कौन हैं कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके...जानिए कैसे जुड़ा है AAP से इनका पुराना कनेक्शन और क्या हैं इनकी अनोखी मांगें
इंटरनेट और सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की आंधी चल रही है। युवाओं के बीच इस डिजिटल मुहिम का क्रेज इस कदर बढ़ चुका है कि महज कुछ ही दिनों के भीतर इसके इंस्टाग्राम हैंडल पर 1 करोड़ (10 मिलियन) से भी ज्यादा फॉलोअर्स का आंकड़ा पार हो गया है। आपको बता दें कि इस बेहद अनोखी और चर्चित वर्चुअल पार्टी का जन्म भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद विरोध और व्यंग्य के रूप में हुआ है। हालांकि, यह राजनीतिक दल भारत निर्वाचन आयोग (ECI) में रजिस्टर्ड नहीं है, बल्कि यह एक सटायर यानी हास्य-व्यंग्य आंदोलन है। इस बीच बढ़ते विवाद को देखते हुए सीजेआई खुद अपनी टिप्पणी पर सफाई दे चुके हैं कि उनके बयान को मीडिया में गलत संदर्भ में पेश किया गया। लेकिन इन सबके बीच हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर इस डिजिटल क्रांति को जन्म देने वाले मास्टरमाइंड अभिजीत दीपके कौन हैं।
कौन हैं अभिजीत दीपके और क्या है उनकी शैक्षणिक योग्यता
मीडिया रिपोर्ट्स और इनसाइड सोर्सेज के मुताबिक, ऑनलाइन दुनिया में तहलका मचाने वाली इस पार्टी की शुरुआत महाराष्ट्र के पुणे के रहने वाले अभिजीत दीपके ने की है। CJP की आधिकारिक वेबसाइट पर इस संगठन को 'युवाओं की, युवाओं द्वारा, युवाओं के लिए पार्टी' के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसका मूल नारा 'धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक, आलसी' तय किया गया है। अगर इसके संस्थापक अभिजीत दीपके के बैकग्राउंड की बात करें, तो उन्होंने पुणे से ही पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की है। इसके बाद वे आगे की उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने प्रतिष्ठित बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (PR) में पोस्ट ग्रेजुएशन (मास्टर्स) की पढ़ाई पूरी की।
अरविंद केजरीवाल की AAP से रहा है पुराना और गहरा कनेक्शन
अभिजीत दीपके का राजनीतिक अभियानों और सोशल मीडिया मैनेजमेंट से बेहद पुराना नाता रहा है। सामने आई खबरों के अनुसार, साल 2020 से लेकर 2023 के बीच अभिजीत अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी (AAP) के सोशल मीडिया और चुनावी कैंपेनिंग टीम के मुख्य रणनीतिकारों में शामिल थे। साल 2020 में जब 'आप' ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, तब दीपके ही पार्टी के मीम्स पर आधारित डिजिटल कैंपेनिंग और क्रिएटिव कंटेंट का पूरा काम देख रहे थे। हालांकि, इसके बाद वह कुछ समय के लिए सक्रिय राजनीतिक क्षेत्र से दूरी बनाकर आगे की पढ़ाई के लिए विदेश चले गए थे।
क्या है कॉकरोच जनता पार्टी और इसकी सदस्यता की शर्तें
पार्टी द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किए गए ऑनलाइन पोस्ट में बड़े ही मजाकिया और व्यंग्यात्मक अंदाज में सदस्यता की शर्तें बताई गई हैं। इसके मुताबिक, इस पार्टी का मेंबर बनने के लिए व्यक्ति का 'बेरोजगार, हर वक्त ऑनलाइन रहने वाला, पेशेवर रूप से सोशल मीडिया पर भड़ास निकालने वाला और थोड़ा आलसी' होना बेहद जरूरी है। हालांकि, इस हास्य-व्यंग्य और मीम्स के पीछे कॉकरोच जनता पार्टी ने देश के युवाओं से जुड़े बेहद गंभीर और संवेदनशील मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया है। इनमें देश में बढ़ती बेरोजगारी, विभिन्न सरकारी परीक्षाओं के पेपर लीक विवाद, व्यवस्थागत पारदर्शिता और युवाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे बड़े मुद्दे शामिल हैं। पार्टी ने यह भी घोषणा की है कि वह जल्द ही एक भव्य 'जेन Z वर्चुअल सम्मेलन' (Gen Z Virtual Conference) का आयोजन करने जा रही है, जहां देश भर के युवा नीतियों और शासन व्यवस्था पर खुली चर्चा करेंगे।
चुनावी घोषणापत्र में की गईं ये हैरान करने वाली मांगें
ऑनलाइन प्रकाशित किए गए कॉकरोच जनता पार्टी के आधिकारिक मैनिफेस्टो (घोषणापत्र) पर नजर डालें, तो इसमें कई क्रांतिकारी और हैरान करने वाली मांगें रखी गई हैं। इसमें मुख्य रूप से मांग की गई है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के लिए सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के बाद मिलने वाले सभी तरह के राजनीतिक पदों और सरकारी नियुक्तियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए। इसके साथ ही, महिलाओं के लिए सभी क्षेत्रों में 50 प्रतिशत आरक्षण लागू करने, भारतीय मीडिया की पूर्ण स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और बार-बार दल बदलने वाले दलबदलू राजनेताओं पर 20 साल का कड़ा प्रतिबंध लगाने जैसी मांगें शामिल हैं।
CJP को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स की क्या है राय
इस समय कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर सोशल मीडिया पर आम यूजर्स और राजनीतिक विश्लेषक दो धड़ों में बंटे हुए साफ नजर आ रहे हैं। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का मानना है कि यह महज एक क्षणिक 'मीम पॉलिटिक्स' है, जिसका जमीन पर कोई वजूद या भविष्य नहीं है। इसके विपरीत, युवाओं और समर्थकों के एक बड़े वर्ग का कहना है कि देश के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब कोई डिजिटल मंच सीधे युवाओं से उनकी ही कूल और फंकी भाषा में बात कर रहा है और उनकी तात्कालिक चिंताओं व बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों को बिना किसी लाग-लपेट के उठा रहा है।