आधी रात को ट्रेन से उतरते ही पुलिस को देख भागने लगे तस्कर, बोरों की तलाशी लेते ही उड़ गए होश!
नशीले पदार्थों के खिलाफ चल रही कानूनी जंग में न्यायपालिका ने एक बार फिर समाज को मजबूत संदेश दिया है। लगभग चौदह साल पहले रेलवे स्टेशन पर सुरक्षाकर्मियों की मुस्तैदी से नाकाम की गई नशा तस्करी की एक बड़ी साजिश में अब जाकर अंतिम फैसला आ चुका है।
जोधपुर की विशेष एनडीपीएस अदालत के न्यायाधीश मुजफ्फर चौधरी ने अवैध मादक पदार्थों की बरामदगी के एक बेहद पुराने मामले की गहन सुनवाई करते हुए दो सप्लायर्स को सलाखों के पीछे भेजने का फरमान सुनाया है। अदालत ने दोनों ही अपराधियों की करतूतों को समाज के लिए बेहद घातक माना है।
जैसलमेर बीकानेर ट्रेन से फलोदी में उतरते ही दबोचे गए अपराधी
इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2012 के अक्टूबर महीने की एक रात को हुई थी। फलोदी रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर दो पर जीआरपी के जवान रोजमर्रा की तरह गश्त कर रहे थे। उसी दौरान जैसलमेर से चलकर बीकानेर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन आकर रुकी।
बोगियों से सवारियां उतर रही थीं तभी पुलिस टीम को दो ऐसे मुसाफिर दिखे जिनकी हरकतें सामान्य नहीं थीं। वे दोनों अपने हाथों में भारी प्लास्टिक के बोरे थामे हुए थे और पुलिस को सामने देखकर उल्टी दिशा में भागने का प्रयास करने लगे। शक गहराने पर जवानों ने घेराबंदी करके दोनों को धर दबोचा।
पंजाब और हनुमानगढ़ के तस्करों से भारी मात्रा में नशा बरामद
पकड़े गए संदिग्धों की जब मौके पर ही तलाशी ली गई तो उनके पास मौजूद बोरों से भारी मात्रा में डोडा चूरा बरामद हुआ। पुलिसिया जांच में सामने आया कि एक आरोपी बलदेव सिंह पंजाब के संगरूर जिले का रहने वाला है जिसके पास से साढ़े अड़तीस किलो नशा मिला। वहीं उसका दूसरा साथी जगसीर सिंह राजस्थान के ही हनुमानगढ़ जिले का निवासी निकला जिसके बैग से साढ़े अट्ठारह किलो डोडा पोस्त जब्त किया गया। जीआरपी ने तुरंत दोनों को हिरासत में लेकर एनडीपीएस कानून के तहत केस दर्ज किया और अदालत में चार्जशीट पेश की।
अदालत का कड़ा रुख और दोनों अपराधियों को कठोर सजा का ऐलान
अदालत के भीतर सरकारी वकील मनोहर लाल पालीवाल ने पुरजोर पैरवी करते हुए दलील दी कि युवाओं को खोखला करने वाले इस काले कारोबार के प्रति कोई भी नरमी नहीं दिखाई जानी चाहिए।
बचाव पक्ष ने कोर्ट से सजा में रियायत देने की गुहार लगाई लेकिन न्यायाधीश ने अपराध की गंभीरता और समाज पर पड़ने वाले इसके बुरे असर को देखते हुए सख्त रुख अपनाया। न्यायालय ने दोनों दोषियों को पांच-पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों पर पचास-पचास हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है जिसे न चुकाने पर उन्हें तीन महीने अतिरिक्त जेल में काटने होंगे।