तिरंगे में घर लौटा RPF जवान: बारिश में ड्यूटी के दौरान ट्रेन से कटकर हुई थी मौत, गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी गई अंतिम विदाई
देश की सेवा करते हुए अपनी जान न्योछावर करने वाले रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के कांस्टेबल लोकेश कुमार पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। जब उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव जिरौली पहुंचा, तो पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। हर किसी की आंखें नम थीं। आरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों और जवानों ने अपने साथी को गार्ड ऑफ ऑनर (Guard of Honor) और पुष्प चक्र अर्पित कर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। इस दौरान ग्रामीणों ने 'लोकेश कुमार अमर रहे' के नारों से आसमान गुंजा दिया।
बारिश और वो खौफनाक रात: कैसे हुआ दर्दनाक हादसा?
यह हृदयविदारक घटना 9 अगस्त की है। लोकेश कुमार मध्य प्रदेश के हरदा रेलवे स्टेशन (Harda Railway Station) पर अपनी नाइट ड्यूटी कर रहे थे। उस समय तेज बारिश हो रही थी। गश्त के दौरान गीले प्लेटफॉर्म पर अचानक लोकेश का पैर फिसल गया और वह सीधे रेलवे ट्रैक पर जा गिरे। उसी वक्त ट्रैक पर लोकमान्य तिलक गोरखपुर मुंबई सुपरफास्ट एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 20301) तेज रफ्तार से गुजर रही थी। लोकेश को संभलने का मौका ही नहीं मिला और वह ट्रेन की चपेट में आ गए। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई।
तिरंगे में लिपटा शव देख बेसुध हुआ परिवार
हादसे की सूचना के बाद जीआरपी (GRP) और आरपीएफ की टीमों ने शव का पोस्टमार्टम कराकर उसे परिजनों को सौंप दिया था। लोकेश के भाई चंद्रशेखर पार्थिव शरीर लेकर गांव पहुंचे। अलसुबह जैसे ही तिरंगे में लिपटा शव घर के आंगन में पहुंचा, परिवार में चीख-पुकार मच गई। लोकेश की पत्नी रीना और उनके बच्चे बेसुध हो गए। 5 साल के बेटे अर्पित ने जब अपने पिता के अंतिम दर्शन किए, तो वहां मौजूद हर शख्स फफक-फफक कर रो पड़ा।
तीन साल से हरदा में दे रहे थे अपनी सेवाएं
कांस्टेबल लोकेश कुमार पिछले करीब तीन सालों से हरदा स्टेशन पर पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे थे। वह अपनी पत्नी रीना, 8 साल की बेटी याशिका और 5 साल के बेटे अर्पित के साथ हरदा में ही किराए के मकान में रहते थे। एक हंसते-खेलते परिवार के मुखिया का यूं अचानक चले जाना पूरे गांव और रेलवे पुलिस बल के लिए एक अपूरणीय क्षति है।