फिर भड़केगी आंदोलन की आग? 48 घंटे में CJP का दूसरा सबसे बड़ा अल्टीमेटम, एक्शन हुआ तो सड़कों पर उतरने की दी खुली चेतावनी!
देश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में एक बार फिर बड़े आंदोलन की आहट से सरगर्मी तेज हो गई है। नागरिक अधिकारों और कानूनी लड़ाइयों के लिए चर्चित संगठन सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ अपने तेवर बेहद सख्त कर लिए हैं। पिछले 48 घंटों के भीतर संगठन की ओर से यह दूसरा सबसे बड़ा अल्टीमेटम (Ultimatum) जारी किया गया है। सीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के जरिए दो टूक चेतावनी दी है कि 'अगर प्रशासन की तरफ से कोई भी दमनकारी एक्शन लिया गया, तो जनता दोबारा सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो जाएगी।' इस तीखी चेतावनी के बाद खुफिया एजेंसियों और कानून व्यवस्था संभालने वाली टीमों के कान खड़े हो गए हैं, और यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि क्या देश एक और बड़े आंदोलन की दहलीज पर खड़ा है।
2 दिनों में दूसरा अल्टीमेटम: क्यों तल्ख हुए तीस्ता सीतलवाड़ के संगठन के सुर?
सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) का यह आक्रामक रुख अचानक सामने नहीं आया है। संगठन का आरोप है कि पिछले कुछ समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं, अल्पसंख्यकों और असहमति की आवाज उठाने वाले नागरिकों को कानूनी पेचीदगियों में फंसाकर चुप कराने की कोशिश की जा रही है। पहले अल्टीमेटम में जहां संगठन ने कानूनी नोटिसों और दर्ज मुकदमों को तुरंत वापस लेने की मांग की थी, वहीं आज जारी हुए दूसरे अल्टीमेटम में आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया गया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कानूनी लड़ाई के साथ-साथ अब सड़क का रास्ता भी खुला हुआ है।
तो क्या फिर भड़केगा देशव्यापी आंदोलन?
इस खुली चेतावनी के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या देश में एक बार फिर शाहीन बाग या किसान आंदोलन जैसा कोई बड़ा और लंबा चलने वाला गतिरोध देखने को मिल सकता है? सीजेपी के इस आह्वान को कई अन्य मानवाधिकार संगठनों, छात्र यूनियनों और विपक्षी दलों के नागरिक मंचों का भी भीतरखाने समर्थन मिलता दिख रहा है। प्रदर्शनकारियों की कोर कमेटी के सदस्यों का कहना है कि उनकी टीमें ब्लॉक और जिला स्तर पर पूरी तरह तैयार हैं। अगर सरकार ने बातचीत के जरिए मसले को हल करने के बजाय पुलिसिया बल या दंडात्मक कार्रवाई (Action) का सहारा लिया, तो पूरे देश में एक साथ शांतिपूर्ण सत्याग्रह और चक्का जाम की शुरुआत कर दी जाएगी।
प्रशासन अलर्ट पर, संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा सख्त
सीजेपी की इस लगातार आ रही चेतावनियों को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय और विभिन्न राज्यों की पुलिस अलर्ट मोड पर आ गई है। विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग को कड़ा कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी नागरिक को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन कानून व्यवस्था को हाथ में लेने या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी। भड़काऊ बयानबाजी और अफवाह फैलाने वाले सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी पैनी नजर रखी जा रही है ताकि स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाने से रोका जा सके।
कूटनीतिक और कानूनी रास्ते पर भी नजर
जानकारों का मानना है कि सीजेपी इस अल्टीमेटम के जरिए सरकार पर एक बड़ा मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है। संगठन एक तरफ जहां सड़कों पर उतरने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में भी एक बड़ी जनहित याचिका (PIL) दायर करने की तैयारी चल रही है। अब देखना यह होगा कि इस दोहरे दबाव के बीच सरकार बातचीत की टेबल पर आती है या फिर सीजेपी की इस चेतावनी के बाद देश में एक बार फिर आंदोलनों और प्रदर्शनों का एक नया दौर शुरू हो जाता है, जिसने पहले भी कई बार देश की सियासत को पूरी तरह हिला कर रख दिया था।