एक पार्टी और चार फाड़! क्या राजस्थान में बिखराव के साये में दम तोड़ रही है कांग्रेस की वापसी की उम्मीद
राजस्थान कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। पार्टी प्रदेश में चार प्रमुख खेमों में बंटी दिखाई दे रही है। इनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट के समर्थक गुट शामिल हैं। लंबे समय से चल रही नेताओं की आपसी खींचतान अब सार्वजनिक बयानबाजी तक पहुंच गई है।
डोटासरा का तीखा तंज
विवाद तब बढ़ गया जब अशोक गहलोत ने प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा से चर्चा किए बिना भारत आदिवासी पार्टी (बाप) के करीब 300 कार्यकर्ताओं को कांग्रेस में शामिल कर लिया। जयपुर स्थित गहलोत के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मंत्री महेंद्र मालवीय के नेतृत्व में बाप कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ली।
इस कदम से नाराज डोटासरा ने बिना नाम लिए गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग पार्टी की बजाय अपनी ब्रांडिंग करते हैं, जबकि उनका लक्ष्य कांग्रेस की ब्रांडिंग करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यक्तिवाद की राजनीति से पार्टी को नुकसान हुआ है।
डोटासरा ने यह भी कहा कि महेंद्र मालवीय पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चले गए थे और उनकी वापसी उनकी अनुशंसा के बाद ही संभव हुई। सूत्रों के अनुसार, डोटासरा ने इस मामले की शिकायत कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा से भी की है।
डोटासरा के बयान के बाद गहलोत समर्थक नेता उनके बचाव में उतर आए। कांग्रेस नेताओं धर्मेंद्र राठौड़ और दिनेश खोड़निया ने कहा कि अशोक गहलोत हमेशा पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करते हैं और उनके फैसलों को पार्टी हित में देखा जाना चाहिए।
इस बीच अशोक गहलोत ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की वापसी का दावा किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में भाजपा सरकार के कामकाज को लेकर जनता में चर्चा हो रही है और कांग्रेस फिर सत्ता में आ सकती है। उन्होंने पेपर लीक जैसी समस्याओं पर भी सरकार को घेरा और कहा कि यदि व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं हो सकती हैं। नकल रोकने के लिए संसद में पारित कानून पर उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों से सलाह लेकर कदम उठाए जाते तो बेहतर होता।
राजस्थान कांग्रेस में बढ़ती खींचतान आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की एकजुटता के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है। गहलोत, पायलट और प्रदेश संगठन के बीच संतुलन बनाना कांग्रेस नेतृत्व के लिए अहम मुद्दा बना हुआ है।