पंजाब में आर-पार के मूड में सरकार: हड़ताली कर्मचारियों पर 'नो वर्क, नो पे' लागू, 11 सितंबर तक पेन-डाउन स्ट्राइक
पंजाब में राज्य सरकार और सरकारी कर्मचारियों के बीच टकराव अब चरम पर पहुंच गया है। कर्मचारियों द्वारा अपनी पेन-डाउन हड़ताल को 11 सितंबर तक आगे बढ़ाए जाने के बाद भगवंत मान सरकार ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए 'काम नहीं तो वेतन नहीं' (नो वर्क, नो पे) का नियम लागू करने का कड़ा फैसला किया है।
पंजाब सांझा मुलाजम मंच के प्रमुख नेता सुखचैन सिंह खेड़ा ने ऐलान किया कि कर्मचारियों की पेन-डाउन हड़ताल अब शुक्रवार तक जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय, विभिन्न विभागाध्यक्षों के निदेशालयों और जिला स्तरीय प्रशासनिक कार्यालयों तक में कार्यरत कर्मचारी इस आंदोलन में पूरी मुस्तैदी से डटे हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने रोष जताया कि तमाम गतिरोध के बावजूद सरकार ने अब तक आंदोलनकारी कर्मचारियों को उनकी मांगों पर आमने-सामने बातचीत के लिए न्योता नहीं दिया है।
डीए एरियर और कारण बताओ नोटिस वापस लेने पर अड़े कर्मचारी
सरकारी कर्मियों की यह राज्यव्यापी हड़ताल कई पुरानी और लंबित मांगों को लेकर शुरू हुई है। कर्मचारी संगठन मुख्य रूप से रोके गए महंगाई भत्ते (डीए) को तुरंत जारी करने, सुनिश्चित कैरियर प्रगति लाभ (एसीपी) का लाभ बहाल करने और अन्य वित्तीय भत्तों के भुगतान की मांग उठा रहे हैं। इसके साथ ही कर्मचारी 27 अगस्त को आयोजित सामूहिक विरोध के दौरान दर्ज की गई "अनाधिकृत" अनुपस्थिति पर सरकार की ओर से जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को भी बिना शर्त वापस लेने पर अड़े हुए हैं।
ड्यूटी से नदारद रहने वालों पर चलेगा डंडा, कार्मिक विभाग का सख्त फरमान
मंगलवार को पंजाब के कार्मिक विभाग ने सभी विशेष मुख्य सचिवों, अतिरिक्त मुख्य सचिवों, वित्तीय आयुक्तों और प्रशासनिक सचिवों को एक कड़ा आधिकारिक पत्र जारी किया। पत्र में रेखांकित किया गया है कि सरकार के संज्ञान में यह बात आई है कि कई कर्मचारी सुबह कार्यालय पहुंचकर हाजिरी तो लगा देते हैं, लेकिन अपनी सीटों और कर्तव्यों से नदारद रहते हैं। सरकार ने कहा कि कार्य समय के दौरान इस तरह की मनमानी अनुपस्थिति से अपने दैनिक कामकाज के लिए दफ्तरों में आने वाली आम जनता को भारी मानसिक व प्रशासनिक असुविधा का सामना करना पड़ता है।
'काम नहीं तो वेतन नहीं' का सिद्धांत लागू, कटेगी सैलरी
सरकार द्वारा जारी नए आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि कार्यालयों में उपस्थित न रहकर कामकाज ठप करने वाले कर्मियों को "अनाधिकृत अनुपस्थिति" माना जाएगा और प्रशासनिक सेवा नियमों के तहत स्थापित 'नो वर्क, नो पे' के सिद्धांत के अनुसार उस अवधि का वेतन पूरी तरह काट लिया जाएगा। इसके साथ ही ऐसे कर्मियों के सर्विस रिकॉर्ड में अनुपस्थिति दर्ज करते हुए उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू की जाएगी।
इससे पहले कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कर्मचारियों से लोकहित में अपनी ड्यूटी पर लौटने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि मान सरकार अपने कर्मचारियों के हितों के साथ मजबूती से खड़ी है और प्रत्येक जायज मांग पर विचार कर उसका समाधान निकालने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
अवैध घोषित करने के बावजूद सचिवालय से लेकर जिलों तक कामकाज ठप
कैबिनेट मंत्री द्वारा हड़ताल को गैर-कानूनी घोषित किए जाने और कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बावजूद राज्य भर में कर्मचारियों ने काम ठप रखा। कर्मचारियों ने जिला स्तर पर मिनी सचिवालयों और विभागीय दफ्तरों के बाहर जोरदार नारेबाजी करते हुए सरकारी कामकाज का पूर्ण बहिष्कार किया। राजधानी चंडीगढ़ के प्रमुख प्रशासनिक दफ्तरों से लेकर दूरदराज के जिलों तक मंत्रिस्तरीय सेवा संवर्ग के कर्मचारियों ने पेन-डाउन हड़ताल को सफल बनाया, जिससे रजिस्ट्री, प्रमाण पत्र और नागरिक सेवाओं से जुड़े तमाम सरकारी कामकाज अटक गए।
18 फीसदी बकाया डीए और एसीपी लाभ की बहाली मुख्य मुद्दा
होशियारपुर में कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष अनिरुद्ध मोदगिल ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन ने कर्मियों का 18 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए), एसीपी और अन्य जरूरी भत्ते लंबे समय से अटका रखे हैं। वहीं फिरोजपुर में जिला प्रशासनिक परिसर (डीएसी) के बाहर जमा कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। पंजाब राज्य मंत्रिस्तरीय सेवा संघ के जिला अध्यक्ष पिप्पल सिंह ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की तरफ से केवल मौखिक दिलासा और कोरे आश्वासन मिलते रहे हैं, जबकि असल मुद्दों पर कोई ठोस प्रशासनिक शासनादेश जारी नहीं किया गया।