पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग की ब्रिक्स सम्मेलन से आई इस दशक की सबसे शक्तिशाली और वायरल तस्वीर

पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग की ब्रिक्स सम्मेलन से आई इस दशक की सबसे शक्तिशाली और वायरल तस्वीर

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के विशाल और जटिल मंच पर जब कभी दुनिया के सबसे प्रभावशाली राष्ट्राध्यक्षों का जमावड़ा होता है, तो वहां खींची गई एक छोटी सी तस्वीर भी वैश्विक राजनीति की पूरी दिशा और दशा बदलकर रख देती है। ब्राजील में आयोजित हो रहे ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के गलियारों से एक ऐसी ही बेहद खास, दिल जीत लेने वाली और भू-राजनीतिक हलचल मचा देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया के मीडिया और रक्षा विश्लेषकों की नींद उड़ा दी है। इस वायरल तस्वीर में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को एक साथ हंसते हुए और आपस में हाथ में हाथ डाले हुए बेहद सहज मुद्रा में खड़े देखा जा सकता है। पश्चिमी देशों की मीडिया और कूटनीतिक गलियारों में इस तस्वीर को इस सदी के सबसे बड़े भू-राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि एक तरफ जहां दुनिया के कई हिस्से भयंकर युद्ध, आर्थिक प्रतिबंधों और कूटनीतिक तनावों की आग में झुलस रहे हैं, वहीं ग्लोबल साउथ के इन दिग्गजों का यह समन्वय नए विश्व ऑर्डर के उदय का सबसे बड़ा प्रमाण बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक कौशल और कूटनीति में उनकी वैश्विक स्वीकार्यता का ही यह कमाल है कि दुनिया के दो सबसे बड़े महाशक्तियों के नेता भारत के साथ कदम से कदम मिलाकर एक नए और निष्पक्ष भविष्य की पटकथा लिखते हुए नजर आ रहे हैं।

पश्चिमी देशों की नींद उड़ाने वाली इस तस्वीर के गहरे कूटनीतिक मायने और भू-राजनीतिक समीकरण

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान सामने आई पीएम मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग की इस त्रिमूर्ति वाली तस्वीर को केवल एक औपचारिक शिष्टाचार या फोटो सेशन मानकर खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके पीछे बहुत गहरे और दूरगामी रणनीतिक मायने छिपे हैं। पिछले कुछ वर्षों से वैश्विक राजनीति में यह नैरेटिव गढ़ा जा रहा था कि अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव के आगे दुनिया के विकासशील देश और रूस-चीन जैसे राष्ट्र पूरी तरह से अलग-थलग पड़ चुके हैं, लेकिन इस तस्वीर ने उस पूरे प्रोपेगंडा को एक झटके में ध्वस्त कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति की सबसे बड़ी खूबी यह रही है कि वे अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने सामरिक और तकनीकी रिश्तों को पूरी मजबूती के साथ बनाए रखते हुए भी रूस और चीन जैसे देशों के साथ वैश्विक मंचों पर बहुपक्षीय सहयोग के रास्ते खुले रखते हैं। पुतिन और जिनपिंग के साथ पीएम मोदी की इस सहज और मुस्कुराती हुई केमिस्ट्री ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब किसी एक गुट का पिछलग्गू नहीं है, बल्कि वह खुद वैश्विक राजनीति का वह केंद्र है जिसके बिना दुनिया का कोई भी बड़ा समीकरण पूरा नहीं हो सकता। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इस तस्वीर के सामने आने के बाद वाशिंगटन से लेकर लंदन तक के रणनीतिकार नए सिरे से अपनी विदेश नीतियों का आकलन करने पर मजबूर हो गए होंगे, क्योंकि यह तस्वीर इस बात का ऐलान कर रही है कि अब एकध्रुवीय दुनिया का दौर हमेशा के लिए लद चुका है।

ग्लोबल साउथ की बढ़ती ताकत और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर बढ़ता एक और ऐतिहासिक कदम

इस तस्वीर में दिख रहे तीन सबसे बड़े नेताओं का एक मंच पर होना केवल तीन देशों का मेल नहीं है, बल्कि यह दुनिया की आधी से अधिक आबादी और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की सामूहिक इच्छाशक्ति का प्रतीक है। जिस प्रकार से अमेरिका और पश्चिमी देश अपनी मुद्रा (डॉलर) और वित्तीय संस्थाओं का इस्तेमाल अन्य देशों पर दबाव बनाने के लिए करते आए हैं, उससे तंग आकर अब दुनिया के तमाम देश एक ऐसे वैकल्पिक वित्तीय और राजनीतिक तंत्र की तलाश कर रहे हैं जो पूरी तरह से न्यायसंगत हो। ब्रिक्स के इस सम्मेलन में जिस प्रकार से आपसी व्यापार के लिए स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग को लेकर इन नेताओं के बीच आम सहमति बनती दिख रही है, उसने इस तस्वीर के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया है। भारत की यह हमेशा से कूटनीतिक प्राथमिकता रही है कि वह किसी भी देश के खिलाफ प्रतिबंधों की राजनीति का समर्थन करने के बजाय हमेशा संवाद, शांति और विकास के रास्ते को प्राथमिकता देता है, और प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी इस बात की गारंटी है कि वैश्विक मंचों पर ग्लोबल साउथ के हितों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यह वायरल तस्वीर आने वाले समय में इतिहास के पन्नों में उस मील के पत्थर के रूप में दर्ज होगी, जिसने पश्चिमी आधिपत्य को चुनौती देते हुए एक बहुध्रुवीय और संतुलित दुनिया के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था।

वैश्विक शांति और आपसी सहयोग का संदेश देती इस तस्वीर का पूरी दुनिया पर पड़ने वाला दीर्घकालिक प्रभाव

जब दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के सर्वोच्च नेता वैचारिक मतभेदों और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धाओं से ऊपर उठकर एक साथ हाथ में हाथ डाले नजर आते हैं, तो यह पूरी मानवता के लिए एक सकारात्मक और सुकून देने वाला संदेश होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग की यह तस्वीर इस बात की गवाही देती है कि भविष्य की दुनिया टकराव और युद्ध की नहीं, बल्कि आपसी सहयोग, संवाद और सह-अस्तित्व की बुनियाद पर खड़ी होगी। भारत का बढ़ता हुआ वैश्विक कद और प्रधानमंत्री मोदी का करिश्माई नेतृत्व आज इस स्थिति में पहुंच चुका है कि वे दुनिया के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले नेताओं को भी एक मंच पर संवाद की पटरी पर बनाए रखने की क्षमता रखते हैं। सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्रों की सुर्खियों तक छाई यह तस्वीर इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि भारत अब वैश्विक राजनीति में केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि दुनिया की दिशा तय करने वाला एक प्रमुख चालक बन चुका है, और आने वाले दशकों में वैश्विक शांति और आर्थिक समृद्धि की हर बड़ी कहानी में भारत की यह भूमिका स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाएगी।