पंजाब के कोटकपूरा में 22 हजार लीटर नकली देसी घी के सैंपल हुए फेल, ग्रेटर नोएडा की नामी संगीन धाराओं में केस
भारतीय खाद्य बाजार में आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों और मुनाफाखोरों के खिलाफ राज्य सरकारों और खाद्य सुरक्षा विभागों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है, जिसके तहत लगातार ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में पंजाब के फरीदकोट जिले के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक शहर कोटकपूरा से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां खाद्य सुरक्षा विभाग की छापामार कार्रवाई के दौरान करीब 22 हजार लीटर भारी मात्रा में संदिग्ध और मिलावटी देसी घी के स्टॉक को पकड़ा गया था। जब इस भारी-भरकम जखीरे से सैंपल लेकर पंजाब की सरकारी फूड टेस्टिंग लैब में जांच के लिए भेजे गए, तो रिपोर्ट आते ही हड़कंप मच गया क्योंकि वे सभी सैंपल पूरी तरह से फेल पाए गए और उनमें मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक केमिकल व घटिया फैट की पुष्टि हुई। इस गंभीर खुलासे के बाद पंजाब प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर यानी ग्रेटर नोएडा में रजिस्टर्ड एक बड़ी डेयरी और फूड प्रोसेसिंग कंपनी के खिलाफ विभिन्न संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस बड़ी कार्रवाई से देश भर के उन मिलावटखोरों में सिहरन पैदा हो गई है जो बड़े पैमाने पर ब्रांडेड या अनब्रांडेड पैकेटों की आड़ में जनता की थाली तक जहर परोसने का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चला रहे हैं।
पंजाब के कोटकपूरा में कैसे हुआ इस विशाल मिलावटी घी के खेल का भंडाफोड़, खाद्य विभाग की रेड की पूरी कहानी
मिलावटखोरी के इस काले कारोबार का पर्दाफाश तब हुआ जब पंजाब के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग तथा खाद्य सुरक्षा विंग को गुप्त सूचना मिली कि कोटकपूरा के एक बड़े गोदाम में भारी मात्रा में संदिग्ध क्वालिटी का देसी घी खपाने के लिए डंप किया गया है। सूचना मिलते ही खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की एक विशेष टीम ने स्थानीय पुलिस बल के साथ मिलकर उस गुप्त ठिकाने पर अचानक औचक छापा मारा और वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। गोदाम के भीतर टिन के डिब्बों और बड़े ड्रमों में लगभग 22 हजार लीटर देसी घी भरा हुआ था, जिसके व्यापारिक लाइसेंस, क्वालिटी सर्टिफिकेट और सोर्स के बारे में जब गोदाम मालिक से पूछताछ की गई तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। अधिकारियों ने मौके की नजाकत को समझते हुए तुरंत घी के अलग-अलग ब्रांडेड और खुले नमूनों को सील किया और उन्हें प्रयोगशाला परीक्षण के लिए कड़े सुरक्षा घेरे में भेज दिया। इस कार्रवाई के दौरान ही यह साफ हो गया था कि त्योहारी सीजन या आम दिनों में बाजार की मांग को पूरा करने के नाम पर किस प्रकार भोले-भाले उपभोक्ताओं को जहरीला और मिलावटी घी खिलाने का एक बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा था, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया।
ग्रेटर नोएडा की कंपनी की संलिप्तता और लैब रिपोर्ट में मिले खतरनाक तत्वों के चौंकाने वाले खुलासे
कोटकपूरा गोदाम से भरे गए घी के नमूनों की जब राज्य की अधिकृत प्रयोगशाला में वैज्ञानिक जांच की गई, तो जो तथ्य सामने आए उन्होंने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। लैब रिपोर्ट में यह प्रमाणित हो गया कि वह 22 हजार लीटर घी न केवल शुद्धता के पैमानों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरा, बल्कि उसमें पशु चर्बी (Animal Fat), सिंथेटिक पाम ऑयल और सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक रसायनों की भारी मिलावट की गई थी। जांच के आगे की कड़ियों को जब जोड़ा गया तो यह पता चला कि इस नकली और मिलावटी घी का यह पूरा खेप उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित एक नामी मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग यूनिट द्वारा सप्लाई किया गया था। ग्रेटर नोएडा की यह कंपनी बड़े पैमाने पर देश के विभिन्न राज्यों में अपनी सप्लाई चेन चलाती है और शुद्ध देसी घी के नाम पर बाजार में जहर बेचने का यह घिनौना खेल खेल रही थी। पंजाब के खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस तथ्यात्मक साक्ष्य के आधार पर ग्रेटर नोएडा की उस संबंधित कंपनी के प्रबंधकों, मालिकों और डिस्ट्रीब्यूटरों के खिलाफ स्थानीय थाने में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट (FSSAI) और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज करा दिए हैं।
त्योहारी सीजन से पहले मिलावटखोरों पर कसा शिकंजा, आम जनता की सेहत के लिए बड़ी चेतावनी
भारत में जब भी कोई बड़ा त्योहार या शादी का सीजन नजदीक आता है, तब बाजार में नकली मावा, पनीर, मिलावटी तेल और नकली देसी घी की मांग और आपूर्ति कई गुना बढ़ जाती है, जिसका फायदा ये ठग उठाते हैं। कोटकपूरा में पकड़े गए 22 हजार लीटर इस जहरीले घी का यह मामला इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि कैसे संगठित गिरोह देश के एक राज्य से दूसरे राज्य में अपनी अवैध सामग्री भेजकर आम आदमी की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। पंजाब सरकार और खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस बड़ी कार्रवाई के बाद पूरे राज्य में अलर्ट जारी कर दिया है और सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे बाहरी राज्यों से आने वाले दूध और डेयरी उत्पादों की लगातार सैंपलिंग करें। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से लोगों को दिल की बीमारियां, लीवर और किडनी की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए उपभोक्ताओं को भी चाहिए कि वे सस्ते के चक्कर में किसी भी संदिग्ध उत्पाद को खरीदने से बचें। ग्रेटर नोएडा की कंपनी पर दर्ज हुई इस एफआईआर के बाद अब पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें उत्तर प्रदेश जाकर उन मुख्य सरगनाओं की तलाश में जुट गई हैं जो इस पूरे मिलावट के साम्राज्य को पर्दे के पीछे बैठकर चला रहे थे।