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जोधपुर डेंटल कॉलेज में मंचा भारी घमासान: 4 दिग्गज प्रोफेसरों ने ठुकराई सरकारी पोस्टिंग, जुगाड़ से रद्द कराए ट्रांसफर

राजस्थान के चिकित्सा शिक्षा विभाग और जयपुर से लेकर जोधपुर तक के प्रशासनिक गलियारों में इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा विवाद सामने आ रहा है। राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग (NDC) के कड़े नियमों और मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए जयपुर के चार वरिष्ठ प्रोफेसरों ने सरकारी डेंटल कॉलेज जोधपुर में अपनी प्रतिनियुक्ति (Deputation) संभालने से साफ इनकार कर दिया है। हालात इस कदर बेकाबू हो चुके हैं कि इन रसूखदार प्रोफेसरों ने अपने ऊंचे संपर्कों और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर महज कुछ ही घंटों के भीतर अपने ट्रांसफर और प्रतिनियुक्ति के सरकारी आदेशों को निरस्त करवा लिया। इस प्रशासनिक नाकामी के चलते जोधपुर सरकारी डेंटल कॉलेज की शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी यानी बीडीएस (BDS) की 50 सीटों की मान्यता और नवीनीकरण पर पूरी तरह से तलवार लटक गई है। लाइव हिन्दुस्तान की इस एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड विशेष प्रादेशिक और चिकित्सा शिक्षा इनसाइडर रिपोर्ट में डिजिटल डेस्क के साथ जानिए इस पूरे विवाद और सरकारी तंत्र की लाचारी की कड़वी हकीकत।

एनडीसी के निरीक्षण में खुली थी पोल, फैकल्टी से लेकर फायर सेफ्टी और सीसीटीवी तक सब नदारद

इस बड़े संकट की शुरुआत मई महीने में हुई थी, जब राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग (NDC) की एक हाई-लेवल निरीक्षण टीम ने जोधपुर के एकमात्र सरकारी डेंटल कॉलेज का औचक दौरा किया था। जांच के दौरान केंद्रीय टीम को कॉलेज में प्रोफेसरों और गैर-शिक्षण स्टाफ की भारी कमी के साथ-साथ कई चौंकाने वाली बुनियादी खामियां मिली थीं। कॉलेज प्रशासन पूरे एक साल का वक्त मिलने के बावजूद परिसर में फायर सेफ्टी एनओसी (Fire Safety) का इंतजाम नहीं कर पाया था, पूरे कैंपस में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगाए गए थे और छात्रों के प्रैक्टिकल के लिए जरूरी आधुनिक चिकित्सा उपकरण व जांच सुविधाएं भी गायब थीं। इन सभी गंभीर लापरवाहियों को आधार बनाकर एनडीसी ने कड़ा रुख अपनाते हुए आगामी सत्र के लिए कॉलेज की 50 बीडीएस सीटों के नवीनीकरण और नए एडमिशन की प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।

सरकार की सख्ती के बाद आरयूएचएस ने जारी किए आदेश, लेकिन रसूख के आगे झुका प्रशासन

सीटों पर आए इस संकट के बाद राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RUHS) और राज्य सरकार हरकत में आई। एनडीसी की शर्तों को आनन-फानन में पूरा करने के लिए आरयूएचएस डेंटल कॉलेज जयपुर की प्रिंसिपल डॉ. अंजली कपूर ने 11 जून को एक आपात आदेश जारी कर जयपुर के तीन बेहद सीनियर प्रोफेसरों को तुरंत प्रतिनियुक्ति पर जोधपुर ज्वाइन करने के निर्देश दिए। इस सूची में ओरल पैथोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. भरत सांखला, कन्जर्वेटिव डेंटिस्ट्री एवं एंडोडोन्टिक्स विभाग के प्रोफेसर डॉ. ललित कुमार लिख्यानी और प्रोस्थोडोन्टिक्स विभाग की प्रोफेसर डॉ. रजनी कल्ला का नाम शामिल था। लेकिन यहीं से असली प्रशासनिक ड्रामा और घमासान शुरू हुआ।

24 घंटे में बदले 4 नाम, चार आदेश जारी हुए पर नतीजा रहा सिफर

सरकारी आदेश जारी होने के महज कुछ ही घंटों के भीतर प्रोस्थोडोन्टिक्स विभाग की प्रोफेसर डॉ. रजनी कल्ला ने जोधपुर जाने के बजाय जयपुर में बैठे अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर अपना प्रतिनियुक्ति आदेश पूरी तरह रद्द करवा लिया। इसके बाद प्रशासन ने आनन-फानन में संशोधित आदेश जारी कर इसी विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद ताहिर को जोधपुर भेजने का फैसला किया, लेकिन उन्होंने भी ज्वाइन करने से मना कर दिया और उनका आदेश भी रद्दी की टोकरी में चला गया। अगले दिन 12 जून को तीसरा संशोधित आदेश जारी कर प्रोफेसर डॉ. नेहा गुप्ता को जोधपुर भेजा गया, लेकिन उन्होंने भी इस पोस्टिंग को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद प्रोफेसर पारूल सिंघल को भेजने की बैकडोर तैयारी हुई, मगर कड़े विरोध के आगे उनका आदेश भी फाइलों से बाहर नहीं निकल सका। इस तरह चार अलग-अलग बड़े प्रोफेसरों के नाम सामने आए, लेकिन सरकारी आदेशों पर उनका निजी रसूख भारी पड़ गया और कोई भी जोधपुर जाने को तैयार नहीं हुआ।

अब जूनियर असिस्टेंट प्रोफेसर के भरोसे एनडीसी को रिझाने की तैयारी, नियमों पर खड़े हुए बड़े सवाल

चार बार लगातार मुंह की खाने के बाद लाचार आरयूएचएस प्रशासन ने एक नया और बेहद विवादास्पद रास्ता निकाला है। वरिष्ठ प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर के स्थान पर अब पूरी तरह से नियमों को ताक पर रखकर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कमल कुमार मीणा को प्रतिनियुक्ति पर जोधपुर भेजने का नया आदेश जारी किया गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि एनडीसी के कड़े नियमों के अनुसार जिस अहम पद के लिए एक सीनियर प्रोफेसर की अनिवार्य आवश्यकता है, वहां एक जूनियर फैकल्टी को भेजना केवल एक कागजी खानापूर्ति है। अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि क्या इस तरह की कामचलाऊ और कागजी नियुक्तियों के सहारे एनडीसी की टीम को संतुष्ट किया जा सकेगा? क्या राजस्थान के एकमात्र सरकारी डेंटल कॉलेज की 50 बीडीएस सीटों को बचाया जा सकेगा या फिर रसूखदारों के इस खेल में सैकड़ों मेधावी छात्रों का भविष्य अंधकार में डूब जाएगा?

 

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