OMG: धरती की सतह पर बढ़ रहा है रहस्यमयी छेद, लोग कहते हैं ‘नरक का द्वार’!

नई दिल्ली: कुदरत के खेल भी बेहद अनोखे हैं. कुदरत हमें ऐसी अनोखी और अजीबोगरीब चीजें दिखाती है, जिसके बारे में हमने कभी सोचा भी नहीं था। बाढ़, सुनामी और ज्वालामुखी फटना तो आम बात है, लेकिन आजकल रूस के साइबेरिया में ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है। प्रकृति का यह अद्भुत नजारा 282 फीट गहरा गड्ढा है, जिसे पृथ्वी की सतह पर बना एक रहस्यमयी छेद माना जाता है। इस विशाल छेद को देखकर ऐसा लगता है कि यह धरती को ही निगल जाएगा। लोग इसे ‘नरक का मुंह’ या ‘नरक का दरवाजा’ भी कह रहे हैं।

इस विशाल और गहरे गड्ढे को बटागाइका क्रेटर के नाम से जाना जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस गड्ढे की माप पहली बार साल 1980 में की गई थी। तब से अब तक इस गड्ढे की लंबाई करीब 1 किलोमीटर बढ़ गई है, जबकि गड्ढा 96 मीटर यानी 282.1 फीट गहरा हो गया है।

यह यूरेशिया का सबसे पुराना गड्ढा है
बताया जा रहा है कि गड्ढे के खुलने से धरती की सतह से जो मिट्टी निकल रही है वह करीब एक से दो लाख साल पुरानी है. इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि गड्ढे की सबसे निचली सतह 6 लाख साल से भी ज्यादा पुरानी है। इसे यूरेशिया का सबसे पुराना खुला गड्ढा माना जाता है।

लोग कहते हैं ‘नरक का द्वार’
साइबेरिया के लोग इस रहस्यमयी गड्ढे को साल 1980 से देख रहे हैं और समय के साथ जिस तरह से इसका आकार बढ़ता जा रहा है, लोग इसे ‘नरक का द्वार’ कहने लगे। बताया जा रहा है कि यह गड्ढा हर साल 20 से 30 मीटर तक बढ़ रहा है और इस तरह आसपास के इलाकों को अपनी चपेट में ले रहा है.

वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि साइबेरिया में तापमान बहुत कम होने के कारण मिट्टी में हमेशा नमी बनी रहती है, जिससे मिट्टी जमीन में धंस जाती है और गड्ढे का आकार बढ़ जाता है। यह भी ग्लोबल वार्मिंग का ही परिणाम है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर ग्लोबल वार्मिंग इसी तरह बढ़ती रही तो धरती पर और भी ‘नरक के दरवाजे’ खुल सकते हैं।