चक्रवात कमजोर, फिर भी आफत जारी! इन 14 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

चक्रवात कमजोर, फिर भी आफत जारी! इन 14 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

चक्रवात 'अर्नब' के कमजोर पड़ने के बावजूद देश के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में इसका असर लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। जहां राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रिमझिम फुहारों ने लोगों को उमस भरी गर्मी से थोड़ी राहत दी है, वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में आसमानी आफत ने सामान्य जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रविवार को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सहित कुल 14 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट घोषित किया है।

उत्तर प्रदेश में 60 घंटे की बारिश से हाहाकार, 13 की मौत और 32 जिलों पर बाढ़ का साया

उत्तर प्रदेश इस मौसमी आफत का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है, जहां अधिकांश शहरों में पिछले 60 घंटों से लगातार बारिश का दौर जारी है। बारिश और हादसों की चपेट में आकर राज्यभर में अब तक कम से कम 13 लोगों की असमय मौत हो चुकी है, जबकि 32 जिलों में नदियां खतरे के निशान के पास पहुंचने से बाढ़ का हाई अलर्ट है। सूबे के 63 जिलों में तेज वर्षा दर्ज की गई है और 20 से ज्यादा जिलों में अब भी भारी बारिश की चेतावनी बरकरार है, हालांकि अगले 24 घंटों में मौसमी दबाव घटने की उम्मीद है। राजधानी लखनऊ के ऐतिहासिक हुसैनाबाद इलाके में लगातार भीगने से एक पुराने ऐतिहासिक गेट का हिस्सा भरभराकर गिर गया, गनीमत रही कि उस वक्त चहल-पहल कम होने से बड़ा हादसा टल गया। वहीं लखनऊ के केकेसी और बरेली के बारादरी मॉडल टाउन में विशालकाय पेड़ गिरने से वाहन क्षतिग्रस्त हुए, जिसका खौफनाक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है।

शासन स्तर पर एक्शन: नेपाल सीमा पर कड़ी निगरानी और एक्सप्रेसवे पर जलभराव पर सियासत

हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेषकर नेपाल की सीमा से सटे तराई वाले जिलों में राहत व बचाव टीमों को चौबीसों घंटे मुस्तैद रहने का सख्त निर्देश दिया है। सभी जिलाधिकारियों को प्रभावित इलाकों में खुद उतरकर त्वरित मदद पहुंचाने के आदेश दिए गए हैं, जिसके तहत लखनऊ में डीएम और नगर आयुक्त ने जलभराव वाले मोहल्लों का स्थलीय निरीक्षण किया। दूसरी ओर, कानपुर की गलियों से लेकर गोरखपुर की प्रमुख सड़कों और बाजारों तक पानी भरने से नगर निकायों के दावों की कलई खुल गई है। गोरखपुर में सांसद रवि किशन ने बाढ़ग्रस्त इलाकों में जाकर पीड़ितों को ढांढस बंधाया। वहीं उन्नाव के पास गंगा एक्सप्रेसवे के टोल गेट पर तीन फीट तक पानी जमा हो गया और बशीरतगंज में वाहनों के पहिए थम गए। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने जलमग्न गंगा एक्सप्रेसवे की तस्वीरें साझा कर बुनियादी ढांचे की स्थिति पर सरकार को घेरा।

बिहार में गंडक बेसिन को लेकर हाई अलर्ट, 17 संवेदनशील जिलों में अफसरों की बैठक

पड़ोसी राज्य बिहार पर भी चक्रवाती असर के चलते बाढ़ का गंभीर संकट गहराने लगा है। नेपाल के तराई क्षेत्रों और गंडक नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में भीषण वर्षा की चेतावनी के बाद राज्य सरकार ने विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। विकास आयुक्त प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में 17 संवेदनशील जिलों के जिलाधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ा गया। सरकार ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टुकड़ियों को संवेदनशील तटबंधों के पास पूरी मुस्तैदी से तैनात कर दिया है।

छत्तीसगढ़ में नदियां उफान पर, रायपुर से बस्तर तक जनजीवन बेहाल

छत्तीसगढ़ में बीते पांच दिनों से जारी अनवरत बारिश ने नदी-नालों को रौद्र रूप दे दिया है। राजधानी रायपुर में खारून नदी का जलस्तर खतरे के स्तर को पार कर चुका है, जिससे आसपास के निचले रिहायशी इलाके जलमग्न हो गए हैं और रायपुर-जगदलपुर नेशनल हाईवे पर पानी भरने से आवागमन बाधित हुआ है। बस्तर संभाग में इंद्रावती नदी पूरे वेग के साथ बह रही है, जिसके चलते दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया है। निचले इलाकों में फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने के लिए एनडीआरएफ की नावें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।

पूर्वोत्तर में सिक्किम भूस्खलन से प्रभावित, पहाड़ों पर बर्फबारी के चलते चारधाम यात्रा स्थगित

पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम में बादल फटने के बाद मची तबाही से निपटने के लिए राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। पश्चिमी सिक्किम के रिम्बी इलाके में जमा विशाल मलबे और कीचड़ को हटाने में मशीनें लगी हैं, जहां करीब 36 से 37 परिवारों के आशियाने छिन चुके हैं। दूसरी ओर, मैदानी इलाकों में बारिश के समानांतर हिमालयी चोटियों पर मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। उत्तराखंड के चमोली, केदारनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की ऊंची पहाड़ियों पर ताजा हिमपात होने से कड़ाके की ठंड लौट आई है। सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा को आगामी दो दिनों के लिए अस्थायी रूप से रोक दिया है। उधर हिमाचल प्रदेश के किन्नौर स्थित चितकुल-कुनोचरंग घाटी में सीजन की पहली बर्फबारी दर्ज की गई है, जिससे सेब की तैयार फसलों को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।