उरी हमले का दर्द और भारत के इतिहास का वह सबसे बड़ा और कड़ा फैसला

उरी हमले का दर्द और भारत के इतिहास का वह सबसे बड़ा और कड़ा फैसला

भारतीय सैन्य इतिहास के पन्नों में कुछ तारीखें ऐसी दर्ज हैं जिनका नाम सुनते ही देशवासियों का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है और दुश्मनों के दिलों में खौफ दौड़ जाता है। ऐसी ही एक ऐतिहासिक और स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाने वाली तारीख 29 सितंबर है। साल 2016 के सितंबर महीने में जब जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में स्थित भारतीय सेना के बेस कैंप पर पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने एक बेहद कायरतापूर्ण और जघन्य हमला किया था, तब पूरा देश गुस्से और शोक की आग में सुलग रहा था। उस कायराना हमले में हमारे देश के कई वीर जवान शहीद हो गए थे। उस वक्त देश की आम जनता से लेकर राजनीतिक गलियारों और सैन्य मुख्यालयों तक बस एक ही मांग गूंज रही थी कि इस बार केवल जुबानी निंदा या कूटनीतिक वार्ताओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि खून के हर एक कतरे का हिसाब चुकाने के लिए एक ऐसा निर्णायक और कठोर कदम उठाया जाना चाहिए जो दुश्मन देश की रीढ़ को अंदर तक झकझोर कर रख दे। देश के प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और सेना के शीर्ष नेतृत्व ने मिलकर एक ऐसा ऐतिहासिक और साहसिक फैसला लिया, जिसने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया।

'सर्जिकल स्ट्राइक' की वह गुप्त रात और स्पेशल फोर्सेज का अदम्य पराक्रम

उसी साल 29 सितंबर की रात को, जब पूरी दुनिया गहरी नींद में सो रही थी, तब नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र (POK) में भारतीय सेना के जांबाज कमांडो (Special Forces) मौत बनकर उतरे। इस पूरे सैन्य अभियान को 'सर्जिकल स्ट्राइक' (Surgical Strike) का नाम दिया गया था, जिसकी भनक पाकिस्तानी सेना और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) को तब तक नहीं लगी जब तक ऑपरेशन पूरी तरह से सफलतापूर्वक अंजाम तक नहीं पहुँच चुका था। भारतीय सेना के पैरा कमांडोज ने अपनी जान की परवाह किए बिना रात के अंधेरे में LoC की भारी सुरक्षा और बारूदी सुरंगों को चीरते हुए दुश्मन के लॉन्च पैड्स (Terrorist Launch Pads) में घुसपैठ की। इन लॉन्च पैड्स पर भारत में तबाही मचाने के लिए सैकड़ों खूंखार आतंकवादी हथियारों से लैस होकर बैठे थे। हमारे वीर सैनिकों ने आधुनिक हथियारों, नाइट विजन डिवाइस और अदम्य साहस का परिचय देते हुए एक के बाद एक कई आतंकी शिविरों को नेस्तनाबूद कर दिया और दर्जनों आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया।

बिना किसी नुकसान के दुश्मन के घर में घुसकर दिया गया करारा जवाब

सैन्य अभियानों के इतिहास में इस प्रकार के ऑपरेशंस को बेहद जोखिम भरा माना जाता है, क्योंकि दुश्मन अपने ही घर में बैठा होता है और उसे भौगोलिक स्थिति का फायदा मिलता है। लेकिन भारतीय सेना की अचूक रणनीति, बेहतरीन प्लानिंग और कमांडोज की सुझबुझ का ही नतीजा था कि इस पूरी भीषण कार्रवाई के दौरान भारत की ओर से एक भी सैनिक को खरोंच तक नहीं आई। सभी कमांडो अपना मिशन पूरी तरह से सफलता के साथ पूरा करके सूरज निकलने से पहले ही सुरक्षित भारतीय सीमा में वापस लौट आए थे। जब सुबह इस बात का आधिकारिक ऐलान किया गया कि भारतीय सेना ने LoC पार करके आतंकवादियों के ठिकानों को तबाह कर दिया है, तो पूरे पाकिस्तान में हड़कंप मच गया और वे इस बात से इनकार करने की कोशिश करने लगे कि ऐसा कुछ हुआ है। लेकिन भारत ने दुनिया के सामने वे पुख्ता सबूत रखे जिससे पाकिस्तान का झूठ पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो गया।

नए भारत की मजबूत रक्षा नीति और बदलता वैश्विक कूटनीतिक परिदृश्य

29 सितंबर की उस ऐतिहासिक रात ने दुनिया को यह साफ संदेश दे दिया कि यह 'नया भारत' है, जो अपनी सीमाओं की रक्षा करना भी जानता है और जरूरत पड़ने पर घर में घुसकर दुश्मन को सबक सिखाना भी अच्छी तरह जानता है। इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से वैश्विक मंच पर भारत की सैन्य ताकत और उसकी राजनीतिक इच्छाशक्ति का लोहा पूरी दुनिया ने माना। आज भी जब उस रात की यादें ताजा होती हैं, तो हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है और देश की सुरक्षा में तैनात हमारे वीर जवानों के प्रति सम्मान और बढ़ जाता है। यह ऑपरेशन सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह 140 करोड़ देशवासियों की भावनाओं की जीत और न्याय का वह प्रतीक था जिसने बता दिया कि भारत की संप्रभुता को चुनौती देने वालों का अंजाम क्या होता है।