राजस्थान निकाय चुनाव के बीच बड़ा सियासी ड्रामा: पति और बच्चों समेत रहस्यमय तरीके से लापता हुई बीजेपी प्रत्याशी
देश के किसी भी हिस्से में जब स्थानीय निकाय या पंचायत चुनाव का बिगुल बजता है, तो राजनीतिक दलों से लेकर मैदान में उतरे प्रत्याशियों के बीच जीत हासिल करने के लिए दिन-रात एक करने की होड़ सी मच जाती है। लेकिन राजस्थान के चुनावी गलियारों से इस समय एक ऐसी हैरान करने वाली, सनसनीखेज और चिंताजनक खबर सामने आई है, जिसने न केवल स्थानीय पुलिस प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के संगठन से लेकर आम मतदाताओं तक में हड़कंप मचा दिया है। राज्य में चल रहे निकाय चुनावों के बीच बीजेपी की टिकट पर चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रही एक महिला प्रत्याशी अचानक अपने पति और मासूम बच्चों के साथ अपने घर से इस तरह रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गई है कि पिछले तीन दिनों से उनका दूर-दूर तक कोई अता-पता नहीं चल रहा है। चुनाव के ठीक मुहाने पर खड़े होकर एक मुख्य राजनीतिक दल के प्रत्याशी का इस प्रकार अचानक गायब हो जाना केवल एक साधारण गुमशुदगी का मामला नहीं लग रहा है, बल्कि इसके पीछे किसी गहरी राजनीतिक साजिश, अपहरण या किसी अप्रिय घटना की आशंका जताई जा रही है। पुलिस विभाग की कई विशेष टीमें लापता प्रत्याशी और उनके परिवार की तलाश में जुटी हुई हैं, लेकिन तीन दिन बीत जाने के बाद भी हाथ कोई ठोस सुराग न लगने के कारण यह मामला पूरे राज्य में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन चुका है।
चुनावी सरगर्मी के बीच अचानक गायब होने की पूरी घटना और परिवार के मोबाइल फोन बंद आने का रहस्य
राजस्थान के इस संबंधित निकाय क्षेत्र में इन दिनों चुनावी पारा अपने चरम पर था, और हर गली-मोहल्ले में जनसंपर्क अभियान तथा बैठकों का दौर जोरों पर चल रहा था। गायब हुई बीजेपी प्रत्याशी ने भी अपने चुनाव प्रचार की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली थी और वे मतदाताओं के बीच लगातार सक्रिय बनी हुई थीं, तभी अचानक एक दिन उनका पूरा परिवार संदिग्ध परिस्थितियों में नजरों से ओझल हो गया। पहले तो स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं को यह लगा कि वे किसी गुप्त चुनावी रणनीति के तहत या किसी दूरदराज के इलाके में प्रचार के सिलसिले में गए होंगे, लेकिन जब लगातार कई घंटों तक उनका कोई संपर्क नहीं हुआ और उनके तथा उनके पति के मोबाइल फोन पूरी तरह से स्विच ऑफ आने लगे, तो परिजनों की चिंताएं सातवें आसमान पर पहुंच गईं। घर के मुख्य दरवाजे पर ताला लटका देखकर और आस-पड़ोस के लोगों से पूछताछ करने पर जब यह पुख्ता हो गया कि वे किसी को बिना बताए कहीं चले गए हैं या उन्हें जबरन ले जाया गया है, तो तुरंत इसकी औपचारिक सूचना स्थानीय पुलिस थाने को दी गई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत गुमशुदगी का मामला दर्ज किया और उनके संभावित ठिकानों पर दबिश देना शुरू कर दिया, लेकिन अभी तक इस हाई-प्रोफाइल लापता होने के रहस्य से पर्दा नहीं उठ पाया है।
राजनीतिक साजिश का अंदेशा या व्यक्तिगत कारणों से दूरी, विरोधी दलों पर उठ रहे गंभीर सवाल
चुनावी राजनीति के इस दौर में जब हार-जीत के लिए हर हथकंडा अपनाया जाता है, तब बीजेपी प्रत्याशी के इस प्रकार अचानक गायब होने के बाद राजनीतिक गलियारों में कयासों और चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। पार्टी के स्थानीय नेताओं और समर्थकों का मानना है कि चूंकि वे चुनाव में काफी मजबूत स्थिति में थीं और उनके जीतने की प्रबल संभावनाएं जताई जा रही थीं, इसलिए हो सकता है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता या किसी विपक्षी साजिश के तहत उन्हें डराने-धमकाने के लिए اغوا (अपहरण) किया गया हो। वहीं दूसरी ओर, पुलिस हर उस पहलू से इस मामले की जांच कर रही है जिसमें पारिवारिक विवाद, वित्तीय लेन-देन या किसी निजी कारण से खुद स्वेच्छा से कहीं चले जाने की संभावना शामिल हो सकती है। इस घटना के सामने आने के बाद से ही चुनावी मैदान में सन्नाटा सा पसर गया है और विपक्षी दल भी इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं कि आखिर चुनाव जैसे संवेदनशील समय में पुलिस सुरक्षा और खुफिया तंत्र इतनी बड़ी लापरवाही कैसे बरत सकता है। प्रत्याशी के गायब होने से उनके समर्थकों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे लगातार पुलिस प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं कि जल्द से जल्द इस रहस्य से पर्दा उठाया जाए और परिवार को सकुशल बरामद किया जाए।
पुलिस की ताबड़तोड़ तलाश और सर्विलांस टीमों का शिकंजा, क्या जल्द सुलझ पाएगा यह अनसुलझा रहस्य
इस हाई-प्रोफाइल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक ने कई थानों की पुलिस और एसओजी (SOG) की टीमों को इस खोजबीन अभियान में झोंक दिया है, जो लगातार तकनीकी सर्विलांस की मदद ले रही हैं। पुलिस लापता प्रत्याशी और उनके पति के अंतिम लोकेशन, उनके मोबाइल टावर डंप डेटा और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगालने में जुटी हुई है ताकि यह पता चल सके कि वे अपनी मर्जी से गाड़ी से कहीं गए थे या उन्हें किसी ने जबरन रास्ते में रोका था। जैसे-जैसे दिन बीतते जा रहे हैं, वैसे-वैसे इस अनसुलझे रहस्य को लेकर लोगों की धड़कनें बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि चुनाव की तारीखें बेहद नजदीक आ चुकी हैं और ऐसे में एक प्रत्याशी का यूं गायब हो जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी एक बड़ा सवालिया निशान है। राज्य के गृह विभाग और पुलिस के उच्च अधिकारी इस मामले की पल-पल की अपडेट ले रहे हैं, और उम्मीद जताई जा रही है कि पुलिस जल्द ही इस सनसनीखेज रहस्य का पर्दाफाश करते हुए सच को सामने ले आएगी ताकि यह साफ हो सके कि इसके पीछे कोई राजनीतिक साजिश थी या कोई अन्य निजी कारण।