हरियाणा में फतह, अब पंजाब की बारी; जानें सतीश पूनिया के कंधों पर भाजपा ने क्यों रखी इतनी बड़ी जिम्मेदारी
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन में एक बड़ा और अहम बदलाव किया है। राजस्थान के वरिष्ठ नेता और हाल ही में राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किए गए सतीश पूनिया को अब पंजाब राज्य का चुनाव प्रभारी बनाया गया है।
17 अगस्त को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी संभालने के ठीक एक दिन बाद यानी 18 अगस्त को उन्हें यह नई कमान सौंपी गई है। उनके कंधों पर अब पंजाब की जटिल राजनीतिक जमीन पर पार्टी के संगठन को मजबूत करने और एक अचूक चुनावी रणनीति तैयार करने की बड़ी चुनौती होगी।
कौन हैं सतीश पूनिया? जानिए उनका राजनीतिक सफर
सतीश पूनिया मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं और उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की थी जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा और राजस्थान बीजेपी में कई महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों पर कार्य किया। साल 2018 में वह पहली बार आमेर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए और सितंबर 2019 में उन्हें राजस्थान बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने 2019 से 2023 तक पार्टी की कमान संभाली हालांकि 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें आमेर सीट से हार का सामना करना पड़ा था।
हरियाणा विधानसभा चुनाव में दिखा चुके हैं अपनी कार्यकुशलता
राजस्थान चुनावों के बाद पार्टी आलाकमान ने सतीश पूनिया की संगठनात्मक क्षमता पर भरोसा जताते हुए उन्हें पड़ोसी राज्य हरियाणा का चुनाव सह-प्रभारी/प्रभारी बनाया था। उनके नेतृत्व और सटीक रणनीति का ही नतीजा रहा कि 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए लगातार तीसरी बार अपनी सरकार बनाई। इसके बाद साल 2026 में उन्हें राजस्थान से राज्यसभा सांसद चुना गया और अब पार्टी ने उन्हें पंजाब जैसे सीमावर्ती और राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य की कमान सौंप दी है।
पंजाब में बीजेपी के लिए क्या है बड़ी चुनौती?
पंजाब की राजनीतिक परिस्थितियां देश के अन्य राज्यों से काफी अलग हैं। यहां बीजेपी के सामने अपने सांगठनिक ढांचे और जनआधार को मजबूत करने की बड़ी चुनौती है। हालांकि सतीश पूनिया के पास राजस्थान के लंबे सांगठनिक अनुभव और हरियाणा की चुनावी सफलता का हुनर है। अब राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर है कि वह अपने इस राजनीतिक अनुभव का इस्तेमाल पंजाब के अलग और अनूठे समीकरणों में किस प्रकार करते हैं और पार्टी को कितनी मजबूती दिला पाते हैं।