जग्गू भगवानपुरिया गैंग का शातिर शूटर अमृत डालम मोल्दोवा से गिरफ्तार, ऑपरेशन ईस्टर्न रीच' के तहत पुलिस लाई स्वदेश
अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध सिंडिकेट, आतंकवाद और गैंगवार के नेटवर्क पर एक बार फिर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसा कड़ा और निर्णायक प्रहार किया है, जिसने देश के अंडरवर्ल्ड में खलबली मचा दी है। पंजाब के सबसे खूंखार और कुख्यात गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के आपराधिक साम्राज्य का मुख्य स्तंभ और कई संगीन मामलों में लंबे समय से फरार चल रहा शातिर अपराधी अमृत डालम आखिरकार कानून के शिकंजे में आ चुका है। भारत विरोधी गतिविधियों और जघन्य वारदातों को अंजाम देकर देश की सीमाओं से हजारों किलोमीटर दूर पूर्वी यूरोप के देश मोल्दोवा में छिपकर बैठा यह गैंगस्टर वहां सुरक्षित होने की गलतफहमी पाल रहा था, लेकिन पंजाब पुलिस की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के संयुक्त एवं बेहद गोपनीय 'ऑपरेशन ईस्टर्न रीच' ने उसकी सारी चालों को नाकाम कर दिया। मोल्दोवा की स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों और इंटरपोल के साथ मिलकर चलाए गए इस सफल प्रत्यर्पण और गिरफ्तारी अभियान के बाद पुलिस इस शातिर शूटर को कड़ी सुरक्षा के बीच पंजाब की धरती पर वापस ले आई है। अमृत डालम के पकड़े जाने से जग्गू भगवानपुरिया गैंग की रीढ़ पूरी तरह टूट चुकी है और पुलिस अब उसके बाकी बचे हुए गुर्गों के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की कुंडली खंगालने में जुटी है, जिससे आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।
'ऑपरेशन ईस्टर्न रीच' की पूरी इनसाइड स्टोरी: कैसे विदेशी धरती पर रची गई इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन की रणनीति
विदेशों में बैठकर भारत के विभिन्न राज्यों में फिरौती, टारगेट किलिंग और हथियारों की तस्करी का नेटवर्क चलाने वाले गैंगस्टर्स के खिलाफ पंजाब पुलिस की एजीटीएफ (AGTF) ने पिछले कुछ महीनों से एक विशेष अभियान छेड़ रखा है, जिसे 'ऑपरेशन ईस्टर्न रीच' का नाम दिया गया है। अमृत डालम जब भारतीय कानून की गिरफ्त से बचने के लिए फर्जी पासपोर्ट और अवैध रास्तों का इस्तेमाल करके देश छोड़कर भागा था, तब उसने अपनी फरारी काटने के लिए मोल्दोवा को सबसे सेफ हेवन मान लिया था। लेकिन पंजाब पुलिस के खुफिया विंग ने उसके डिजिटल फुटप्रिंट्स, सोशल मीडिया एक्टिविटी और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की हर एक कड़ी को जोड़ते हुए उसकी सटीक लोकेशन का पता लगा लिया। इसके बाद कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से मोल्दोवा सरकार पर दबाव बनाया गया और भारतीय विदेश मंत्रालय तथा सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से एक ऐसा चक्रव्यूह रचा गया जिससे उस शातिर अपराधी के पास भागने का कोई रास्ता नहीं बचा। इस पूरी कार्रवाई को जिस खामोशी और चाक-चौबंद तरीके से अंजाम दिया गया, वह इस बात का सबूत है कि आधुनिक तकनीक और वैश्विक पुलिस सहयोग के दौर में अब कोई भी अपराधी कानून के लंबे हाथों से बचकर ज्यादा दिनों तक नहीं छिप सकता है।
जग्गू भगवानपुरिया सिंडिकेट के लिए सबसे बड़ा झटका, अमृत डालम के काले कारनामों की लंबी फेरहरिस्त
अमृत डालम का नाम पंजाब की अपराध की दुनिया में किसी परिचय का मोहताज नहीं है, क्योंकि वह जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के सबसे भरोसेमंद और खूंखार शूटरों में से एक माना जाता है। राज्य के विभिन्न थानों में उसके खिलाफ रंगदारी वसूलने, कारोबारियों को जान से मारने की धमकी देने, पुलिस पर फायरिंग करने और कई सनसनीखेज हत्याओं के प्रयास जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। जब पंजाब पुलिस ने राज्य में सक्रिय गैंगस्टर्स के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू किया था, तब अमृत डालम ही वह शख्स था जिसने विदेश से बैठकर भगवानपुरिया गैंग के फाइनेंसरों और लोकल शूटरों के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में काम किया था। उसके विदेश भाग जाने के बाद भी उसका आतंक कम नहीं हुआ था, और वह लगातार वीडियो कॉल और सोशल मीडिया के जरिए पंजाब के व्यापारियों को धमकाकर करोड़ों की रंगदारी मांग रहा था। उसके पकड़े जाने से न केवल जग्गू भगवानपुरिया गिरोह की कमर टूट गई है, बल्कि उन तमाम स्थानीय अपराधियों का भी मनोबल गिर गया है जो विदेश में बैठे इन सरगनाओं के इशारे पर राज्य में खून-खराबे की वारदातों को अंजाम देने की फिराक में रहते थे।
भगोड़े अपराधियों के लिए स्पष्ट संदेश: सात समंदर पार भी सुरक्षित नहीं है जुर्म की दुनिया का कोई ठिकाना
मोल्दोवा से अमृत डालम को भारत लाने की यह ऐतिहासिक सफलता इस बात का सबसे बड़ा और कड़ा संदेश है कि देश का कानून और सुरक्षा तंत्र अब अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की बाधाओं को पार करके अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने की पूरी क्षमता रखता है। केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों की पुलिस एजेंसियों ने पिछले कुछ वर्षों में विदेश भागे हुए गैंगस्टर्स और आतंकवादियों के खिलाफ जिस तरह से रेड कॉर्नर नोटिस और प्रत्यर्पण संधियों का जाल फैलाया है, उससे अपराधियों की नींद उड़ चुकी है। पंजाब में संगठित अपराध और गन कल्चर को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए सरकार ने जो जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है, उसका असर अब धरातल पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। अमृत डालम से पूछताछ के दौरान पुलिस को कई ऐसे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स, हवाला चैनलों और हथियारों की सप्लाई करने वाले तस्करों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बने हुए थे। इस कार्रवाई के बाद से आम जनता के भीतर भी सुरक्षा का भाव मजबूत हुआ है और यह साबित हो गया है कि कानून का राज हर हाल में सर्वोपरि है।