पंजाब में इस बीमारी का भयंकर प्रकोप, 347 मामलों की पुष्टि और 2 की मौत; लुधियाना बना हॉटस्पॉट

पंजाब में इस बीमारी का भयंकर प्रकोप, 347 मामलों की पुष्टि और 2 की मौत; लुधियाना बना हॉटस्पॉट

पंजाब में मौसम में बदलाव के बीच संक्रामक बीमारियों ने स्वास्थ्य तंत्र की चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राज्यभर में स्वाइन फ्लू (Swine Flu) के 1,926 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से अब तक 347 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है।

संक्रमण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के दो बड़े औद्योगिक शहरों लुधियाना और जालंधर में इस वायरस के चलते दो मरीजों की जान जा चुकी है। मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों ने सभी जिलों के सरकारी और निजी अस्पतालों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

लुधियाना बना स्वाइन फ्लू का केंद्र, जिलेवार स्थिति ने बढ़ाई चिंता

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, औद्योगिक नगरी लुधियाना राज्य में स्वाइन फ्लू का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरा है। लुधियाना में 90 से अधिक पॉजिटिव मामले दर्ज किए गए हैं और यहां संक्रमण से 1 मरीज की मौत भी हो चुकी है। दूसरे स्थान पर पटियाला और मोहाली (साहिबजादा अजीत सिंह नगर) हैं, जहां 49-49 मामलों की पुष्टि हुई है। वहीं जालंधर में 21 मामलों के साथ 1 मौत दर्ज की गई है। इसके अलावा अमृतसर में 15, मोगा में 14, होशियारपुर में 13, रूपनगर (रोपड़) में 12, बठिंडा में 11, मलेरकोटला और संगरूर में 9-9, गुरदासपुर में 8, फिरोजपुर में 6, फरीदकोट व फतेहगढ़ साहिब में 5-5, कपूरथला, पठानकोट व तरनतारन में 4-4, बरनाला, फाजिल्का व श्री मुक्तसर साहिब में 2-2 तथा मानसा में 1 मामला दर्ज किया गया है।

क्या है स्वाइन फ्लू और कितना खतरनाक है H1N1 वायरस?

स्वाइन फ्लू मूल रूप से इन्फ्लूएंजा-ए (Influenza A) वायरस के विशिष्ट स्ट्रेन 'H1N1' के कारण होने वाला श्वसन संक्रमण (Respiratory Infection) है। हालांकि ऐतिहासिक रूप से यह वायरस सूअरों से जुड़ा था, लेकिन वर्तमान समय में यह पूरी तरह से इंसानों के बीच एक संक्रामक मौसमी फ्लू के रूप में तेजी से फैलता है। अधिकांश स्वस्थ व्यक्तियों में यह सामान्य सर्दी-जुकाम और सांस की हल्की बीमारी पैदा करता है, जिसे समय पर चिकित्सकीय देखभाल से ठीक किया जा सकता है। हालांकि, बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से अस्थमा, डायबिटीज या कमजोर इम्युनिटी वाले हाई-रिस्क मरीजों में यह गंभीर निमोनिया और श्वसन विफलता (Respiratory Failure) जैसी जानलेवा जटिलताएं पैदा कर सकता है।

कैसे फैलता है स्वाइन फ्लू का संक्रमण?

स्वाइन फ्लू अन्य मौसमी फ्लू वायरसों की तरह ही एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत तेजी से फैलता है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या जोर से बोलता है, तो हवा में सूक्ष्म रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स (सांस की बूंदें) फैल जाती हैं। जब कोई स्वस्थ व्यक्ति इन बूंदों के संपर्क में आता है, तो वह आसानी से संक्रमित हो जाता है। इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति वायरस से दूषित किसी सतह, दरवाजे के हैंडल या रेलिंग को छूने के बाद बिना हाथ धोए अपनी आंख, नाक या मुंह को छूता है, तो वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है। खराब वेंटिलेशन वाले बंद कमरों और अत्यधिक भीड़-भाड़ वाली जगहों पर इसका संचरण सबसे तेज होता है।

स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण: पहचानें और तुरंत डॉक्टर से मिलें

वायरस के संपर्क में आने के कुछ ही दिनों के भीतर मरीज में कई लक्षण उभरने लगते हैं। प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार या कंपकंपी महसूस होना, लगातार सूखी खांसी, गले में खराश और जलन, नाक बहना या बंद होना, असहनीय सिरदर्द, मांसपेशियों और पूरे शरीर में जकड़न व तेज दर्द, अत्यधिक थकान और कमजोरी शामिल हैं। इसके अलावा कुछ मरीजों, विशेषकर बच्चों में उल्टी और दस्त (पेट संबंधी विकार) की समस्या भी देखी जा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हर मरीज में सभी लक्षण एक साथ नहीं दिखते, इसलिए बुखार और सांस लेने में हल्की सी भी तकलीफ होने पर घरेलू नुस्खों के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच करानी चाहिए।