जयपुर में पार्षद की कुर्सी के लिए बवाल, 150 वार्डों में टिकट पाने को 2500 से ज्यादा दावेदार
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव को लेकर जयपुर में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मतदान की तारीख नजदीक आते ही पार्षद बनने की तैयारी कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं ने टिकट के लिए जोर लगाना शुरू कर दिया है। चुनाव कार्यक्रम के तहत जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में 11 सितंबर 2026 को मतदान होगा। नतीजे 14 सितंबर को सामने आएंगे।
चुनाव की तारीख से पहले ही राजनीतिक दलों के कार्यालयों में टिकट मांगने वालों की भीड़ बढ़ गई है। भाजपा में दावेदारों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है। पार्टी के सामने 150 वार्डों के लिए 2500 से ज्यादा आवेदन आए हैं। टिकट हासिल करने के लिए कई दावेदार वरिष्ठ नेताओं से संपर्क साध रहे हैं।
महिलाओं की दावेदारी ने बढ़ाई टिकट की चुनौती
भाजपा जयपुर शहर अध्यक्ष अमित गोयल के अनुसार पार्टी को मिले आवेदनों में लगभग 1000 बायोडाटा महिलाओं के हैं। खास बात यह है कि महिला दावेदार केवल आरक्षित वार्डों तक सीमित नहीं हैं। बड़ी संख्या में महिलाओं ने सामान्य श्रेणी के वार्डों से भी चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है।
जयपुर में इस बार कुल 150 वार्डों में से 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद टिकट को लेकर दावेदारों की गतिविधियां और तेज हो गई हैं। ऐसे में पार्टी के सामने महिला और पुरुष दावेदारों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी रहेगी।
पार्षद की कुर्सी बनी सियासी सीढ़ी
स्थानीय निकाय की राजनीति में पार्षद का पद कई नेताओं के लिए आगे की राजनीति का आधार माना जाता है। यही वजह है कि टिकट को लेकर छोटे-बड़े नेताओं के बीच जोर आजमाइश शुरू हो चुकी है।
कई दावेदार अपने क्षेत्र में लंबे समय से सक्रियता दिखा रहे हैं। वहीं कुछ लोग संगठन में अपनी पकड़ और वरिष्ठ नेताओं से करीबी के आधार पर टिकट की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जयपुर के वार्डों में स्थानीय समीकरण भी उम्मीदवार तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
2500 से ज्यादा दावेदारों में किसका नंबर आएगा?
भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2500 से ज्यादा दावेदारों में से 150 उम्मीदवार चुनने की है। केवल आवेदन या बायोडाटा के आधार पर फैसला होना मुश्किल है। पार्टी को स्थानीय समीकरणों के साथ प्रत्याशी की क्षेत्र में पकड़ और चुनाव जीतने की संभावना को भी देखना होगा।
टिकट वितरण के दौरान जातीय समीकरण और वार्ड स्तर की राजनीतिक स्थिति भी महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में जयपुर की राजनीति में गतिविधियां और बढ़ने की संभावना है।