तिहाड़ में लॉरेंस, फिर भी बाहर चलता रहा नेटवर्क! पूर्व विधायक की हत्या की साजिश का खुलासा
तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे बंद होने के बावजूद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के सिंडिकेट का खौफनाक नेटवर्क बाहर बदस्तूर जारी है। राजस्थान पुलिस की स्पेशल एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) के हत्थे चढ़े लॉरेंस गैंग के दो खतरनाक शूटर्स ने पूछताछ में रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे किए हैं।
जांच में सामने आया है कि गैंग ने राजस्थान के कद्दावर कांग्रेस नेता और सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा के साथ-साथ एक बड़े स्थानीय व्यापारी संजय शर्मा की सुनियोजित हत्या का टारगेट तय किया था। वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद दोनों शूटर्स को फर्जी दस्तावेजों के सहारे सीधे दुबई और कनाडा सुरक्षित भगाने की पूरी तैयारी की जा चुकी थी, ताकि वे भारतीय जांच एजेंसियों की पहुंच से हमेशा के लिए दूर हो जाएं; हालांकि टास्क फोर्स की मुस्तैदी ने इस अंतरराष्ट्रीय साजिश को वक्त रहते नाकाम कर दिया।
आरजू बिश्नोई संभाल रहा है बाहर की कमान, फंडिंग से लेकर हथियारों तक का नेटवर्क
खुफिया सूत्रों और जांच में यह बात पुख्ता हुई है कि लॉरेंस के जेल में होने के दौरान बाहर गैंग का पूरा ऑपरेशन आरजू बिश्नोई नाम का गुर्गा संचालित कर रहा है। आरजू ही नए टारगेट्स तय करने, जमीनी स्तर पर रैकी कराने, अवैध असलहे पहुंचाने और नेटवर्क के तमाम गुर्गों तक नकदी पहुंचाने का मुख्य काम करता है। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा के फार्म हाउस की कई दिनों तक लगातार रैकी करने वाले आरोपी साहिल को भी आरजू बिश्नोई ने ही ढाई लाख रुपये की नकद रकम हवाला और गुप्त माध्यमों से भेजी थी।
नेपाल से बुलाए गए थे शूटर, फरारी काटने के लिए हर महीने मिलते थे 1.5 लाख
टास्क फोर्स की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि वारदात को अंजाम देने के लिए जिन पेशेवर शूटर्स को तैयार किया गया था, उन्हें बाकायदा नेपाल के सुरक्षित ठिकानों से राजस्थान बुलाया गया था। पकड़े गए शूटर जसकरण सिंह और राजिंदर सिंह को जोधपुर से दबोचा गया।
इन दोनों को आश्वस्त किया गया था कि हत्या के बाद उन्हें विदेशों में ऐशो-आराम की जिंदगी दी जाएगी, जबकि फरारी और छिपने के दौरान इनके रहने-खाने के लिए हर महीने डेढ़ लाख रुपये की तय रकम दी जा रही थी। गैंग ने अपने ऑपरेशन को बेहद गोपनीय रखने के लिए हथियार सप्लायर्स, रैकी करने वाले लोकल मुखबिरों और अंतिम समय पर ट्रिगर दबाने वाले शूटर्स के अलग-अलग मॉडयूल बना रखे थे।
पाली-सिरोही हाईवे पर झाड़ियों से दो विदेशी पिस्टल और 36 जिंदा कारतूस बरामद
गिरफ्तार शूटर्स की निशानदेही पर राजस्थान एजीटीएफ ने व्यापक तलाशी अभियान चलाकर पाली के सिरोही रोड स्थित नेशनल हाईवे के किनारे घनी झाड़ियों में छिपाकर रखी गई भारी खेप बरामद की है। पुलिस ने मौके से दो अत्याधुनिक विदेशी ऑटोमैटिक पिस्टल और 36 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। हथियारों की यह खेप वारदात को अंजाम देने के लिए हाल ही में इन शूटर्स तक पहुंचाई गई थी।
रंगदारी और खौफ का सिंडिकेट: बड़े नेताओं की हत्या कर वर्चस्व कायम करने की होड़
लॉरेंस बिश्नोई गैंग की कार्यशैली का मुख्य जरिया बड़े उद्योगपतियों, बिल्डरों और कारोबारियों से करोड़ों रुपये की रंगदारी वसूलना रहा है। रुपये न मिलने पर कारोबारी प्रतिष्ठानों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दहशत फैलाई जाती है और विरोध करने पर जानलेवा हमले किए जाते हैं। सिरोही में भी व्यापारी संजय शर्मा को करोड़ों की रंगदारी न देने पर निशाना बनाया जाना था। इसके साथ ही राजस्थान के बड़े राजनेताओं को निशाना बनाकर गैंग पूरे प्रदेश में अपना एकतरफा खौफ और राजनीतिक-अपराधिक वर्चस्व कायम करना चाहती थी। फिलहाल पुलिस गैंग के अन्य मददगारों और आरजू बिश्नोई के संपर्कों को खंगालने में जुटी है।