Up kiran,Digital Desk : नेपाल में पांच मार्च को होने वाले आम चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनावी बिगुल बजते ही प्रमुख नेता मैदान में उतर आए हैं। काठमांडो के पूर्व मेयर बालेंद्र शाह उर्फ ‘बालेन’ और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ अपने-अपने अंदाज में मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं। एक ओर बालेन घर-घर जाकर सीधे जनता से जुड़ रहे हैं, तो दूसरी ओर प्रचंड वाम दलों की एकता के जरिए संप्रभुता बचाने का संदेश दे रहे हैं।
चुनाव आयोग ने दी प्रचार की हरी झंडी
नेपाल के चुनाव आयोग ने शुक्रवार को राजनीतिक दलों को औपचारिक प्रचार की अनुमति दे दी है। आयोग के अनुसार 16 फरवरी से चुनाव प्रचार की आधिकारिक शुरुआत होगी, जो 15 दिनों तक चलेगी। हालांकि, उम्मीदवारों को इससे पहले भी व्यक्तिगत रूप से घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करने की छूट दी गई है, जिसका कई नेता पहले से ही लाभ उठा रहे हैं।
बालेन का देशव्यापी चुनावी दौरा
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बालेन इन दिनों व्यापक चुनावी दौरे पर हैं। वह सुदूर पश्चिम प्रांत के दादेलधुरा, दार्चुला, अछाम और बैतड़ी जिलों के अलावा कर्णाली प्रांत के दैलेख, सुर्खेत और कालिकोट जिलों में लोगों से मुलाकात कर चुके हैं। इससे पहले वह मधेश प्रांत के अपने पैतृक जिला धनुषा और कोशी प्रदेश के झापा जिले का भी दौरा कर चुके हैं।
किससे है बालेन का मुकाबला
रैपर से नेता बने बालेन झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। यहां उनका सीधा मुकाबला नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से माना जा रहा है। इस सीट को चुनाव की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में गिना जा रहा है।
मौन प्रचार से बना चर्चा का केंद्र
बालेन का प्रचार पारंपरिक राजनीति से बिल्कुल अलग है। पूर्वी और पश्चिमी नेपाल में करीब दो हफ्तों तक चले उनके ‘मौन प्रचार’ ने खासा ध्यान खींचा। वह न तो भाषण देते हैं और न ही औपचारिक सभाएं करते हैं। बालेन सिर्फ लोगों से हाथ मिलाते हैं, हाथ हिलाकर अभिवादन करते हैं और अपने साथ लाई घंटी बजाते हैं, जो उनके चुनाव चिन्ह का प्रतीक है। यही अंदाज उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाता है।
जनता में दिखा खास उत्साह
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बालेन जहां भी पहुंचे, वहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग उनकी एक झलक पाने, सेल्फी लेने और ऑटोग्राफ लेने को उत्सुक नजर आए। कई जगहों पर लोग स्वतः ही उनके समर्थन में नारे लगाने लगे। पश्चिमी नेपाल के दौरे के दौरान जब बालेन सड़कों पर लोगों से मिल रहे थे, उसी समय उनकी पत्नी सबीना काफ्ले झापा-5 में घर-घर जाकर प्रचार कर रही थीं।
प्रचंड का संदेश: वाम एकता से बचेगी संप्रभुता
दूसरी ओर, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ ने चुनावी माहौल में वाम दलों की एकता पर जोर दिया है। काठमांडू स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में एक बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिक्रियावादी ताकतों और विदेशी हस्तक्षेप की साजिशों को हराना जरूरी है। इसके लिए कम्युनिस्ट दलों का एकजुट होना समय की मांग है।
चुनावी माहौल में बढ़ती गर्मी
नेपाल में जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे चुनावी माहौल और गर्म होता जा रहा है। बालेन की नई शैली और प्रचंड की वैचारिक अपील ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। अब देखना होगा कि जनता किस रास्ते को अपना समर्थन देती है।




