य गेट पर लटका मिला भारी-भरकम ताला

घटना वाले दिन दोपहर का वक्त था जब शहर के एक प्रतिष्ठित परिवार में अचानक एक बुजुर्ग की मृत्यु हो जाने के बाद उनका अंतिम संस्कार संपन्न कराने के लिए बड़ी संख्या में सगे-संबंधी और नातेदार पारंपरिक शव यात्रा लेकर मुख्य श्मशान घाट पहुंचे। लोगों को उम्मीद थी कि हमेशा की तरह श्मशान घाट के अंदर चिता सजाने के लिए लकड़ी, पानी और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं मिल जाएंगी। लेकिन जैसे ही एंबुलेंस और शव वाहन श्मशान घाट के मुख्य द्वार पर पहुंचे, वहां का नजारा देखकर सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। मुख्य लोहे के गेट पर एक बड़ा सा ताला लटका हुआ था और चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। श्मशान घाट के भीतर एक भी कर्मचारी या चौकीदार मौजूद नहीं था। दुःख के इस आंसुओं से भरे पल में जब अपनों के शव को कंधा दिए खड़े लोग अपनों की अंतिम विदाई के लिए भटकने लगे, तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

चौकीदार की तलाश शुरू हुई तो पता चला कि वह पास के मैरिज गार्डन में खा रहा है शादी का खाना

श्मशान घाट के बाहर हंगामा बढ़ता देख स्थानीय लोगों और वहां मौजूद पार्षदों ने जब परिसर के आसपास पूछताछ शुरू की और चौकीदार का मोबाइल नंबर मिलाया, तो फोन या तो स्विच ऑफ आ रहा था या फिर कोई रिसीव नहीं कर रहा था। इसके बाद जब कुछ लोग खोजबीन करते हुए श्मशान घाट के ठीक पीछे स्थित एक बड़े मैरिज लॉन और टेंट हाउस की तरफ पहुंचे, जहां उस दिन एक भव्य शादी समारोह चल रहा था, तो मा माजरा समझ में आ गया। श्मशान घाट का सरकारी चौकीदार अपनी ड्यूटी छोड़कर बारात और दावत के रंग में ऐसा रंगा था कि वह बड़े आराम से बफेट काउंटर पर प्लेट लेकर छप्परफाड़ दावत उड़ा रहा था। उसे इस बात की जरा भी सुधि नहीं थी कि श्मशान घाट के बाहर कोई शव लेकर खड़ा है और उसके ताले की वजह से अंतिम संस्कार रुका हुआ है।

चौकीदार के लौटते ही फूटा परिजनों और जनता का गुस्सा, श्मशान घाट परिसर में हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा

जब श्मशान घाट के गुस्से से तमतमाए लोगों ने मैरिज लॉन के अंदर जाकर चौकीदार को रंगे हाथों पकड़ा और उसे खींचते हुए श्मशान घाट के गेट पर लाए, तो वहां एक हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया। चौकीदार अपनी गलती मानने के बजाय उल्टे जनता और परिजनों से ही बहस करने लगा और नशे की हालत में ऊल-जलूल बातें बोलने लगा। उसने सफाई दी कि वह सिर्फ पांच मिनट के लिए खाना खाने गया था और उसे अंदाजा नहीं था कि इतनी जल्दी कोई शव यात्रा आ जाएगी। लेकिन इस गैर-जिम्मेदाराना जवाब ने शोकाकुल परिजनों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया। गुस्साई भीड़ ने मौके पर ही हंगामा शुरू कर दिया और कहा कि इंसान की मौत के बाद भी इस तरह की असंवेदनशीलता और लापरवाही क्षमा योग्य नहीं है।

स्थानीय प्रशासन और नगर निगम तक पहुंचा मामला, चौकीदार के खिलाफ उठी सख्त कार्रवाई की मांग

यह अजीबोगरीब और शर्मनाक मामला तूल पकड़ते ही स्थानीय पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों तक जा पहुंचा। लोगों ने नगर निगम के उच्च अधिकारियों को फोन करके वीडियो और तस्वीरें भेजीं और मांग की कि ऐसे लापरवाह और असंवेदनशील कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए, जो ड्यूटी के समय श्मशान घाट को सूना छोड़कर दावतों में मग्न रहता है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एक जांच कमेटी गठित कर दी और चौकीदार से स्पष्टीकरण तलब किया है। इस घटना के बाद से पूरे शहर में इस बात की चर्चा हो रही है कि कैसे आजकल के दौर में लोग अपनी बुनियादी और संवेदनशील ड्यूटियों को ताक पर रखकर सिर्फ ऐशो-आराम और दावतों में व्यस्त रहने लगे हैं।

अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील जगहों पर अनुशासन और मानवीय संवेदनाओं की सख्त जरूरत

यह वाकया भले ही सुनने में थोड़ा अटपटा और एक मजाक जैसा लगे, लेकिन यह हमारे समाज की उस प्रशासनिक और नैतिक गिरावट को बहुत गहराई से उजागर करता है जहां इंसान के जन्म से लेकर उसकी अंतिम विदाई तक हर जगह लापरवाही और भ्रष्टाचार अपनी जड़ें जमा चुका है। श्मशान घाट जैसी संवेदनशील और पवित्र जगह पर जहां हर पल इंसान को जीवन की नश्वरता का अहसास होता है, वहां इस तरह की घोर लापरवाही न सिर्फ मृत आत्मा का अपमान है, बल्कि जीवित इंसानों के दुखों के साथ एक भद्दा मजाक भी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि नगर निगम इस मामले में कड़ी कार्रवाई करेगा ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को अपने प्रियजन के अंतिम संस्कार के वक्त इस तरह की अमानवीय और शर्मनाक स्थिति का सामना न करना पड़े।