48 घंटे की ED रेड के बाद भी कुछ नहीं मिला! अमनदीप कौर बोली- मंत्री पद और राज्यसभा का दिया गया था ऑफर

48 घंटे की ED रेड के बाद भी कुछ नहीं मिला! अमनदीप कौर बोली- मंत्री पद और राज्यसभा का दिया गया था ऑफर

प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा लगातार 48 घंटे तक चली लंबी और सघन छापेमारी के बाद आखिरकार टीम को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। इस कार्रवाई के समाप्त होते ही मामले ने उस वक्त राजनीतिक भूचाल का रूप ले लिया जब अमनदीप कौर ने मीडिया के सामने आकर बेहद चौंकाने वाले और सनसनीखेज खुलासे किए। अमनदीप कौर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दावा किया कि ईडी की रेड केवल एक बहाना थी, असल में उनके ऊपर राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि उन्हें पार्टी बदलने और पाला बदलने के बदले में राज्यसभा सीट और कैबिनेट में मंत्री पद देने की बड़ी पेशकश (ऑफर) की गई थी। अमनदीप कौर के इस बयान के बाद प्रदेश के राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है और पक्ष-विपक्ष के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। केंद्रीय जांच एजेंसी की इस कार्रवाई और उसके बाद आए राजनीतिक बयानबाजी से पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है।

48 घंटे तक चला ईडी का मैराथन सर्च ऑपरेशन, खंगाले गए एक-एक कोने और दस्तावेज

प्रवर्तन निदेशालय की एक बड़ी टीम ने केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बीच अमनदीप कौर के आवास और उनसे जुड़े व्यावसायिक ठिकानों पर एक साथ तड़के छापा मारा था। यह मैराथन सर्च ऑपरेशन बिना रुके लगातार 48 घंटे तक जारी रहा। इस दौरान जांच अधिकारियों ने घर के कोने-कोने, लॉकरों, बैंक खातों की पासबुक, डिजिटल उपकरणों, मोबाइल फोन और अचल संपत्तियों से जुड़े तमाम कागजातों की बारीकी से जांच-पड़ताल की। ईडी के अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों और करीबियों से अलग-अलग कमरों में बैठाकर लंबी पूछताछ भी की। लगातार दो दिनों तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के दौरान घर के बाहर मीडिया कर्मियों और समर्थकों की भारी भीड़ जमा रही। हालांकि, 48 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद जब ईडी की टीम मौके से बाहर निकली तो उनके हाथ कोई भी आपत्तिजनक दस्तावेज या अघोषित संपत्ति का सबूत नहीं लगा।

48 घंटे की जांच के बाद भी कुछ नहीं मिला, सब कुछ पूरी तरह से साफ: अमनदीप कौर

ईडी टीम के रवाना होने के तुरंत बाद अमनदीप कौर ने समर्थकों के साथ मीडिया का सामना किया और पूरी घटना की जानकारी विस्तार से दी। उन्होंने कहा, "जांच एजेंसी ने मेरे घर का एक-एक कोना छान मारा, मेरे परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और मेरे तमाम वित्तीय रिकॉर्ड्स की जांच की गई। लेकिन 48 घंटे की इस मैराथन जांच के बाद भी उन्हें एक पैसे का भी अवैध लेन-देन या कोई बेनामी संपत्ति नहीं मिली। यह इस बात का सीधा सबूत है कि मेरी पूरी कमाई और संपत्ति पूरी तरह से वैध और पारदर्शी है।" अमनदीप कौर ने आगे कहा कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल अब स्वतंत्र जांच के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक विरोधियों को डराने-धमकाने और उनकी आवाज को दबाने के लिए एक राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है।

राजनीतिक पाला बदलने के लिए मिला था राज्यसभा सीट और मंत्री पद का प्रलोभन

पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमनदीप कौर ने सबसे बड़ा विस्फोट करते हुए दावा किया कि छापेमारी के पीछे असल मंशा कुछ और ही थी। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान और उससे पहले भी उन पर राजनीतिक दल बदलने का भारी दबाव बनाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया, "मुझे सीधे तौर पर यह पेशकश की गई थी कि अगर मैं अपनी मौजूदा पार्टी छोड़कर सत्ताधारी खेमे में शामिल हो जाती हूँ, तो मेरे खिलाफ चल रही सभी जांचें तुरंत बंद कर दी जाएंगी। इतना ही नहीं, मुझे संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में भेजने और सरकार बनने पर कैबिनेट मंत्री का पद देने का भी लालच दिया गया।" अमनदीप कौर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने इस ऑफर को सिरे से खारिज कर दिया क्योंकि वे किसी भी दबाव या प्रलोभन के आगे झुकने वाली नहीं हैं और अपनी विचारधारा व जनता के विश्वास के साथ कभी समझौता नहीं करेंगी।

राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप, विपक्ष ने केंद्र सरकार और ईडी पर साधा निशाना

अमनदीप कौर के इस सनसनीखेज खुलासे के बाद प्रदेश की राजनीति का पारा अचानक चढ़ गया है। विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने तुरंत बयान जारी कर केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार ईडी, सीबीआई और आईटी जैसी निष्पक्ष संस्थाओं का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को प्रताड़ित कर रही है और उन्हें डराकर अपनी पार्टी में शामिल करने का खेल खेल रही है। विपक्षी नेताओं ने अमनदीप कौर के दावों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है और कहा है कि 48 घंटे की रेड में कुछ न मिलना यह साबित करता है कि यह पूरी कार्रवाई राजनीति से प्रेरित थी। वहीं दूसरी ओर, सत्ताधारी दल के प्रवक्ताओं ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे भ्रष्टाचार से ध्यान भटकाने का पैंतरा करार दिया है।

जनता की अदालत में जाऊंगी, न्याय के लिए कानूनी लड़ाई जारी रहेगी: अमनदीप कौर

अमनदीप कौर ने साफ कर दिया है कि वे इस प्रताड़ना के खिलाफ खामोश नहीं बैठेंगी। उन्होंने ऐलान किया कि वे जांच एजेंसियों के इस मनमाने रवैये और राजनीतिक षड्यंत्र को लेकर जनता के बीच जाएंगी और पूरे सच को उजागर करेंगी। इसके साथ ही वे इस मामले में कानूनी विशेषज्ञों की सलाह ले रही हैं ताकि केंद्रीय एजेंसी की इस मनमानी कार्रवाई के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सके। उन्होंने अपने समर्थकों को आश्वस्त किया कि वे पूरी निडरता के साथ मैदान में डटी रहेंगी और किसी भी केंद्रीय एजेंसी या राजनीतिक दबाव के आगे घुटने नहीं टेकेंगी। इस घटनाक्रम के बाद से पूरे इलाके में राजनीतिक हलचल बेहद तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ने की पूरी संभावना है।