क्या 850 सीटों वाले परिसीमन विधेयक को पास करा पाएगी मोदी सरकार, सुप्रिया सुले के बयान से मचा हड़कंप

क्या 850 सीटों वाले परिसीमन विधेयक को पास करा पाएगी मोदी सरकार, सुप्रिया सुले के बयान से मचा हड़कंप

20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले देश में सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। मोदी सरकार के महत्वाकांक्षी परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें बेहद तेज हैं।

कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और महिला आरक्षण को जल्द लागू करने के प्रस्ताव वाले इस ऐतिहासिक विधेयक को आगामी सत्र में दोबारा पेश कर सकती है। हालांकि, इस योजना की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन परदे के पीछे नए राजनीतिक समीकरण बनने शुरू हो गए हैं।

पिछले सत्र में क्यों अटक गया था यह ऐतिहासिक विधेयक?

गौरतलब है कि 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक दो-तिहाई बहुमत न होने के कारण पारित नहीं हो सका था। संसदीय सीटों के विस्तार और महिलाओं को 33% आरक्षण देने के उद्देश्य से लाए गए इस विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे, जो आवश्यक संवैधानिक बहुमत से काफी कम थे। किसी भी संवैधानिक संशोधन को मंजूरी दिलाने के लिए सरकार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का विशेष दो-तिहाई बहुमत चाहिए होता है।

लोकसभा में सीटों का गणित: क्या एनडीए जुटा पाएगी जादुई आंकड़ा?

वर्तमान में लोकसभा में 540 सदस्य हैं, जिसमें से किसी भी संविधान संशोधन के लिए कम से कम 360 सांसदों का समर्थन (दो-तिहाई बहुमत) अनिवार्य है। फिलहाल एनडीए के पास 298 सांसद हैं।

  • राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी और उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना (UBT) के 6 सांसद सरकार का साथ दे सकते हैं, जिससे एनडीए का आंकड़ा 324 तक पहुंच जाएगा।

  • इसके अलावा, यदि द्रमुक (DMK) के 22 और शरद पवार की राकांपा (NCP-SP) के 8 सांसद भी समर्थन में आते हैं, तो यह संख्या 354 हो जाएगी। फिर भी, सरकार बहुमत से 6 कदम दूर रह जाएगी, जहां छोटे दलों और निर्दलीय सांसदों की भूमिका गेमचेंजर साबित होगी।

सुप्रिया सुले ने खोला 50% सीट वृद्धि फॉर्मूले का राज

इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले के एक बयान ने सबको चौंका दिया है। सुले ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में एक विशेष विकल्प पर चर्चा हुई थी। इस फॉर्मूले के तहत प्रत्येक राज्य के लिए लोकसभा सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि करने का प्रस्ताव है, ताकि जनसंख्या आधारित परिसीमन से दक्षिणी राज्यों के साथ होने वाले संभावित अन्याय को रोका जा सके।

सुप्रिया सुले ने कहा, "अगर इस फॉर्मूले को लागू किया जाता है, तो अकेले महाराष्ट्र में लोकसभा सीटें 48 से बढ़कर 72 हो जाएंगी।" उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर प्रस्तावित विधेयक में देश भर में सीटों को 50% बढ़ाने का स्पष्ट प्रावधान शामिल होता है, तो उनकी पार्टी इस पर सकारात्मक विचार (समर्थन) कर सकती है।

एनडीए में जाने और विलय की खबरों को किया सिरे से खारिज

विपक्ष के पाला बदलने की खबरों के बीच सुप्रिया सुले ने राकांपा (एसपी) के किसी अन्य दल में विलय या एनडीए में शामिल होने की अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "पहले हमारा विलय कांग्रेस में कराया गया, फिर भाजपा में; अब सिर्फ मनसे (MNS) ही बची है। हमारे किसी भी नेता ने एनडीए में जाने की बात नहीं की है। शरद पवार जी के नेतृत्व में हमारे सभी 8 सांसद और विधायक चट्टान की तरह एकजुट हैं।"

क्या विपक्ष के 'इंडिया' गठबंधन में बढ़ेगी दरार?

सुप्रिया सुले के इस रुख ने विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के भीतर एक नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या शरद पवार की पार्टी और डीएमके राष्ट्रीय हित और सीट वृद्धि के मुद्दे पर सरकार के इस प्रस्ताव का समर्थन करेंगे या विपक्ष एकजुट रहेगा। 13 अगस्त तक चलने वाले इस मानसून सत्र में यदि यह विधेयक पटल पर आता है, तो यह मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होगा।

Latest Posts