नई कार खरीदने का सपना कैसे बना एक अधिकारी के लिए सिरदर्द और मानसिक परेशानी का सबब

नई कार खरीदने का सपना कैसे बना एक अधिकारी के लिए सिरदर्द और मानसिक परेशानी का सबब

जब कोई व्यक्ति अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई जोड़कर अपने परिवार के लिए एक नई चमचमाती कार खरीदता है, तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता है और वह इसे अपने जीवन की एक बड़ी उपलब्धि मानता है। लेकिन जरा सोचिए कि अगर वही नई नवेली कार शोरूम से निकलते ही बार-बार खराब होने लगे, हाईवे पर बीच रास्ते में धोखा दे दे और सर्विस सेंटर के चक्कर काटते-काटते इंसान का मानसिक संतुलन बिगड़ने लगे, तो उसकी क्या हालत होगी? कुछ ऐसा ही दिल दहला देने वाला और हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहाँ एक सरकारी अधिकारी ने टाटा कंपनी की एक नई कार खरीदी थी जो कुछ ही दिनों के भीतर जी का जंजाल बन गई। गाड़ी में लगातार आ रही गंभीर तकनीकी और इंजन संबंधी खराबी के कारण अधिकारी और उनका पूरा परिवार తీవ్ర मानसिक तनाव से गुजर रहा था, क्योंकि कंपनी और डीलरशिप के चक्कर काटने के बावजूद उनकी समस्या का कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकल पा रहा था। बार-बार वर्कशॉप में गाड़ी खड़े रहने और शोरूम के कर्मचारियों के टालमटोल रवैया से आजिज़ आकर आखिरकार उस अधिकारी ने एक ऐसा अनोखा और कड़ा कदम उठाने का फैसला किया जिसने पूरे शहर में सनसनी फैला दी।

गाड़ी के शीशे पर लिखवाया '12 लाख का गधा' और सीधे पहुंच गया टाटा के मुख्य शोरूम

अपनी परेशानी को अनोखे और देशव्यापी चर्चा का विषय बनाने के लिए उस अधिकारी ने विरोध का एक ऐसा नायाब तरीका निकाला जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया। उन्होंने अपनी उस नई और महंगी कार के मुख्य शीशों और बॉडी पर बड़े-बड़े अक्षरों में पेंट से यह लिखवा दिया कि '12 लाख का गधा' और साथ ही कंपनी की लापरवाही का पूरा ब्योरा भी चस्पा कर दिया। इसके बाद वे उसी गाड़ी को लेकर सीधे उस अधिकृत टाटा शोरूम के मुख्य द्वार पर जा पहुंचे जहां से उन्होंने कुछ समय पहले ही इस वाहन को खरीदा था। जैसे ही इस अनोखे स्लोगन लिखी हुई गाड़ी को शोरूम के बाहर खड़ा किया गया, वहां से गुजरने वाले राहगीरों, अन्य ग्राहकों और मीडियाकर्मियों की भारी भीड़ जमा हो गई। लोग उस गाड़ी पर लिखे शब्दों को पढ़कर हैरान थे और इस बात की चर्चा करने लगे कि कैसे एक बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी अपने ग्राहकों को खराब उत्पाद बेचकर उनकी गाढ़ी कमाई को पानी में मिला रही है। इस प्रकार के सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन से डीलरशिप और शोरूम प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए क्योंकि वहां मौजूद लोग वीडियो बनाने लगे और सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल होने लगा।

दोपहर तक कंपनी पर बना भारी दबाव, अधिकारियों को आखिरकार लौटाने पड़े पूरे पैसे

शोरूम के बाहर मचे इस हंगामे और गिरती साख को बचाने के लिए टाटा डीलरशिप के प्रबंधन और वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत अपनी चुप्पी तोड़नी पड़ी। शुरुआत में जो कर्मचारी ग्राहक की शिकायत सुनने को तैयार नहीं थे और उन्हें तकनीकी मामलों का हवाला देकर टाल रहे थे, वे अब हाथ जोड़े अधिकारी के सामने खड़े नजर आए। जब डीलरशिप के मैनेजर ने देखा कि इस सार्वजनिक विरोध से उनकी कंपनी की ब्रांड वैल्यू और भविष्य की बिक्री पर बहुत बड़ा बट्टा लग रहा है, तो उन्होंने बिना और देर किए मामले को रफा-दफा करने का फैसला किया। दोपहर ढलते-ढलते टाटा शोरूम के प्रबंधन को अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी और लिखित समझौते के तहत ग्राहक द्वारा गाड़ी की खरीद में दिए गए पूरे पैसे (करीब 12 लाख रुपये) ब्याज सहित वापस करने पड़े। अधिकारी ने अपनी गाड़ी शोरूम के सुपुर्द कर दी और अपना पूरा पैसा वापस लेकर यह साबित कर दिया कि अगर ग्राहक जागरूक हो और अपने अधिकारों के प्रति अडिग रहे, तो बड़ी से बड़ी कंपनियों को भी झुकना ही पड़ता है।

ऑटोमोबाइल सेक्टर और ग्राहकों के लिए एक बड़ा सबक: जानिए उपभोक्ता अधिकार

यह घटना आज के समय में देश भर के सभी कार खरीदारों और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए एक बहुत बड़ा सबक बनकर सामने आई है कि किसी भी ग्राहक को कमजोर नहीं समझा जाना चाहिए। कई बार कंपनियां या डीलर खराब गाड़ियां या पुराना स्टॉक ग्राहकों को थमा देते हैं और बाद में सर्विस के नाम पर उन्हें परेशान करते रहते हैं, जिससे आम आदमी मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से पिस जाता है। उपभोक्ता संरक्षण कानून (Consumer Protection Act) के तहत हर खरीदार को यह पूरा अधिकार है कि यदि उसे कोई डिफेक्टिव उत्पाद मिलता है, तो वह उसके बदले रिप्लेसमेंट या पूरे पैसे रिफंड की मांग कर सकता है। इस अधिकारी की यह साहसिक लड़ाई इस बात का प्रतीक है कि अन्याय के खिलाफ चुप बैठने के बजाय यदि सही तरीके से आवाज उठाई जाए, तो न्याय जरूर मिलता है। इस पूरी घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर कार डीलरों और सर्विस सेंटर्स में हड़कंप मचा हुआ है और वे अब अपने ग्राहकों की शिकायतों को लेकर पहले से कहीं अधिक सतर्क और गंभीर नजर आ रहे हैं ताकि किसी अन्य गाड़ी पर ऐसा कोई अपमानजनक स्लोगन लिखने की नौबत न आए।