राजस्थान पंचायत चुनाव: BJP से किसे मिलेगा टिकट, CM भजनलाल समेत दिग्गजों ने संभाला मोर्चा
राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में इस वक्त आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर पहुँच चुकी है। राज्य में ग्रामीण सरकार यानी जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनावों को फतह करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। टिकट वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी, मजबूत और जिताऊ उम्मीदवारों के पक्ष में करने के लिए खुद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और पार्टी के तमाम दिग्गज नेताओं ने कमान अपने हाथों में संभाल ली है। ग्रामीण अंचल की इन महत्वपूर्ण सीटों पर पार्टी का परचम फहराने के लिए टिकटार्थियों के नामों पर मैराथन बैठकों का दौर जारी है। राज्य के हर एक जिले और संभाग स्तर पर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि हर कोई इस बात को लेकर उत्सुक है कि इस बार पार्टी का सिंबल किसे मिलेगा और कौन बाजी मारेगा।
टिकट वितरण को लेकर जयपुर मुख्यालय पर दिग्गजों की हाईलेवल बैठकें
राजधानी जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मौजूदगी में टिकट वितरण को लेकर कई दौर की उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में केंद्रीय नेताओं, प्रदेश के मंत्रियों और स्थानीय संगठन के पदाधिकारियों ने मिलकर हर एक वार्ड और पंचायत समिति के समीकरणों की बारीकी से समीक्षा की है। पार्टी की रणनीति यह है कि टिकट केवल उसी को दिया जाए जिसकी जमीन पर मजबूत पकड़ हो, जो जनता के बीच सक्रिय रहा हो और जिसकी छवि पूरी तरह बेदाग हो। परिवारवाद और व्यक्तिगत सिफारिशों को दरकिनार करते हुए पूरी तरह से सर्वे रिपोर्ट्स और स्थानीय कार्यकर्ताओं के फीडबैक के आधार पर उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा खुद ग्राउंड जीरो के फीडबैक पर नजर बनाए हुए हैं ताकि पिछले चुनावों की तुलना में इस बार ग्रामीण निकाय चुनावों में पार्टी को ऐतिहासिक बढ़त मिल सके।
जिताऊ और मजबूत चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी में जुटी बीजेपी
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में जातिगत समीकरण, सामाजिक संतुलन और स्थानीय मुद्दों का बहुत बड़ा असर होता है। इसे ध्यान में रखते हुए बीजेपी आलाकमान ने इस बार टिकट वितरण में विशेष सावधानी बरतने का फैसला किया है। ओबीसी, मूल ओबीसी, एससी, एसटी और युवाओं के साथ-साथ महिला उम्मीदवारों को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देने की पूरी योजना बनाई गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जिला परिषद सदस्य और प्रधान पद के दावेदारों के चयन में उन चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है जो विपक्षी दलों केित मजबूत चुनौती पेश कर सकें। पार्टी का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को घर-घर तक पहुँचाने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारना है, ताकि किसी भी प्रकार के असंतोष से बचा जा सके।
उत्तर प्रदेश और राजस्थान के राजनीतिक जानकारों में पंचायत चुनावों की चर्चा
भले ही ये चुनाव राजस्थान के स्थानीय स्तर पर हो रहे हों, लेकिन देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश समेत अन्य पड़ोसी राज्यों के राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें भी इस चुनाव पर टिकी हुई हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, मेरठ और वाराणसी जैसे शहरों में भी चुनावी रणनीतिकार इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि कैसे सत्ताधारी दल जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत रखते हैं। राजस्थान में जिस तरह से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने खुद मोर्चा संभालते हुए एक-एक सीट की मॉनिटरिंग शुरू की है, उसकी चर्चा देश के अन्य हिस्सों में भी हो रही है। स्थानीय ग्रामीण मतदाताओं को साधने के लिए बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में कई बड़े वादे भी किए हैं, जिससे चुनावी माहौल पूरी तरह से गरमा गया है।
टिकट घोषणा के बाद शुरू होगा असली चुनावी दंगल और प्रचार का दौर
जैसे-जैसे बीजेपी और अन्य दलों द्वारा उम्मीदवारों के नामों की अंतिम सूची जारी की जाएगी, वैसे-वैसे राजस्थान के गाँवों में चुनावी सरगर्मी और अधिक तेज हो जाएगी। टिकट न मिलने से उपजे असंतोष को थामना और बागी तेवर दिखाने वाले नेताओं को मनाना दोनों ही दलों के लिए एक बड़ी चुनौती रहेगा। हालांकि, सीएम भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में पार्टी पूरी तरह से एकजुट होकर मैदान में उतरने का दावा कर रही है। देखना यह होगा कि दिग्गजों की इस कड़ी मेहनत और सोच-समझक