कागजात नहीं दिखाने पर पुलिस ने जब्त की कार, 3 माह के मासूम संग परिवार को सड़क पर छोड़ने का आरोप
उत्तर प्रदेश में ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने और संदिग्ध वाहनों की चेकिंग के लिए चलाए जा रहे अभियान के बीच प्रयागराज (Prayagraj) से पुलिस की घोर संवेदनहीनता और अमानवीय व्यवहार का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक चेकिंग प्वॉइंट पर कार के कागजात (Documents) तुरंत न दिखा पाने पर पुलिसकर्मियों ने न सिर्फ गाड़ी को जब्त (Seize) कर लिया, बल्कि कार में सवार 3 महीने के मासूम बच्चे, उसकी मां और पूरे परिवार को बीच सड़क पर ही उतार दिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि कड़कड़ाती धूप और हाईवे जैसी सुनसान जगह पर मिन्नतें करने के बावजूद पुलिस का दिल नहीं पघला और उन्हें लाचार हालत में सड़क पर छोड़ दिया गया।
इस घटना का वीडियो और पीड़ित परिवार का दर्द सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन की चौतरफा किरकिरी हो रही है और आला अधिकारियों ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
चेकिंग के दौरान शुरू हुआ विवाद, डिजिटल लॉकर भी नहीं माना
जानकारी के अनुसार, पीड़ित परिवार अपनी निजी कार से किसी पारिवारिक काम से प्रयागराज के एक मुख्य हाईवे से गुजर रहा था। रास्ते में पुलिस और ट्रैफिक पुलिस की संयुक्त टीम वाहनों की सघन चेकिंग कर रही थी।
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तुरंत कागजात न होने पर एक्शन: पुलिस ने जब इस कार को रोका, तो चालक (कार मालिक) मौके पर तुरंत फिजिकल कागजात (आरसी और इंश्योरेंस) पेश नहीं कर पाया। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने मोबाइल में डिजीलॉकर (DigiLocker) के जरिए दस्तावेज दिखाने की कोशिश की, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उसे मानने से इनकार कर दिया और चालान काटने के बजाय सीधे गाड़ी को क्रेन से खींचकर जब्त करने की जिद पर अड़ गए।
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मासूम बच्चे की भी नहीं की परवाह: कार में एक महिला और उसका महज 3 महीने का दुधमुंहा बच्चा भी सवार था। परिवार ने पुलिसकर्मियों से गुहार लगाई कि बच्चा छोटा है, उसे धूप और हाईवे पर गाड़ी से न उतारा जाए और उन्हें नजदीकी पुलिस स्टेशन या गंतव्य तक जाने दिया जाए, लेकिन आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने बेहद अभद्र व्यवहार करते हुए उन्हें जबरन गाड़ी से नीचे उतार दिया।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, लोगों का फूटा गुस्सा
हाईवे के किनारे 3 महीने के बच्चे को गोद में लेकर खड़ी बेबस मां और पुलिस की इस तानाशाही का वीडियो वहां मौजूद किसी राहगीर ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। देखते ही देखते यह वीडियो वायरल हो गया और यूजर्स यूपी पुलिस को टैग कर तीखे सवाल पूछने लगे:
यूजर्स का आक्रोश: लोगों का कहना है कि नियम तोड़ना या कागजात न होना एक प्रशासनिक चूक हो सकती है, जिसके लिए कानूनन केवल आर्थिक जुर्माना (Fine) या चालान का प्रावधान है। लेकिन एक नवजात शिशु और महिला को सुरक्षा के लिहाज से इस तरह बीच सड़क पर लावारिस छोड़ देना सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन और पुलिसिया बर्बरता है।
उच्च अधिकारियों ने लिया संज्ञान, जांच शुरू
मामले के तूल पकड़ते ही प्रयागराज के पुलिस कमिश्नरेट में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि वाहन चेकिंग नियमों के तहत की जा रही थी और गाड़ी के कागजात संदिग्ध थे। हालांकि, परिवार के साथ किए गए कथित दुर्व्यवहार और संवेदनहीनता के आरोपों को गंभीरता से लिया गया है।
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जांच के आदेश: संबंधित क्षेत्राधिकारी (CO) को इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच सौंप दी गई है। यह पता लगाया जा रहा है कि मौके पर तैनात किस पुलिसकर्मी ने नियमों से परे जाकर अमानवीय व्यवहार किया। अधिकारियों का दावा है कि यदि पुलिसकर्मी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय निलंबन (Suspension) की सख्त कार्रवाई की जाएगी।