मुख्यमंत्री के घर पर चलेगा बुलडोजर, विकास कार्य में बन रहा था रोड़ा
मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से दो बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। धर्मनगरी उज्जैन में आगामी सिंहस्थ 2028 के भव्य आयोजन को देखते हुए शहर के बुनियादी ढांचे को नया रूप दिया जा रहा है।
महाकाल की नगरी में जारी सड़क चौड़ीकरण अभियान की जद में खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का ऐतिहासिक पैतृक आवास और उनकी बहन कलावती यादव का मकान आ गया है, जिस पर आज प्रशासनिक हथौड़ा चलेगा। वहीं दूसरी ओर, राजधानी के भविष्य को संवारने वाली बहुप्रतीक्षित भोपाल विकास योजना-2047 के प्रारूप को भी आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक कर दिया गया है।
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 का मेगा प्लान: 270 मकानों की जद में सीएम का भी घर
उज्जैन में सिंहस्थ महापर्व 2028 के दौरान जुटने वाली करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ के सुगम आवागमन के लिए सड़कों को चौड़ा करने का काम युद्धस्तर पर जारी है। इसी कड़ी में शहर के अब्दालपुरा क्षेत्र में खजूर वाली मस्जिद से लेकर गणेश चौक तक सड़क चौड़ीकरण की बड़ी कार्रवाई की जा रही है। इस विकास कार्य के दायरे में पूरे मोहल्ले के करीब 270 मकान आ रहे हैं। निष्पक्ष प्रशासनिक कार्रवाई की मिसाल पेश करते हुए इस अभियान में वीआईपी या आम नागरिक का भेद किए बिना नियम अनुसार काम आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे इलाके के बाशिंदे भी विकास के हित में सहयोग की भावना से आगे आ रहे हैं।
बचपन की यादों और सियासी सफर से जुड़ा पैतृक मकान टूटेगा
सड़क चौड़ीकरण की तय सीमा के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पैतृक मकान का 2.90 मीटर हिस्सा तोड़ा जाएगा। इस मकान की नींव वर्ष 1974 में सीएम के दादा रामचंद्र यादव ने रखी थी, जहां डॉ. मोहन यादव का पूरा बचपन बीता। इसी घर की दहलीज से उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई थी, जब वे छात्र जीवन में कॉलेज के अध्यक्ष चुने गए थे। इसके अलावा उनके घर के ठीक सामने स्थित मनकामेश्वर महादेव मंदिर का भी 20 फीट से अधिक का हिस्सा सड़क सीमा में आने के कारण हटाया जाएगा। वहीं, उज्जैन नगर निगम की सभापति और सीएम की बहन कलावती यादव के इसी क्षेत्र स्थित आवास का 3.8 मीटर हिस्सा भी आज विकास कार्य के तहत तोड़ा जाएगा। स्थानीय पड़ोसियों ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि शहर के समग्र विकास के लिए ऐसे कड़े फैसले जरूरी होते हैं।
लंबे इंतजार के बाद भोपाल विकास योजना-2047 का ड्राफ्ट जारी
उज्जैन के इस बड़े कदम के साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजधानी भोपाल के लिए भी ऐतिहासिक घोषणा की है। गणेश अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर एक लंबे अंतराल के बाद भोपाल विकास योजना-2047 का प्रारूप प्रकाशित कर दिया गया है। सीएम ने सोशल मीडिया के जरिए साझा किया कि यह दूरदर्शी योजना भोपाल की अनमोल प्राकृतिक धरोहरों—बड़ा तालाब (भोजताल), समृद्ध वन संपदा और बाघ भ्रमण गलियारों (Tiger Movement Corridors)—के पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य शहरवासियों को उच्चस्तरीय नागरिक सुविधाएं, सुगम ट्रैफिक मोबिलिटी और आर्थिक तरक्की के नए द्वार उपलब्ध कराना है।
हरित TDR का नया फॉर्मूला और जनता से सुझाव आमंत्रित
प्रशासन द्वारा तैयार किए गए भोपाल के इस नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में 'हरित TDR' (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) का विशेष प्रावधान जोड़ा गया है। इसके जरिए हरित क्षेत्र (Green Belt) में आने वाली भूमियों के मूल स्वामियों को उचित क्षतिपूर्ति मिलेगी, जबकि विकासकर्ताओं को टीडीआर के माध्यम से अतिरिक्त निर्माण विकास की सुविधा प्राप्त होगी। यह कदम एक समृद्ध, सुगम और सतत विकसित भोपाल के निर्माण की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। शासन ने इस प्रकाशित ड्राफ्ट पर आम नागरिकों, पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों से उनकी आपत्तियां और रचनात्मक सुझाव आमंत्रित किए हैं, ताकि सभी पक्षों को सुनकर अंतिम मास्टर प्लान को अमलीजामा पहनाया जा सके।