Up kiran,Digital Desk : गजल सम्राट जगजीत सिंह की आवाज में वो कशिश थी जो रूह को सुकून पहुंचाती थी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनकी सबसे दर्द भरी गजल के पीछे एक ऐसा जख्म था जो ताउम्र नहीं भरा? फिल्म 'दुष्मन' का कालजयी गीत 'चिट्ठी न कोई संदेश, जाने वो कौन सा देश, जहां तुम चले गए' केवल एक फिल्मी गाना नहीं, बल्कि एक पिता का अपने जवान बेटे को खोने का चीत्कार था।
1990 का वो काला साल: जब खामोश हो गई 'गजल'
जगजीत सिंह और उनकी पत्नी चित्रा सिंह की जोड़ी संगीत की दुनिया में सफलता के शिखर पर थी। लेकिन साल 1990 में एक सड़क हादसे ने उनकी खुशियों को तहस-नहस कर दिया। उनके इकलौते बेटे विवेक सिंह की महज 20 साल की उम्र में एक कार एक्सीडेंट में मौत हो गई। इस हादसे ने चित्रा सिंह को इतना तोड़ दिया कि उन्होंने उसी दिन संगीत से हमेशा के लिए संन्यास ले लिया। जगजीत सिंह भी महीनों तक खामोश रहे, लेकिन जब वे वापस लौटे, तो उनकी आवाज में एक ऐसा दर्द था जो पहले कभी नहीं सुना गया था।
'दुष्मन' फिल्म का वो गाना और जगजीत के आंसू
फिल्म 'दुष्मन' के लिए जब जगजीत सिंह ने 'चिट्ठी न कोई संदेश' रिकॉर्ड किया, तो रिकॉर्डिंग स्टूडियो का माहौल गमगीन हो गया था। कहा जाता है कि इस गाने की हर लाइन गाते समय जगजीत के सामने उनके बेटे विवेक का चेहरा था।
रुंधा हुआ गला: गाने में जहां-जहां उनकी आवाज भारी होती है या गला रुंधता हुआ महसूस होता है, वह कोई गायकी की तकनीक नहीं थी, बल्कि जगजीत सिंह वाकई गाते हुए फूट-फूट कर रो पड़े थे।
सबकी आंखें हुईं नम: स्टूडियो में मौजूद संगीतकार और क्रू मेंबर्स जगजीत की हालत देख खुद को संभाल नहीं पाए और सबकी आंखों से आंसू बह निकले।
गजल सम्राट का शानदार सफर और सम्मान
बेटे के जाने के बाद जगजीत सिंह की गजलों में दर्शन और वैराग्य का रंग गहरा हो गया। उन्होंने 'सरफरोश', 'वीर-जारा', 'पिंजर' और 'शहीद उधम सिंह' जैसी फिल्मों में अपनी रूहानी आवाज दी। उनकी सेवाओं के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें साहित्य अकादमी और राजस्थान रत्न जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले।
आखिरी सफर: जब ब्रेन हैमरेज ने छीन ली आवाज
अपने 70वें जन्मदिन पर जगजीत सिंह ने दुनिया भर में 70 कॉन्सर्ट करने का संकल्प लिया था। वे यूके, मलेशिया और मॉरीशस में परफॉर्म कर चुके थे। उन्हें दिग्गज गजल गायक गुलाम अली के साथ एक बड़ा कॉन्सर्ट करना था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सितंबर 2011 में उन्हें ब्रेन हैमरेज हुआ और दो हफ्ते तक कोमा में रहने के बाद 10 अक्टूबर 2011 को संगीत की यह महान ज्योति हमेशा के लिए बुझ गई।
जगजीत सिंह के वो नगमे जो आज भी अमर हैं
होश वालों को खबर क्या (सरफरोश)
तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो (अर्थ)
वो कागज की कश्ती
तुमको देखा तो ये ख्याल आया (साथ-साथ)
झुकी-झुकी सी नजर (अर्थ)




