जयपुर में बड़ा छात्र आंदोलन: 24 घंटे से पानी की टंकी पर डटे NSUI कार्यकर्ता, दी आमरण अनशन की बड़ी चेतावनी
राजस्थान की राजधानी जयपुर में छात्र राजनीति का पारा एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के कार्यकर्ता पिछले 24 घंटे से भी ज्यादा समय से पानी की टंकी पर चढ़कर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद छात्र नीचे उतरने को तैयार नहीं हैं। टंकी पर डटे छात्रों ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने जल्द ही उनकी मांगें नहीं मानीं, तो वे वहीं पर आमरण अनशन शुरू कर देंगे।
विश्वविद्यालय कैंपस में भारी तनाव, सुरक्षा बल मुस्तैद
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद जयपुर के संबंधित विश्वविद्यालय कैंपस और प्रदर्शन स्थल के आसपास का माहौल पूरी तरह से तनावपूर्ण बना हुआ है। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस के आला अधिकारी, नागरिक सुरक्षा (Civil Defense) की टीमें और दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर तैनात कर दी गई हैं। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए प्रशासन बेहद सतर्कता बरत रहा है। पुलिस अधिकारी लाउडस्पीकर के जरिए लगातार छात्रों से नीचे आने और शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करने की अपील कर रहे हैं।
किन मांगों को लेकर अड़े हैं छात्र, क्यों उपजा आक्रोश
टंकी पर चढ़े NSUI के छात्र नेताओं का कहना है कि वे लंबे समय से छात्र हितों से जुड़ी जायज मांगों को लेकर कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। छात्रों की मुख्य मांगों में परीक्षा परिणामों में विसंगतियों को दूर करना, हॉस्टल की बदहाल व्यवस्था में सुधार, कैंपस में सुरक्षा पुख्ता करना और छात्रसंघ चुनाव बहाल करने जैसी मांगें शामिल हैं। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन केवल आश्वासन देता है, धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
स्थानीय राजनीति गरमाई, बड़े नेताओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू
छात्रों के इस उग्र आंदोलन ने अब राजनीतिक रंग लेना भी शुरू कर दिया है। जयपुर के इस स्थानीय घटनाक्रम पर पूरे प्रदेश की राजनीतिक पार्टियों की नजरें टिक गई हैं। NSUI के इस प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए कई युवा नेता और छात्र संगठनों के पदाधिकारी मौके पर पहुंचने लगे हैं। सोशल मीडिया पर भी छात्रों के समर्थन में अभियान तेज हो गया है, जिससे स्थानीय प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन छात्रों को मनाने में कब तक कामयाब होता है।