Punjab Politics: 2027 चुनाव से पहले AAP को बड़ा झटका, अमृतसर नॉर्थ के विधायक कुंवर विजय प्रताप का इस्तीफा
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच सत्ताधारी आम आदमी पार्टी को एक और तगड़ा राजनीतिक झटका लगा है। अमृतसर नॉर्थ से विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने पंजाब विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी द्वारा आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपने 40 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करने के ठीक अगले दिन यह कदम सामने आया है। इससे पहले पटियाला जिले के दो प्रमुख विधायकों—समाना से पूर्व मंत्री चेतन सिंह जौरामाजरा और सनौर से हरमीत सिंह पठानमाजरा ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ दी थी, जिससे पंजाब की राजनीति में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है।
कुंवर विजय प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए अमृतसर की जनता का आभार जताया। उन्होंने लिखा कि अमृतसर के लोगों ने जो प्यार और सम्मान उन्हें दिया, उसके लिए वे जीवन भर आभारी रहेंगे। पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा कि एक विधायक के तौर पर उन्होंने अपने करीब 90 फीसदी विधायी और सामाजिक लक्ष्य पूरे कर लिए हैं। अपने बयान में उन्होंने राज्य की राजनीति पर तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब पंजाब को सिर्फ फीता काटने और गलियों के काम तक सीमित राजनीति से बाहर निकाला जाए।
पूर्व आईपीएस ने अपने कार्यकाल का लेखा-जोखा पेश करते हुए कहा कि उन्होंने अपने हलके में सामंती और ‘माई-बाप’ वाली संस्कृति को खत्म करने का काम किया। उन्होंने पानी, सीवरेज, कंपनी बाग, सर्किट हाउस, गंदे नाले की सफाई, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और सरूप रानी कॉलेज जैसे स्थानीय बुनियादी मुद्दों के साथ-साथ बरगाड़ी बेअदबी कांड के न्याय की आवाज भी विधानसभा में पूरी मुखरता से उठाई। उन्होंने अपील की कि ड्रग्स, फिरौती, गैंगस्टर नेटवर्क और भ्रष्टाचार में जकड़े पंजाब को बचाने के लिए सभी को एकजुट होकर प्रयास करने होंगे।
इससे पहले इस्तीफा देने वाले विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने अपना इस्तीफा पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा था, जबकि कैबिनेट से हटाए जा चुके चेतन सिंह जौरामाजरा ने सोशल मीडिया के जरिए पार्टी छोड़ने का ऐलान किया था। इन दोनों नेताओं ने भी सरकार के कामकाज पर सीधे सवाल उठाए थे, जिनमें राज्य में नशे का बढ़ता जाल, कर्ज का बोझ और श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के बावजूद बेअदबी विरोधी कड़े कानून न बनाए जाने जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल थे। एक के बाद एक विधायकों के पार्टी छोड़ने से सूबे में सियासी समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं।