अडानी पावर प्लांट का एक और बड़ा फर्जीवाड़ा! बारां में 3200 मेगावाट विस्तार के लिए तैयार कर डाली फर्जी एनओसी (NOC); प्रशासनिक हलकों में मचा हड़कंप
राजस्थान के बारां जिले के कवाई स्थित अडानी पावर प्लांट (Adani Power Plant, Kawai) अपनी कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में आ गया है। ऊर्जा और औद्योगिक गलियारों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, अडानी समूह के इस प्लांट पर पावर प्रोजेक्ट के 3200 मेगावाट क्षमता विस्तार (Capacity Expansion) के लिए कथित तौर पर फर्जी एनओसी (Fake NOC) तैयार कर प्रशासनिक और पर्यावरणीय सहमति लेने का संगीन मामला सामने आया है। इस खुलासे के बाद से राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भारी हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा?
सूत्रों के अनुसार, कवाई पावर प्लांट की मौजूदा उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने के लिए केंद्रीय और राज्य स्तर पर पर्यावरण एवं प्रशासनिक मंजूरियों की प्रक्रिया चल रही थी। नियमों के तहत ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स के विस्तार के लिए स्थानीय निकायों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होता है।
लेकिन आरोप है कि तय प्रक्रियाओं को दरकिनार करने और तेजी से हरी झंडी पाने के लिए कथित तौर पर जाली दस्तावेजों और फर्जी एनओसी का सहारा लिया गया। जब मामले से जुड़े दस्तावेजों की आंतरिक और प्रशासनिक स्तर पर सूक्ष्म जांच (Scrutiny) की गई, तो कई मोर्चों पर अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर और संदिग्ध मोहरों का खेल बेनकाब हो गया। यह फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद से प्रोजेक्ट की वैधता पर बड़े सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
पर्यावरण और स्थानीय नियमों की अनदेखी का आरोप
स्थानीय संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि बारां जैसे कृषि प्रधान और संवेदनशील क्षेत्र में बिना उचित पर्यावरणीय आकलन और स्थानीय स्तर पर बिना वैध सहमति के इतनी बड़ी क्षमता (3200 मेगावाट) का विस्तार करना जन स्वास्थ्य और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ है। फर्जी एनओसी के जरिए प्रशासनिक तंत्र को गुमराह करने का यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।
विपक्ष और स्थानीय स्तर पर विरोध के सुर तेज होने के बाद अब यह मांग उठने लगी है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय न्यायिक या स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही, इस फर्जीवाड़े में संलिप्त अधिकारियों और प्लांट प्रबंधन के जिम्मेदार लोगों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। इस खुलासे के बाद अडानी पावर प्लांट प्रबंधन की मुश्किलें आने वाले दिनों में काफी बढ़ सकती हैं।