चंडीगढ़ में बाइक टैक्सी पर सख्त बैन के बावजूद सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ रही हैं Uber और Rapido

चंडीगढ़ में बाइक टैक्सी पर सख्त बैन के बावजूद सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ रही हैं Uber और Rapido

चंडीगढ़ प्रशासन, परिवहन विभाग और शहर की ट्रैफिक पुलिस के कड़े नियमों तथा सख्त प्रतिबंधों के बावजूद 'सिटी ब्यूटीफुल' के नाम से मशहूर चंडीगढ़ की सड़कों पर बाइक टैक्सी (Bike Taxi) का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। उबर (Uber), रैपिडोप (Rapido) और ओला जैसी दिग्गज एग्रीगेटर कंपनियों की बाइक टैक्सियां शहर में आधिकारिक तौर पर प्रतिबंधित होने के बावजूद रोज सुबह से शाम तक धड़ल्ले से दौड़ रही हैं। खास बात यह है कि ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन के लगातार चालान काटने, वाहन सीज करने और कड़ी कार्रवाई करने के बाद भी इन बाइक टैक्सी चालकों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए बेहद शातिर और अनोखे तरीके ढूंढ निकाले हैं, जिन्हें देखकर अधिकारी भी हैरान हैं। कम समय में ज्यादा कमाई की चाह और शहर के आईटी पार्क, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर रोजाना सफर करने वाले ऑफिस जाने वाले युवाओं तथा छात्रों की भारी मांग के कारण यह अवैध कारोबार थमने के बजाय दिन-प्रतिदिन और अधिक तेजी से फल-फूल रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि चंडीगढ़ में बाइक टैक्सी बैन का यह पूरा विवाद क्या है और पुलिस से बचने के लिए ड्राइवर्स कौन-कौन से नए और अजीबोगरीब तरीके अपना रहे हैं।

क्यों लगाया गया है चंडीगढ़ में बाइक टैक्सियों पर प्रतिबंध: कमर्शियल रजिस्ट्रेशन और सुरक्षा नियमों का पेंच

चंडीगढ़ प्रशासन और ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी द्वारा शहर में बाइक टैक्सियों के संचालन पर रोक लगाने के पीछे मुख्य तर्क सुरक्षा और कमर्शियल नियमों का पालन न करना है। नियमों के मुताबिक, दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल निजी रूप से (Private Number Plate - White Plate) किया जाता है, और उन्हें बिना कमर्शियल परमिट (Yellow Plate) के यात्रियों को ढोने और उसके बदले किराया वसूलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रशासन का यह मानना है कि बिना कमर्शियल वेरिफिकेशन और लाइसेंस के सड़कों पर दौड़ने वाली ये बाइक टैक्सियां पैसेंजर्स की सुरक्षा के लिहाज से बेहद जोखिम भरी साबित हो सकती हैं, विशेषकर महिलाओं और रात के समय सफर करने वाले यात्रियों के लिए। इसके अलावा, ऑटो यूनियन और टैक्सी यूनियनों द्वारा लगातार यह शिकायत की जा रही थी कि इन अवैध बाइक टैक्सियों के कारण उनके पारंपरिक व्यवसाय और रोजी-रोटी पर भारी संकट आ गया है, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए इन पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी थी।

पुलिस से बचने के लिए ड्राइवर्स अपना रहे हैं नए तरीके: हेलमेट बदलना, यात्रियों को दोस्त बताना और खुफिया कोड वर्ड्स का इस्तेमाल

चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस की सख्ती और जगह-जगह लगने वाले चेकिंग नाकों से बचने के लिए उबर और रैपिडोप के बाइक टैक्सी ड्राइवर्स ने अब ऐसा शातिर दिमाग चलाना शुरू कर दिया है कि पुलिस भी चकमा खा जाती है। कई ड्राइवर्स बुकिंग लेने के बाद यात्री से कहते हैं कि वे ऐप बंद कर दें और उन्हें किसी परिचित या दोस्त की तरह पीछे बैठना ताकि ट्रैफिक पुलिस को शक न हो। इसके अलावा, कई जगहों पर ड्राइवर्स अपनी बाइक पर लगे कंपनी के लोगो या स्टिकर हटाकर घूम रहे हैं, और चेकिंग प्वाइंट आते ही यात्रियों को पहले ही समझा देते हैं कि वे उनके रिश्तेदार हैं। कुछ शातिर ड्राइवर तो पुलिस को यह झांसा देते हैं कि वे सिर्फ लिफ्ट लेकर जा रहे थे और कोई किराया नहीं ले रहे हैं। इसके साथ ही, सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए ये ड्राइवर्स चंडीगढ़ के ट्रैफिक पुलिस नाकों की लाइव लोकेशन और चेकिंग पॉइंट्स की जानकारी आपस में शेयर करते रहते हैं, जिससे पुलिस के पहुंचने से पहले ही वे रास्ते बदल लेते हैं।

यात्रियों की मजबूरी और कंपनियों की चुप्पी: समय और पैसे बचाने की होड़ में नियम तोड़ने को मजबूर हैं आम नागरिक

एक तरफ जहां प्रशासन और पुलिस इन अवैध बाइक टैक्सियों पर लगाम कसने के लिए ताबड़तोड़ चालान काट रही है और गाड़ियां जब्त कर रही है, वहीं दूसरी तरफ शहर के आम नागरिकों, कॉलेज के छात्रों और आईटी प्रोफेशनल्स का यह कहना है कि बाइक टैक्सी उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। चंडीगढ़ के पीक आवर्स (Peak Hours) में जब ट्रैफिक जाम की समस्या विकराल हो जाती है, तो ऑटो या कैब बुक करने में जहां बहुत ज्यादा समय और पैसे खर्च होते हैं, वहीं बाइक टैक्सी कम किराए में ट्रैफिक के बीच से आसानी से कम समय में मंजिल तक पहुंचा देती है। यही वजह है कि बैन होने के बावजूद लोग लगातार इन ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं और ड्राइवर्स भी अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए जोखिम मोल ले रहे हैं। बहरहाल, प्रशासन और एग्रीगेटर कंपनियों के बीच चल रहे इस रस्साकशी के खेल में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में चंडीगढ़ की सड़कों पर इस समस्या का कोई स्थाई समाधान निकल पाता है या नहीं।